
लोकतांत्रिक विरोध में अपशब्दों की अनुमति नहीं
अपशब्द सुन रहा प्रशासन क्यों रहा खामोश?
मनोज कुमार त्रिपाठी
Gorakhpur : ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा गत दिवस गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान मर्यादा की लक्ष्मण रेखा पार करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री और गुरु गोरखनाथ मंदिर के महंत योगी आदित्यनाथ जी के विरुद्ध अपशब्दों का प्रयोग अत्यंत ही निंदनीय है, और दंडनीय भी। स्थानीय प्रशासन को मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए नेहा बोरा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किया जाना अपेक्षित है।
उक्त विचार वरिष्ठ पत्रकार और एडवोकेट रत्नाकर सिंह ने आज एक प्रेस वार्ता में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात कहने का और राजनीतिक विरोध के दौरान आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट और स्वस्थ शब्दावली का प्रयोग ही किया जाना चाहिए। महज ख्याति प्राप्त करने के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध अपशब्दों का प्रयोग लोकतंत्र के किसी भी परिभाषा में नहीं आता है और नहीं सभ्यता के दायरे में ही आता है।
नेहा बोरा एक पढ़ी-लिखी उच्च शिक्षा प्राप्त महिला है और उनसे इस प्रकार की भाषा का प्रयोग एक गलत परंपरा को जन्म देने वाला है। माना जा रहा है कि योगी के गढ़ में उनके विरुद्ध इस प्रकार की शब्दावली का प्रयोग नेहा द्वारा पूर्वांचल में चर्चा में आने का प्रयास है।
श्री सिंह ने कहा कि गोरखपुर स्थित स्थानीय सिविल लाइंस के एक अतिथि गृह में आयोजित जेन जी महाजुटान के गोरखपुर चरण में युवाओं की बेरोजगारी, पेपर लीक, असंतोष आदि मुद्दों पर आयोजित एक कार्यक्रम में नेहा बोरा को संबोधन करना था जिसके लिए चार सितंबर को अतिथि गृह बुक कराया गया था।
13 सितंबर तक प्रशासन द्वारा इस कार्यक्रम को अनुमति नहीं मिली थी। 14 सितंबर को यह आयोजन क्या प्रशासन की सहमति के साथ हुआ था, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है लेकिन इतना जरूर है कि जब यह कार्यक्रम चल रहा था और नेहा बोरा द्वारा अपशब्दों का प्रयोग किया जा रहा था तो माइक की आवाज निश्चित तौर पर वहां भारी संख्या में एकत्र पुलिस अधिकारियों, जवानों और प्रशासन के लोगों तक भी पहुंच रही थी।
ऐसा कौन सा कारण था कि प्रशासनिक अमले ने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सार्वजनिक रूप से किए जा रहे इस शब्दावली के प्रयोग पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई और नहीं इस कार्यक्रम के बाद कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
प्रशासन बताए कि क्या नेहा बोरा को अनुमति मिली थी और अगर नहीं मिली थी तो यह आयोजन कैसे हो रहा था? माना जा रहा है कि सीपीआई (एमएल ) से प्रभावित आइसा संगठन पूर्वांचल के युवाओं में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और हाल के दिनों में नई दिल्ली के जंतर मंतर में जेन जी के प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आई नेहा बोरा को अपना चेहरा बना कर सामने किया जा रहा है।
इस घटना से योगी के समर्थकों में भी काफी आक्रोश है और इस पर संभव है कि कुछ मुकदमे भी दायर किए जाएं। लेकिन योगी जी के गृह नगर और गढ़ में घटित इस घटना का प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेकर सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री और एक मठाधीश को गाली दिए जाने पर मुकदमा दर्ज कर कारवाई किया जाना चाहिए था।
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One thought on “नेहा ने लांघी मर्यादा की लक्ष्मण रेखा, कार्रवाई अपेक्षित”
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