हादसों का मंज़र व्यवस्था की लापरवाही 

Acharya Chanakya
अजय कुमार                             
अजय कुमार

Acharya Chanakya आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले एक शाश्वत सत्य कहा था कि बुद्धिमान शासक वही है जो आने वाले संकट को पहले से भांप ले और उसके निराकरण का उपाय करे। लेकिन आज के ‘लोकतंत्र’ में जब हम लखनऊ की उस तीन मंजिला इमारत को ‘लाक्षागृह’ बनते देखते हैं, जहां 15 मासूम चिराग एक साथ बुझ गए, तो चाणक्य की वह सीख एक तंज की तरह चुभती है। यह महज एक हादसा नहीं है, बल्कि उस प्रशासनिक शीतनिद्रा का परिणाम है जो केवल लाशों के ढेर पर ही जागती है। लखनऊ के अलीगंज में जो हुआ, वह कोई इत्तेफाक नहीं था। यह उस जर्जर और भ्रष्ट व्यवस्था का निचोड़ है, जहां सुरक्षा मानकों को फाइलों के भीतर दफन कर दिया जाता है और भ्रष्टाचार को धरातल पर फलने-फूलने का मौका दिया जाता है।

ये भी पढ़े

पासपोर्ट भी नहीं तो फिर क्या? नागरिकता के उलझे तारों में फंसा आम आदमी

सवाल यह नहीं है कि कोचिंग सेंटर में आग क्यों लगी, सवाल यह है कि कोचिंग सेंटर वहां क्यों चल रहा था? 2014 में जिस इमारत का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए पास हुआ, वह कब और कैसे एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में तब्दील हो गई? 2016 में जब लखनऊ विकास प्राधिकरण ने उस अवैध निर्माण को ढहाने का आदेश दिया था, तो महज दो महीने बाद वह आदेश किस ‘चमत्कारिक’ दबाव में रद्द कर दिया गया? इन 10 वर्षों के अंतराल में 30 इंजीनियर और जोनल अधिकारी उस क्षेत्र से गुजरे, क्या किसी की नजर उस इमारत की अवैध व्यावसायिक गतिविधि पर नहीं पड़ी? आंकड़े चीख-चीख कर कह रहे हैं कि यह लापरवाही का नहीं, बल्कि मिलीभगत का एक सुनियोजित तंत्र है। एलडीए के सूत्रों की मानें तो शहर में 30 हजार से अधिक आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़े हैं और इनके पीछे इंजीनियरों की एक तय ‘रेट लिस्ट’ काम करती है। एक चार मंजिला अवैध इमारत के निर्माण पर 20 से 25 लाख रुपये की वसूली का खेल चलता है। जब व्यवस्था ही पैसों की नींव पर टिकी हो, तो सुरक्षा की उम्मीद करना ही बेमानी है।

ये भी पढ़े

बड़े चेहरों-जातीय संतुलन से सजी यूपी BJP की नई टीम

लखनऊ का यह हादसा दिल्ली के मालवीय नगर के होटल और बिहार के निजी अस्पताल की घटनाओं की कड़वी यादें ताजा कर देता है। हर बार घटना के बाद सिस्टम का वही पुराना ‘स्क्रिप्टेड’ ड्रामा शुरू होता है। हादसे के अगले ही दिन प्रशासन अति-सक्रिय हो जाता है, सीलिंग की कार्रवाई होती है, अधिकारियों को सस्पेंड किया जाता है और कुछ दिनों के लिए एक खौफ का माहौल बनाया जाता है। लेकिन क्या यह समाधान है? कानपुर में 30 से अधिक बड़ी कोचिंग संस्थाओं को सील कर देना, प्रयागराज और वाराणसी में धड़ाधड़ कार्रवाई करना यह सब महज एक स्वांग है। अगर यही फुर्ती हादसे से पहले दिखाई गई होती, तो उन 15 घरों के बुझ चुके चिराग आज अपनी कक्षाओं में पढ़ रहे होते। ब्रिटिश दार्शनिक एडमंड बर्क ने सही कहा था कि समय पर सावधानी बरतना बाद में पछताने से कहीं बेहतर है। दुर्भाग्य यह है कि हमारे यहां प्रशासन ‘सावधानी’ के बजाय ‘हादसे’ के बाद ‘दिखावटी कार्रवाई’ को अपनी जिम्मेदारी समझता है।

