
World Lung Cancer Day : हर साल एक अगस्त को वर्ल्ड लंग कैंसर डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरूक करना और बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानने के लिए प्रेरित करना है। बीते कुछ वर्षों में लंग्स कैंसर के मामलों में एक बदलाव देखने को मिला है। अब ऐसे लोगों में भी फेफड़ों के कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया।
डॉक्टरों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जिनमें बढ़ता वायु प्रदूषण, सेकेंड हैंड स्मोकिंग, घरेलू प्रदूषण और कुछ पर्यावरणीय कारक शामिल हैं। इन्हीं में से एक कारण घरों में नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाली अगरबत्ती का धुआं भी माना जा रहा है।
अगरबत्ती का धुआं कैसे बन सकता है खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगरबत्ती बनाने में कई तरह के रसायनों और सुगंधित पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। जब इसे जलाया जाता है तो इससे निकलने वाला धुआं हवा में फैल जाता है और सांस के जरिए शरीर के अंदर पहुंच सकता है।
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यशोदा मेडिसिटी हॉस्पिटल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अभिषेक यादव के मुताबिक, लंबे समय तक किसी भी तरह के धुएं के संपर्क में रहने से फेफड़ों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी लंग्स कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें वायु प्रदूषण और घरेलू प्रदूषण जैसे कारणों की भूमिका हो सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अगरबत्ती जलाने वाले हर व्यक्ति को कैंसर होगा, लेकिन लगातार और लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहने से जोखिम बढ़ सकता है।
घरों में धुएं से बचने के लिए क्या करें?
डॉक्टरों की सलाह है कि अगरबत्ती के धुएं से बचने के लिए इसका सीमित इस्तेमाल किया जाए और घर में हवा का उचित वेंटिलेशन रखा जाए। धार्मिक या सुगंध के लिए लोग घी का दीपक, कपूर या प्राकृतिक एसेंशियल ऑयल जैसे विकल्पों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा घर में मच्छर भगाने वाली कॉइल, धूम्रपान करने वाले व्यक्ति का धुआं और अन्य प्रदूषणकारी चीजों से दूरी बनाना भी जरूरी है।
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लंग्स कैंसर के शुरुआती संकेतों को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार लगातार रहने वाली खांसी को लोग मौसम बदलने या एलर्जी से जोड़ देते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति को तीन हफ्ते से ज्यादा समय तक खांसी बनी रहती है, खांसी के साथ खून आता है, सांस लेने में परेशानी होती है, अचानक वजन कम होता है या सीने में लगातार दर्द रहता है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
सावधानी और जागरूकता ही बचाव का रास्ता
लंग्स कैंसर से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि लोग अपने आसपास के वातावरण को लेकर सतर्क रहें। धूम्रपान से दूरी, प्रदूषण से बचाव और समय पर स्वास्थ्य जांच बीमारी के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।
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