दो टूक :  वांगचुक हैं क्या कि उनके कहने से प्रधान जैसे मंत्री को हटाया जाये

Sonam Wangchuk

राजेश श्रीवास्तव

सोनम वांगचुक को अनशन से जबरन इसलिए हटाया गया क्योंकि उनकी स्वास्थय गिर रहा था। कोर्ट का आर्डर था। चलिए मान लिया। लेकिन कोर्ट के आदेश और वांगचुक के स्वास्थ्य की इतनी और ईमानदार चिता होती तो संवाद करते। सरकार उनसे बातचीत करती! उनसे बात कर उनका अनशन समाप्त करवा सकती थी। ये सभी तो शांति तरीके से प्रोटेस्ट कर रहे थे। शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे पर! क्या गलत था इसमें। बातचीत करने के लिए किसने रोका था? यही से मंशा पर सवाल उठती है और ये सरकार को उनके हेल्थ की चिता और कोर्ट का आर्डर वाला तर्क बेमानी लगता है।

ये भी पढ़े

मौलाना जर्सिस का विवादित बयान, भगवान श्रीकृष्ण को पक्का नमाज़ी बता सनातनियों का किया घोर अपमान

सरकार ने बहुत होशियारी से काम किया। एक दिन पहले ही पुलिस कमिश्नर को तबादला किया। नये कमिश्नर आये और उन्होंने तीस सेकंड में ही धरने पर बैठे वांगचुक को धरना स्थल से ऐसे सादी वर्दी पहने पुलिस कर्मियों से उठवाया मानो वह कोई अपराधी हो। तीस सेकंड में हट्टे-कट्टे पुलिसकर्मी आये और वांगचुक को टांग ले गये और सामने से सफेद कपड़ा लगा दिया गया। वह भी रात के अधुरे में सुबह साढ़े तीन बजे तड़के पुलिस कर्मियों को एकत्र करके वांगचुक को अस्पताल पहुंचा देना वह भी तब जब एक दिन पहले ही उनके स्वास्थ्य को लेकर जो रिपोर्ट आयी थी उसमें वह पूरी तरह सही थे। लेकिन वांगचुक की सेहत ठीक तो थी लेकिन सरकार की सेहत शायद ठीक नहीं थी । उसके सामने तो वांगचुक की सेहत का सवाल नहीं था बल्कि आगामी 20 जुलाई को उनका संसद तक प्रदर्शन का डर साल रहा था कि कहीं 20 जुलाई को वांगचुक संसद तक चल दिये तो एक बड़ा आंदोलन खड़ा हो जायेगा। इसीलिए सरकार वांगचुक का धरना खत्म कराना चाहती थी। इसीलिए यह व्यवस्था की गयी। लेकिन यह कतई मत समझिये कि सरकार वांगचुक की सेहत को लेकर फिक्रमंद थी।

ये भी पढ़े

शाह-योगी की दिल्ली बैठक से बदल गई UP चुनाव की सियासी बिसात

वांगचुक का धरना कोई पहली बार नहीं था। इसके पहले भी कई बार मोदी सरकार में प्रदर्शन हो चुके हैं। याद कीजिये वह दौर जब सारे खिलाड़ी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे और प्रदर्शन था एक सांसद के खिलाफ तभी भी कुछ नहीं हुआ था। और आज निशाने पर एक मंत्री हैं। फिर आपको याद दिलाना पड़ेगा कि इसी सरकार के कद्दावर मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि इस्तीफे हमारे यहां नहीं यूपीए में होते थे। तो पता नहीं कैसे वांगचुक ने अपने को इतना बड़ा समझ लिया कि धर्मेन्द्र प्रधान को हटवाने की सोच भी ली। अरे आप बीस दिन नहीं खायेंगे, भूख हड़ताल करेंगे। या फिर भूखे मर भी जायेंगे तो क्या कोई मंत्री आपके कहने से हटा दिया जायेगा। ऐसा थोड़े ही होता है कि आप भूख हड़ताल पर बैठ जायेंगे तो कोई मंत्री हटा दिया जायेगा। अरे मंत्री बहुत बड़ी चीज होता है। 25 नीट के छात्र मर गये तो क्या हुआ। नीट पेपर लीक हो गया तो क्या हुआ। अरे कोई मरता है तो मरे। आखिर सरकार थोड़ी झुकती है ऐसी समस्याओं के आगे।

