दिल्ली आबकारी केस: अरविन्द केजरीवाल का अतिरिक्त हलफनामा, जज पर ‘हितों के टकराव’ का आरोप

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  दिल्ली आबकारी केस। दिल्ली के चर्चित एक्साइज मामले में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बड़ा कदम उठाते हुए सुनवाई कर रहीं जस्टिस न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ रिक्यूजल (मामले से अलग होने) की मांग की है।

इसके लिए उन्होंने अदालत में एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मुद्दा उठाया गया है।

हलफनामे में आरोप लगाया गया है कि जस्टिस शर्मा के दोनों बच्चे वरिष्ठ वकील तुषार मेहता के साथ पेशेवर रूप से जुड़े हैं। इसी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से पैरवी भी तुषार मेहता ही कर रहे हैं।

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  दिल्ली आबकारी केस:  न्यायिक निष्पक्षता पर उठे सवाल

केजरीवाल ने सवाल उठाया है कि ऐसी स्थिति में निष्पक्ष सुनवाई कैसे सुनिश्चित होगी और क्या जज, तुषार मेहता के खिलाफ कोई स्वतंत्र फैसला दे पाएंगी। आम आदमी पार्टी का कहना है कि न्यायपालिका की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जज को इस मामले से खुद को अलग कर लेना चाहिए। हलफनामे के अनुसार, नौ अप्रैल 2026 को लीगल रिपोर्टर सौरव दास द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के बाद यह जानकारी सामने आई। केजरीवाल का दावा है कि इन तथ्यों की पुष्टि सरकारी रिकॉर्ड से की गई, जिसके आधार पर यह अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया गया।

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हलफनामे में कहा गया है कि ये केवल औपचारिक पद नहीं हैं, बल्कि इनमें सरकारी केस, पेशी और आर्थिक लाभ जुड़े होते हैं।

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मामलों के आवंटन पर भी सवाल

केजरीवाल ने 13 सितंबर 2022 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामलों के आवंटन का अधिकार तुषार मेहता के पास होता है, जो पैनल वकीलों को केस सौंपते हैं। ऐसे में पूरे मामले में निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

फिलहाल इस मामले में अदालत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब नजर इस बात पर है कि जस्टिस शर्मा इस मांग पर क्या फैसला लेती हैं।

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