Analysis

Bharat Bhushan Tiwari
Analysis Bihar homeslider

पुलिसिया सत्ता बनाम कानून का राज

बिहार के भोजपुर की वह घटना, जिसमें भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में जान चली गई, आज एक बार फिर से समूचे देश में उस सवाल को जिंदा कर गई है जो बरसों से हमारी न्याय व्यवस्था की बुनियाद को हिला रहा है। जब किसी आरोपी के कथित आत्मसमर्पण के बाद भी उसकी लाश […]

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Acharya Chanakya
Analysis homeslider Uttar Pradesh

हादसों का मंज़र व्यवस्था की लापरवाही 

Acharya Chanakya आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले एक शाश्वत सत्य कहा था कि बुद्धिमान शासक वही है जो आने वाले संकट को पहले से भांप ले और उसके निराकरण का उपाय करे। लेकिन आज के ‘लोकतंत्र’ में जब हम लखनऊ की उस तीन मंजिला इमारत को ‘लाक्षागृह’ बनते देखते हैं, जहां 15 मासूम चिराग एक […]

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Passport
Analysis homeslider National

पासपोर्ट भी नहीं तो फिर क्या? नागरिकता के उलझे तारों में फंसा आम आदमी

Passport भारत में नागरिकता को लेकर चल रही हालिया बहस ने एक ऐसी गहरी कानूनी और सामाजिक पहेली को जन्म दिया है, जिसे सुलझाना अब आम नागरिक के लिए अनिवार्य हो गया है। हाल ही में विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवा दिवस पर जो स्पष्टीकरण दिया, उसने देश भर के मध्यम वर्ग में खलबली मचा […]

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UP BJP New Team
Analysis Politics

बड़े चेहरों-जातीय संतुलन से सजी यूपी BJP की नई टीम

  UP BJP New Team : उत्तर प्रदेश भाजपा की नई टीम में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश साफ दिख रही है। पार्टी ने जिस तरह ब्राह्मण, पिछड़ा, दलित और अलग-अलग इलाकों से जुड़े चेहरों को जगह दी है, उससे यह संदेश दिया जा रहा है कि संगठन केवल एक वर्ग या एक […]

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BJP vs TMC
Analysis

नेताओं की मजबूरी पर वफादारी का चोला

  BJP vs TMC : राजनीति में वफादारी और मजबूरी के बीच की लकीर अक्सर इतनी पतली होती है कि आम आदमी तो क्या, खुद नेता भी भूल जाते हैं कि वे किस तरफ खड़े हैं। तृणमूल कांग्रेस के तीन सांसदों शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और बाबुल सुप्रियो की कहानी इसी सच्चाई की एक जीती-जागती […]

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Analysis homeslider Politics

आती-जाती सत्ता के साथ बदलती नेताओं की वफादारी

Politics पारिवारिक और सामाजिक जीवन में जहां वफादारी सबसे बड़ी पूंजी होती है, वहीं क्या सियासत की दुनिया में वफादारी सबसे सस्ती चीज होती है? आज यह सवाल हर तरफ पूछा जा रहा है। क्या जब तक सत्ता का ‘सूरज’ चमकता रहता है, दरबार में भीड़ लगी रहती है। लेकिन जैसे ही सूरज ‘अस्ताचल’ होने […]

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Comedian Praneet More
Analysis homeslider

व्यूज की अंधी दौड़ में लहूलुहान होती सामाजिक मर्यादा

Comedian Praneet More गुरुग्राम के एक स्टैंडअप कॉमेडी शो में ₹370 की बिरयानी की कीमत एक महिला की अस्मिता से लगाने वाले दर्शक का वीडियो और उस पर ताली पीटते कॉमेडियन प्रणीत मोरे का ठहाका सिर्फ एक तात्कालिक विवाद नहीं, बल्कि भारतीय स्टैंडअप कॉमेडी के उस गहरे नैतिक और वैचारिक पतन का दस्तावेज़ है, जो […]

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Jail
Analysis Bihar homeslider

अदालत में रसूख का खेल, अमीर को बेल गरीब को जेल

Jail भारतीय न्यायपालिका की कार्यप्रणाली को लेकर आम आदमी के मन में हमेशा से एक गहरी उलझन रही है। कानून की किताबों में लिखा है कि न्याय की देवी की आँखों पर पट्टी बंधी होती है, यानी वह अमीर-गरीब, बड़े-छोटे, मशहूर-गुमनाम सबको एक तराजू पर तौलती है। लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर इस आदर्श की धज्जियां […]

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BJP
Analysis homeslider

राज्यसभा में दो-तीन बहुमत से मोदी सरकार को असीम शक्तियां!

भारतीय राजनीति में 18 जून  की तारीख एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। देश के 12 राज्यों में राज्यसभा की 26 सीटों पर होने वाले चुनाव केवल सांख्यिकीय फेरबदल नहीं हैं, बल्कि ये उस संवैधानिक भविष्य की नींव रख सकते हैं जिसे भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन वर्षों से आकार […]

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New Generation
Analysis homeslider National Politics

राहुल गांधी का 20 साल पुराना सपना, कांग्रेस में ‘ओल्ड गार्ड’ की जगह अब ‘न्यू जेनरेशन’ राज

New Generation भारतीय राजनीति के सबसे पुराने दल कांग्रेस के भीतर इन दिनों एक खामोश लेकिन बेहद गहरा बदलाव आकार ले रहा है। यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे दो दशकों की एक लंबी राजनीतिक तपस्या और जिद छिपी है। साल 2004 में जब राहुल गांधी ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा […]

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