ये भी पढ़े

शाह-योगी की दिल्ली बैठक से बदल गई UP चुनाव की सियासी बिसात

माना आपने वोट देकर ही बनाया है तो क्या हुआ। आपने वोट दे दिय आपका काम खत्म । अब सरकार बन गयी है तो सरकार अपने हिसाब से चलेगी कि आपके हिसाब से। सरकार का कोई मंत्री इस्तीफा थोड़ी देगा और न उसको हटाया जायेगा। अगर वांगचुक के प्रदर्शन के चलते प्रधान को हटा दिया जायेगा तो क्या संदेश जायेगा। लोग लानत-मलानत नहीं भेजेंगे कि अरे बताओ सरकार वांगचुक से डर गयी। कतई ऐसा नहीं होना चाहिए। मैं तो कहता है बिल्कुल ऐसा मत करिये। आपके पास पुलिस है किसी को भी उठवा लीजिए। बल्कि जंतर-मंतर को ही बंद कर देना चाहिए क्योंकि आखिर जंतर-मंतर की जरूरत क्या है । वहां लोग फालतू में बैठते हैं सरकार की किरकिरी कराते रहते हैं। सरकार इतना अच्छा काम कर रही है उसकी पूरी दुनिया में ऐसे कृत्यों से निंदा होती है। यह ठीक नहीं है।

ये भी पढ़े

पुलिस नहीं सरकारी वकीलों की कमी से न्याय व्यवस्था लड़खड़ा रही

जंतर-मंतर से महिला पहलवानों को घसीटने से लेकर पूर्व सैनिकों के साथ बदसलूकी करने तक वर्तमान सरकार ने बार-बार लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलते हुए संविधान के प्रति अपना अनादर दिखाया है। वांगचुक ने पता नहीं क्यों इन सबके बावजूद पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्रों की आत्महत्या को भारत के भविष्य के लिए गंभीर मुद्दा समझ लिया। कोई भी ताकत छात्रों की हो या वांगचुक की वह सिस्टम से बड़ी नहीं हो सकती है। 111 दिन तक मां गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे प्रोफ़ेसर जी डी अग्रवाल हों या हरियाणा की ओलिपिक महिला पहलवान हों, 750 अन्नदाता किसान, दलित-आदिवासी हों या फिर पेपर लीक की बलि चढ़े बच्चे और उनके परिजन। इस तानाशाह सरकार ने किसी को नहीं बख्शा। इनकी नजर में कोई भी अगर आवाज उठाता है तो वह राष्ट्र-विरोधी, परजीवी है। जंतर-मंतर पर आज जो हुआ वह लोकतंत्र और संविधान के ऊपर एक और काला धब्बा है। अब लोग कह रहे हैं कि केंद्र सरकार को उनसे सार्थक बातचीत करनी थी चाहिए क्योंकि वांगचुक ने लगातार शिक्षा प्रणाली की अखंडता को लेकर महत्वपूर्ण चिताएं उठाई हैं। इन चिताओं पर ईमानदारी और रचनात्मक प्रतिक्रिया मिलनी चाहिए और उनके साथ सम्मान तथा गरिमा के साथ पेश आना चाहिए। सबसे बढ़कर उनकी सेहत और जिदगी को सर्वोच्चा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

ये भी पढ़े

क्या ऐसे बनेगा विकसित भारत?

