नया लुक ब्यूरो
गुजरात की राजनीति में आया एक ‘डिजिटल’ मोड़! वडोदरा जिला पंचायत की पोर सीट से BJP ने मशहूर रील क्रिएटर अंकिता परमार को टिकट देकर सबको चौंका दिया है। 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स वाली अंकिता अब मोबाइल स्क्रीन से निकलकर जनता के बीच अपनी किस्मत आज़माएंगी। क्या सोशल मीडिया की यह ‘मिलियन’ वाली ताकत उन्हें जिला पंचायत की कुर्सी तक पहुँचा पाएगी? युवाओं को राजनीति से जोड़ने का BJP का यह नया अंदाज़ वाकई चर्चा का विषय है।
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दूसरी ओर अंकिता को टिकट मिलते ही पार्टी के अंदर पुरानी और जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आने लगी है। BJP की ही पुरानी कार्यकर्ता नयना परमार ने अंकिता के खिलाफ खुलेआम बागी तेवर अपना लिए हैं। नयना ने न केवल विरोध जताया, बल्कि निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी है। माना जा रहा है कि नयना का यह कदम अंकिता के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। इस बगावत की वजह से BJP के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने का बड़ा डर है। पार्टी के लिए अब चुनौती यह है कि वह अपनों को कैसे मनाए, क्योंकि अगर वोट बंटते हैं तो इसका सीधा फायदा विरोधियों को मिल सकता है।
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अंकिता परमार के लिए राजनीति कोई नई चीज नहीं है। 5 साल पहले वे तालुका पंचायत की सदस्य चुनी गई थीं और ढाई साल तक अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाली। रायपुर की कलिंगा यूनिवर्सिटी से बी।कॉम करने वाली अंकिता फिलहाल प्रदेश युवा मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने राजनीति के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अपनी एक जबरदस्त पहचान बनाई है। यही वजह है कि उनकी रील के साथ-साथ उनकी कार्यशैली की भी चर्चा होती रही है। वे जानती हैं कि आज के दौर में जनता तक पहुंचने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म कितना जरूरी है और इसी का फायदा उन्हें इस चुनाव में मिल सकता है।
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अंकिता का जन्म वडोदरा में हुआ, लेकिन उनकी शादी पोर गांव में हुई। उनके ससुर 45 सालों तक सक्रिय राजनीति में रहे और उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए अंकिता ने इस फील्ड में कदम रखा। अंकिता का मानना है कि महिलाओं को ‘इंडिपेंडेंट’ यानी आत्मनिर्भर होना चाहिए। वे पीएम मोदी के ‘फिट इंडिया’ अभियान की बड़ी फैन हैं और खुद का जिम भी चलाती हैं, जहाँ वे रोज जमकर वर्कआउट करती हैं। वे अक्सर अपने वीडियो के जरिए युवाओं को स्वस्थ रहने का संदेश देती हैं, जिससे उनकी एक अलग ही ‘फैन फॉलोइंग’ बन गई है।
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BJP को उम्मीद है कि अंकिता की लोकप्रियता का फायदा उन्हें चुनावों में मिलेगा। पार्टी को लगता है कि एक युवा चेहरा, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हो, युवाओं और महिलाओं को ज्यादा बेहतर ढंग से पार्टी से जोड़ सकता है। अब देखना होगा कि सोशल मीडिया पर रील से दिल जीतने वाली अंकिता, क्या जनता का वोट भी जीत पाती हैं। क्या उनकी डिजिटल लोकप्रियता उन्हें जिला पंचायत की दहलीज तक पहुंचा पाएगी, यह आने वाले चुनाव के नतीजे तय करेंगे।