इस पूरे प्रकरण की सबसे दर्दनाक कड़ी वह ‘फायरमैन’ का वायरल वीडियो है, जिसने व्यवस्था की चूलें हिला दी हैं। एक पढ़ा-लिखा सिपाही जब अपनी जान जोखिम में डालकर यह आरोप लगाता है कि असली दोषी बड़े अधिकारी हैं, तो सिस्टम का चेहरा और भी घिनौना हो जाता है। जब तक नीचे के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जाता रहेगा और मलाई खाने वाले अधिकारी सुरक्षित रहेंगे, तब तक जवाबदेही कभी तय नहीं हो पाएगी। मुख्यमंत्री ने मिशन मोड में फायर सेफ्टी ऑडिट के निर्देश दिए हैं, जो स्वागत योग्य है, लेकिन यह ऑडिट कागजों की खानापूर्ति बनकर न रह जाए, इसकी गारंटी कौन लेगा? क्या हर अस्पताल, नर्सिंग होम और कोचिंग सेंटर का वास्तविक ऑडिट होगा, या फिर वही पुरानी परंपरा चलेगी जहां एनओसी केवल टेबल के नीचे के लेन-देन से मिल जाती है?

ये भी पढ़े

नेताओं की मजबूरी पर वफादारी का चोला

अवैध निर्माण की समस्या महानगरों में एक कैंसर की तरह फैल चुकी है। बेसमेंट में कोचिंग सेंटर, पार्किंग की जगह पर दुकानें और संकरी गलियों में बहुमंजिला इमारतों का जाल यह सब बिना स्थानीय निकाय, अग्निशमन विभाग और पुलिस की मिलीभगत के संभव नहीं है। दिल्ली अग्निशमन सेवा के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ राजधानी में इस साल आग लगने की घटनाओं में 65 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद अगर हम सबक नहीं ले रहे, तो इसका अर्थ है कि हम अगली त्रासदी का निमंत्रण दे रहे हैं। किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसकी गगनचुंबी इमारतों से नहीं, बल्कि उस सुरक्षा चक्र से होती है जिसे वह अपने नागरिकों के लिए बुनता है। लखनऊ की आग ने साबित कर दिया है कि हमारे सुरक्षा ढांचे में कोई बुनियादी दोष है। आग सिर्फ बिजली के शॉर्ट सर्किट से नहीं लगती, यह लापरवाही की उन लपटों से भी लगती है जो सिस्टम की खामोशी से ईंधन पाती हैं।

ये भी पढ़े

व्यूज की अंधी दौड़ में लहूलुहान होती सामाजिक मर्यादा

राजनीतिक बयानबाजी अपनी जगह है। डिप्टी सीएम का यह कहना कि पिछली सरकार के भ्रष्टाचार का परिणाम है, और अखिलेश यादव का यह पूछना कि भ्रष्टाचार के ऊपर आखिर कौन सी ताकत है यह सब राजनीति के खेल हैं। लेकिन इन आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच वो 15 परिवार हमेशा के लिए सूने हो गए। जिस इमारत में आग लगी, वहां न तो आपातकालीन निकास था, न ही दमकल के आधुनिक यंत्र। यह कैसी विडंबना है कि एक तरफ ‘डिजिटल इंडिया’ की बात हो रही है और दूसरी तरफ हम उन बुनियादी सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित नहीं कर पा रहे जो 21वीं सदी के शहरी जीवन की अनिवार्य शर्त हैं।

