
एक लैब की ‘गलती’ और बदल गया मेडिकल इतिहास
Penicillin Discovery: तीन सितंबर का दिन मेडिकल साइंस के इतिहास में बेहद खास माना जाता है। साल 1928 में इसी दिन ब्रिटिश वैज्ञानिक अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने ऐसी खोज की, जिसने बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज की दिशा ही बदल दी। उनकी खोज थी पेनिसिलिन, जिसे आधुनिक एंटीबायोटिक युग की शुरुआत का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
आज निमोनिया, गले के संक्रमण या दूसरे बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाएं आम हैं। लेकिन एक समय ऐसा था जब मामूली चोट या खरोंच भी गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती थी और कई बीमारियां जानलेवा साबित होती थीं। ऐसे दौर में फ्लेमिंग की खोज ने चिकित्सा जगत को एक नया रास्ता दिया।
छुट्टी से लौटे फ्लेमिंग को पेट्री डिश में दिखी अनोखी चीज
कहानी तीन सितंबर 1928 की है। अलेक्जेंडर फ्लेमिंग छुट्टियों से लौटकर लंदन के सेंट मैरी हॉस्पिटल स्थित अपनी प्रयोगशाला में पहुंचे। वहां उन्होंने स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया पर चल रहे प्रयोगों की पेट्री डिश की जांच शुरू की।
इन्हीं डिश में से एक ने उनका ध्यान खींचा। उसमें बैक्टीरिया की कॉलोनियों के बीच एक जगह खाली थी और वहां एक तरह की फफूंद यानी मोल्ड उग आया था। फ्लेमिंग ने गौर किया कि इस मोल्ड के आसपास बैक्टीरिया की वृद्धि नहीं हो रही थी।
ब्रेड पर दिखने वाली फफूंद से जुड़ी थी खोज
फ्लेमिंग ने जिस फफूंद का अध्ययन किया, वह Penicillium प्रजाति से संबंधित थी। उन्होंने इससे निकलने वाले पदार्थ को शुरू में ‘मोल्ड जूस’ जैसे शब्दों से संदर्भित किया। आगे के परीक्षणों से पता चला कि यह पदार्थ कई हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने की क्षमता रखता था। इसमें स्ट्रेप्टोकोकस जैसे बैक्टीरिया भी शामिल थे, जो कई गंभीर संक्रमणों का कारण बन सकते हैं। फ्लेमिंग को समझ आ गया था कि उन्होंने एक महत्वपूर्ण एंटी-बैक्टीरियल पदार्थ खोज लिया है।
1929 में प्रकाशित हुई रिसर्च
पेनिसिलिन को अलग करना और स्थिर रूप में तैयार करना आसान नहीं था। फ्लेमिंग और उनके सहयोगियों ने इसे शुद्ध करने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती दौर में वे सीमित मात्रा में ही कच्चा पदार्थ तैयार कर सके।
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इसके बावजूद फ्लेमिंग ने अपनी खोज पर रिसर्च जारी रखी। 1929 में British Journal of Experimental Pathology में उन्होंने अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए। हालांकि, उस समय पेनिसिलिन को बड़े पैमाने पर दवा के रूप में इस्तेमाल करने की राह अभी लंबी थी। बाद के वर्षों में दूसरे वैज्ञानिकों ने फ्लेमिंग की खोज पर आगे काम किया और पेनिसिलिन को प्रभावी दवा के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पेनिसिलिन से पहले संक्रमण का इलाज था बड़ी चुनौती
एंटीबायोटिक युग से पहले बैक्टीरियल इंफेक्शन का इलाज बेहद मुश्किल था। मामूली कट या चोट के बाद भी संक्रमण गंभीर रूप ले सकता था। कई मामलों में बैक्टीरिया शरीर में फैल जाते थे और मरीज की हालत जानलेवा हो जाती थी।
डॉक्टरों के पास ऐसे संक्रमणों से लड़ने के लिए सीमित प्रभावी विकल्प थे। कई बार इलाज का दारोमदार मरीज की प्रतिरोधक क्षमता पर ही निर्भर करता था। पेनिसिलिन ने इस स्थिति को बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। इसके बाद बैक्टीरियल संक्रमणों के खिलाफ प्रभावी एंटीबायोटिक दवाओं के विकास का रास्ता खुला।
फ्लेमिंग की खोज ने बदल दी चिकित्सा की दुनिया
अलेक्जेंडर फ्लेमिंग की पेनिसिलिन की खोज को आधुनिक चिकित्सा इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में गिना जाता है। यह खोज केवल एक नई दवा की शुरुआत नहीं थी, बल्कि इसने बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ही बदल दिया।
बाद में फ्लेमिंग को उनके योगदान के लिए 1945 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पेनिसिलिन की खोज ने लाखों लोगों के इलाज में मदद की और एंटीबायोटिक दवाओं के विकास के एक नए दौर की शुरुआत की।
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