डायबिटीज आज भारत में तेजी से बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारी बन गई है। खासकर उन लोगों में जिनके माता-पिता या भाई-बहन डायबिटीज के मरीज हैं, जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता है। फैमिली हिस्ट्री होने से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म की समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है। डॉक्टर आलोक जोशी के अनुसार टाइप-2 डायबिटीज में जेनेटिक फैक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसका मतलब है कि अगर आपके परिवार में यह बीमारी है, तो आपको अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
वजन पर नियंत्रण: अतिरिक्त वजन, खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी, डायबिटीज का मुख्य कारण है। BMI और कमर के साइज को नियमित रूप से चेक करें।
रोजाना एक्सरसाइज करें: कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि जैसे तेज़ चलना, योग, साइक्लिंग या हल्का व्यायाम ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद करता है। यह वजन कम करने में भी सहायक है।
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संतुलित आहार अपनाएं: फाइबर युक्त आहार जैसे दलिया, ओट्स और हरी सब्जियां खाएं। रिफाइंड कार्ब्स और शुगर से दूरी बनाए रखें। हेल्दी फैट्स और प्रोटीन का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
नियमित स्वास्थ्य जांच: परिवार में डायबिटीज होने पर 30 साल की उम्र के बाद सालाना फास्टिंग शुगर और HbA1c टेस्ट कराएं। इससे समय रहते बीमारी का पता लगाया जा सकता है।
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तनाव और नींद पर ध्यान दें: लगातार स्ट्रेस और नींद की कमी हार्मोनल असंतुलन पैदा करती है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। भरपूर नींद और मानसिक शांति जरूरी है।
मीठे और प्रोसेस्ड फूड से दूरी: कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड और पैकेज्ड स्नैक्स इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाते हैं। यदि आपका डायबिटीज का जोखिम है तो इनसे बचें।
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डायबिटीज के संकेत: बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, अचानक वजन घटना और लगातार थकान महसूस होना। इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सही समय पर सावधानी और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर डायबिटीज से बचाव संभव है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वास्थ्य जांच से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