ये भी पढ़े

ये पंजाब है साहब! यहाँ की एक बहू ने अपने DGP ससुर लड़ाया इश्क़

समय अब रस्म-अदायगी से ऊपर उठने का है। जब तक हर कोचिंग सेंटर के पास फायर एनओसी, हर व्यावसायिक इमारत के पास सही नक्शा और हर अधिकारी के पास अपनी जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ये आग के हादसे थमने वाले नहीं हैं। अब जरूरत है एक ऐसे सख्त कानून की, जहां लापरवाही की जिम्मेदारी सीधे उस क्षेत्र के अधिकारी की तय हो, न कि सिर्फ बिल्डिंग मालिक की। जब तक हादसे की जांच सिर्फ दोषियों को खोजने तक सीमित रहेगी, तब तक हम सिर्फ एक और अगली त्रासदी का इंतजार करेंगे। लखनऊ का लाक्षागृह हमें चेतावनी दे रहा है कि अगर अब भी सिस्टम नहीं जागा, तो आने वाली राख में हमारा ही भविष्य दफन होगा। वक्त का तकाजा है कि हम शोक संवेदनाओं के लफ्जों से आगे बढ़कर, सुरक्षा के धरातल पर ठोस कार्रवाई करें, वरना इतिहास हमें केवल एक ‘लापरवाह समाज’ के रूप में याद रखेगा।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

केतन अग्रवाल हत्याकांड में बड़ा खुलासा: 10 घंटे की पूछताछ में साहिल गोयल ने तोड़ी चुप्पी

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन प्रक्रिया शुरू, CBSE रिवैल्यूएशन छात्रों को मिली राहत…जानें पूरी गाइडलाइन

सिर्फ 20,000 रुपये की SIP से बन सकता है एक  करोड़ का फंड! जानिए कितने साल लगेंगे

जकार्ता में गरजे धीरेंद्र शास्त्री, राम मंदिर विवाद को बताया ‘आस्था की लूट’…आरोपियों पर साधा निशाना

शनिवार को इन राशियों को मिलेगी सफलता, शनि कृपा से दूर होंगी परेशानियां

Spread the love

2 thoughts on “हादसों का मंज़र व्यवस्था की लापरवाही ”

Comments are closed.

Lucknow
Politics Uttar Pradesh

रामगोविंद चौधरी के निधन से सपा में शोक की लहर

Lucknow: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 की रात लखनऊ के SGPGI में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की सूचना सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। कई राजनीतिक […]

Spread the love
Read More
Untitled 6 copy
Crime News homeslider Uttar Pradesh

महराजगंज कचहरी में महिलाओं की पिटाई, मौके पर मची अफरा-तफरी

महिलाएं चीखती रहीं और हमलावर लात-घूंसा बरसाते रहे ए अहमद सौदागर Lucknow:  किसी बात को लेकर दो महिलाओं को दो हमलावरों ने वकील और पुलिसकर्मियों के सामने जानवरों सलीका व्यवहार कर इंसानियत को भी शर्मसार कर दिया। महाराजगंज की भरी कचहरी में बेखौफ दबंगों ने दो महिलाओं को लात-घूंसों से पिटाई कर घसीट दिया।   […]

Spread the love
Read More
Kanpur
homeslider Uttar Pradesh

कानपुर से दिल्ली के लिए चलेगी नई डेली ट्रेन, 25 साल बाद मिला बड़ा तोहफा

Kanpur: कानपुर और दिल्ली के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। कानपुर सेंट्रल से आनंद विहार के बीच जल्द ही एक नई दैनिक ट्रेन का संचालन शुरू होने जा रहा है। रेलवे बोर्ड ने इस ट्रेन को मंजूरी दे दी है। नई ट्रेन का नाम कानपुर मेल रखा गया […]

Spread the love
Read More