
AI WhatsApp Chatbot : बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने और माता-पिता व देखभाल करने वालों को सही जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मिसिंग लिंक ट्रस्ट (MLT) ने एक नई पहल शुरू की है। संस्था ने Capgemini India के सहयोग से ‘खुली बात’ नाम से AI आधारित WhatsApp चैटबॉट लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य बच्चों से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर माता-पिता और अभिभावकों को आसान भाषा में जानकारी, मार्गदर्शन और जरूरत पड़ने पर सहायता के संसाधन उपलब्ध कराना है। यह पहल मुंबई के ईस्ट वार्ड के 100 BMC स्कूलों में चलाए जा रहे बाल सुरक्षा कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके तहत बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता, शिक्षकों और देखभाल करने वालों को भी सुरक्षा से जुड़े जरूरी विषयों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
बाल सुरक्षा को लेकर बातचीत पर जोर
बाल शोषण को रोकने के लिए बच्चों को केवल खतरे से बचाना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें रिश्तों की सीमाओं, सहमति, सुरक्षित और असुरक्षित व्यवहार तथा असहज परिस्थितियों को पहचानने के बारे में भी समझाना जरूरी है। साथ ही बच्चों को यह जानकारी होना जरूरी है कि किसी परेशानी की स्थिति में वे किससे और किस तरह मदद मांग सकते हैं। इसी सोच के तहत ‘खुली बात’ को तैयार किया गया है। यह प्लेटफॉर्म अभिभावकों को बच्चों के साथ संवेदनशील विषयों पर बातचीत शुरू करने और सही तरीके से उनका साथ देने में मदद करेगा।
WhatsApp पर ऐसे मिलेगी मदद
‘खुली बात’ को WhatsApp आधारित रखा गया है, ताकि इसे इस्तेमाल करने के लिए किसी नए या जटिल प्लेटफॉर्म की जरूरत न पड़े। अभिभावक 6003060040 नंबर पर WhatsApp के जरिए ‘Hi’ भेजकर बातचीत शुरू कर सकते हैं। चैटबॉट के माध्यम से सीमाओं, सहमति, रिश्तों, ऑनलाइन सुरक्षा, दुर्व्यवहार, शोषण और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अन्य विषयों पर जानकारी हासिल की जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर उपयोगकर्ताओं को संबंधित सहायता और रिपोर्टिंग संसाधनों तक पहुंचने के रास्ते भी बताए जाएंगे।
100 BMC स्कूलों में चल रहा कार्यक्रम
मिसिंग लिंक ट्रस्ट मुंबई के 100 BMC स्कूलों में रोकथाम आधारित बाल सुरक्षा कार्यक्रम पर काम कर रहा है। इस साझेदारी के तहत तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है। पहले चरण में करीब 10,000 किशोरों को सुरक्षा से जुड़ी शिक्षा देने की योजना है। इसके साथ माता-पिता, शिक्षकों और देखभाल करने वालों के लिए AI आधारित WhatsApp चैटबॉट विकसित किया गया है। तीसरे स्तर पर विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के जरिए बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में सिस्टम की प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है।
जमीनी अनुभव पर आधारित है चैटबॉट
मिसिंग लिंक ट्रस्ट की फाउंडर ट्रस्टी और CEO लीना केजरीवाल ने कहा कि ‘खुली बात’ को केवल सामान्य AI सलाह देने वाले टूल के तौर पर नहीं बनाया गया है। इसके पीछे संस्था के एक दशक से अधिक समय के जमीनी अनुभव और स्थानीय स्तर पर सामने आने वाले जोखिमों की समझ को शामिल किया गया है। उनके मुताबिक, चैटबॉट में तैयार किए गए नॉलेज बेस में जेंडर, पूर्वाग्रह और पावर डायनामिक्स जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग डिजिटल समझ रखने वाले अभिभावकों के लिए भी इसे उपयोगी और आसान बनाना है।
टेक्नोलॉजी के जरिए सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने की कोशिश
Capgemini India के वाइस प्रेसिडेंट और CSR हेड कुमार अनुराग प्रताप ने कहा कि बच्चों के ऑनलाइन समय में बढ़ोतरी के साथ नए अवसरों के साथ जोखिम भी बढ़े हैं। ऐसे में शुरुआती स्तर पर जागरूकता और रोकथाम बेहद जरूरी है। खुली बात’ के जरिए परिवारों तक बच्चों की सुरक्षा से जुड़े भरोसेमंद संसाधन ऐसे प्लेटफॉर्म पर पहुंचाने की कोशिश की गई है, जिसका वे पहले से इस्तेमाल करते हैं। यह पहल MLT के Missing Awareness and School Safety Programme (MASSp) के तहत किए जा रहे व्यापक रोकथाम अभियान को भी आगे बढ़ाती है। इसका लक्ष्य बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवारों में खुली बातचीत, जागरूकता और समय रहते मदद मांगने की संस्कृति को मजबूत करना है।
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