
जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत को संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इस दिन कई महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और शाम के समय भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार व्रत के दौरान पूजा-पाठ के साथ कुछ नियमों का पालन भी किया जाता है। ऐसे में आज शाम पूजा के समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए, आइए जानते हैं।
व्रत के दौरान पानी पीने से बचें
जितिया व्रत को परंपरागत रूप से निर्जला व्रत माना जाता है। इसलिए व्रत शुरू करने के बाद जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता। पूजा के दौरान आचमन या कुल्ला करते समय अनजाने में पानी निगलने से सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
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पूजा के लिए रखा गया जल भगवान को अर्पित करने या अर्घ्य देने के लिए होता है। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है या लंबे समय तक निर्जल रहने में दिक्कत होती है, तो स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।
केवल भगवान जीमूतवाहन की पूजा करके न उठें
जितिया व्रत की पूजा में भगवान जीमूतवाहन की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। इसके साथ ही परंपरा में चील और सियारिन की कथा सुनने या पढ़ने का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार, चील और सियारिन ने भी यह व्रत रखा था। कथा के जरिए व्रत के महत्व और इसके नियमों को समझाया जाता है। इसलिए पूजा के दौरान केवल पूजा सामग्री अर्पित करके उठने के बजाय व्रत की कथा का श्रवण करने की परंपरा भी निभाई जाती है।

पारण के समय का रखें विशेष ध्यान
जितिया व्रत में जितना महत्व उपवास और पूजा का माना जाता है, उतना ही महत्व पारण का भी बताया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत का पारण निर्धारित शुभ समय के अनुसार करना चाहिए। जल्दबाजी में समय से पहले पारण करने से बचें। वहीं निर्धारित समय निकल जाने के बाद भी पारण को टालना उचित नहीं माना जाता। पारण से पहले भगवान को भोग लगाने और इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करने की परंपरा है।
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व्रत के दिन इन बातों का भी रखें ध्यान
जितिया व्रत के दिन मन को शांत रखने और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की सलाह दी जाती है। इस दौरान किसी से अनावश्यक विवाद या बहस करने से बचना चाहिए। किसी के लिए अपशब्द बोलने या मन में नकारात्मक भाव रखने से भी बचने की परंपरा है। पूजा के दौरान श्रद्धा और संयम बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। महिलाएं भगवान जीमूतवाहन से अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।
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One thought on “Jitiya Vrat 2026: पूजा में भूलकर भी न करें ये तीन गलतियां”
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