गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 1.57 मीटर ऊपर
पटना के गांधी घाट पर सोमवार सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 50.41 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 1.57 मीटर ऊपर है। गांधी घाट और हाथीदह में गंगा का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर के करीब पहुंचने के बाद नदी के निचले इलाकों में पहले ही अलर्ट जारी किया जा चुका है। प्रशासन ने लोगों से नदियों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की है।
कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर
बिहार में सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि कई अन्य नदियों का जलस्तर भी खतरे के निशान को पार कर चुका है। अधिकारियों के अनुसार:
- गंडक नदी डुमरियाघाट और हाजीपुर में खतरे के निशान से ऊपर है।
- कोसी नदी बलतारा और कुरसेला में उफान पर है।
- बूढ़ी गंडक खगड़िया में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
- गंगा हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर है।
- पुनपुन नदी श्रीपालपुर में खतरे के निशान से ऊपर है।
- बागमती नदी बेनीबाद में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
- घाघरा नदी दरौली में खतरे के निशान से ऊपर है।
सितंबर में सामान्य से 55 फीसदी ज्यादा बारिश
अधिकारियों के मुताबिक, भारी बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सितंबर में अब तक बिहार में 69.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 55 फीसदी अधिक है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए इंजीनियरों को जरूरी संसाधन और मशीनरी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
190 कम्युनिटी किचन और 1,429 नावें तैनात
बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग जिलों में 190 कम्युनिटी किचन चलाए जा रहे हैं। वहीं, राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 1,429 नावों को लगाया गया है। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन, राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं पहुंचाने के साथ-साथ संवेदनशील इलाकों में तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।