सामाजिक कार्यकताã अन्ना हजारे ने भी कहा कि केंद्र सरकार को शिक्षाविद् सोनम वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए। अन्ना हजारे ने वीडियो संदेश में कहा, सरकार को उनके सब्र की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। (उनकी मांगों को लेकर) हां कहें या न, लेकिन बातचीत करने में क्या हर्ज है? अब हजारे को कौन समझाये कि भैया इस सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री जी पत्रकारों से तो बात करते नहीं है फिर वह आंदोलनकारी से बात करने जंतर-मंतर पर जायेंगे। पता नहीं आप लोग भी कैसे-कैसे सवाल उठाते हैं। ज्यादा मत बोलिये वरना वांगचुक को विदेशी ताकतों से मिला हुआ साबित करने में देर नहीं लगेगी। कुछ प्रयास सोशल मीडिया पर शुरू भी हो गये हैं। आप लोग व्यर्थ में सरकार पर तोहमत मत लगाइये कि सरकार वांगचुक से बात नहीं कर रही । जबरदस्ती उनका धरना खत्म करा रही। सरकार ने तो उनका कितना ख्याल रखा। जैसे ही उनकी सेहत खराब होने लगी उनको इतनी जल्दी मौके पर ही एंबुलेंस उपलब्ध कराकर अस्पताल पहुंचाया और इलाज भी शुरू करा दिया है। अब ऐसी सरकार भला किसी भी देश में होगी। आप लोग खुद ही सोचिए कि प्रधान साहब बेचारे कितना काम करते हैं। उन्होंने शिक्षा के स्तर को कितना आगे बढ़ाया। नीट पेपर लीक हो गया । 25 बच्चे मर गये तो आप लोग चिल्लाने लग गये कि प्रधान को हटाओ, ऐसे नहीं होता है। प्रधान रहेंगे चाहे वांगचुक जैसे हजारों लोग धरना देने लगे।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

तेजाब कांड: मीटिंग के दौरान महिला सहित अन्य लोगों पर तेजाब फेंकने वाला एक आरोपी गिरफ्तार

BCCI का बड़ा ऐलान: तीसरे वनडे के लिए हर्ष दुबे की एंट्री, वॉशिंगटन सुंदर बाहर

अहमदाबाद में पटाखा फैक्ट्री में आग, कई लोगों की मौत

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव, अमेरिका-ईरान की सैन्य कार्रवाई से खाड़ी क्षेत्र में हड़कंप

एक लाइव लोकेशन और खेल खत्म , प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या

Spread the love

2 thoughts on “दो टूक :  वांगचुक हैं क्या कि उनके कहने से प्रधान जैसे मंत्री को हटाया जाये

Comments are closed.

Manas Garden
Central UP homeslider

Manas Garden में धूमधाम से मना स्वतंत्रता दिवस समारोह, मातृशक्ति की भूमिका पर जोर

Manas Garden में स्वतंत्रता दिवस समारोह धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन मानस गार्डन वेलफेयर सोसायटी की ओर से किया गया। समारोह में उत्तर प्रदेश उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष अमरजीत त्रिपाठी मुख्य अतिथि रहे, जबकि अपर जिला जज चंद्रमोहन चतुर्वेदी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम की एंकरिंग पूर्व […]

Spread the love
Read More
BHU
homeslider Uttar Pradesh

BHU कैंपस में आवारा कुत्ते का 11 साल के बच्चे पर हमला, चेहरे और सिर पर लगे 50 टांके

सुरक्षित नहीं रही महामना की बगिया, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थान में कुत्तों का आतंक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय कैंपस में मासूम पर टूट पड़े कुत्ते, फिर जो हुआ सुनकर फट जाएगा कलेजा वाराणसी। BHU कैंपस में मॉर्निंग वॉक के दौरान 11 साल के बच्चे पर आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्चे को करीब […]

Spread the love
Read More
Today's Horoscope
Astrology homeslider

जानें किस राशि की चमकेगी किस्मत

Today’s Horoscope मेष : आज का दिन शुभ फलदायी रहेगा। गृह-नक्षत्रों के योग आपके अनुकूल रहेंगे और आर्थिक योजनाएं सफल होंगी। व्यावसायिक क्षेत्र में आर्थिक लाभ की स्थिति रहेगी। अधिक लोगों के साथ संम्पर्क बना रहेगा, जो भविष्य के लिए फायदेमंद होगा। कारोबार को लेकर प्रवास की भी संभावना है। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा। […]

Spread the love
Read More