
Wayanad: केरल के वायनाड से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो जिम्मेदारी और जज्बे की मिसाल पेश करती है। वायनाड की जिला कलेक्टर मेघाश्री डीआर ने अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद सीधे अस्पताल का रुख किया और अगले ही दिन अपनी तीसरी बेटी को जन्म दिया।
खास बात यह रही कि डिलीवरी के महज छह दिन बाद ही उन्होंने दोबारा काम संभाल लिया। मेघाश्री हाल ही में अपनी विदाई सेरेमनी में अपनी तीनों बेटियों के साथ नजर आईं। उनकी सबसे छोटी बेटी अभी नवजात है। यह तस्वीर और उनकी कहानी सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रही।
24 अगस्त को ऑफिस का काम निपटाया, अगले दिन बनीं मां
24 अगस्त को मेघाश्री ने दिनभर के जरूरी आधिकारिक काम पूरे किए। इसके बाद वह घर जाने के बजाय सीधे अस्पताल पहुंचीं। अगले दिन यानी 25 अगस्त को उन्होंने अपनी तीसरी बेटी को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद उन्होंने करीब पांच दिन आराम किया और एक सितंबर से वायनाड के कलेक्टर कैंप ऑफिस से दोबारा काम शुरू कर दिया।
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‘मैटरनिटी लीव लेना जरूरी नहीं, फैसला व्यक्तिगत है‘
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में मेघाश्री ने बताया कि डिलीवरी के बाद काम जारी रखने का फैसला उनका व्यक्तिगत था। उन्होंने कहा कि मैटरनिटी लीव लेना अनिवार्य नहीं है और यह फैसला हर महिला की सेहत, परिस्थिति और जरूरत पर निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि कई ऐसी फाइलें थीं, जिन पर जिला कलेक्टर की मंजूरी जरूरी थी। इसी वजह से उन्होंने कैंप ऑफिस से जरूरी प्रशासनिक काम संभालना शुरू किया।
‘गुड मॉर्निंग कलेक्टर‘ प्रोग्राम भी रखा जारी
काम पर लौटने के बाद मेघाश्री ने अपने नियमित कार्यक्रमों को भी जारी रखा। हाल ही में उन्होंने कॉलेज के छात्रों के साथ ऑनलाइन बातचीत की। यह बातचीत उनके ‘गुड मॉर्निंग कलेक्टर’ कार्यक्रम का हिस्सा थी।
मेघाश्री सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहती हैं। वह खुद को एक IAS अफसर के साथ-साथ पत्नी, मां और एक गर्वित बेटी के रूप में पेश करती हैं। उनकी कहानी प्रशासनिक जिम्मेदारियों और निजी जीवन के बीच संतुलन की एक अलग तस्वीर पेश करती है।
अब दो महीने की मैटरनिटी लीव पर जाएंगी
मेघाश्री 2017 बैच की IAS अधिकारी हैं। बुधवार को वह अपनी जगह आने वाली अधिकारी चेल्सासिनि वी. को जिला कलेक्टर का चार्ज सौंपेंगी। इसके बाद वह करीब दो महीने की मैटरनिटी लीव पर जाएंगी।
मेघाश्री की कहानी इसलिए खास है क्योंकि एक ओर वह मां बनने के अनुभव से गुजर रही थीं, तो दूसरी ओर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभाल रही थीं। उनकी यह व्यक्तिगत पसंद और काम के प्रति प्रतिबद्धता कई लोगों के लिए चर्चा और प्रेरणा का विषय बनी है।
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One thought on “अस्पताल से कलेक्टर ऑफिस तक का सफर”
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