आयुर्वेद की विरासत को आधुनिक अध्ययन और पंचकर्म से आगे बढ़ा रहे डॉ. श्रीयश दूबे

Lucknow

पंचकर्म से स्वास्थ्य को दे रही नहीं दिशा

नाड़ी परीक्षण के दम पर पकड़ लेते हैं जटिल रोग

विजय श्रीवास्तव

Lucknow: आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा पद्धति को लेकर लोगों में लगातार रुचि बढ़ रही है। गोमतीनगर विस्तार स्थित केरलम आयुर्वेद पंचकर्म आईकॉन में आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. श्रीयश दूबे पंचकर्म और नाड़ी परीक्षण को अपनी उपचार पद्धति का महत्वपूर्ण आधार बताते हैं। उनके क्लिनिक में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान मरीज पंचकर्म उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। डॉ. दूबे आयुर्वेद चिकित्सा की उस तीसरी पीढ़ी से जुड़े हैं, जिसमें उनके दादा स्व. गया प्रसाद और पिता वैद्य श्रीधर दूबे ने आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य किया। परिवार से मिली पारम्परिक नाड़ी परीक्षण की समझ को उन्होंने औपचारिक चिकित्सा शिक्षा के साथ आगे बढ़ाया है।

डॉ. श्रीयश ने बताया कि शरीर के वह तत्व जो शरीर में रहकर छुपकर शरीर के खिलाफ काम करने लगते हैं और समय आने पर तमाम प्रकार के नए-नए रोग पैदा करते हैं। उन विकृत तत्वों को ‘पंचकर्म विधि’ शरीर से बाहर निकालने का काम करता है जिससे शरीर निरोगी हो जाता है और स्वास्थ्य बना रहता है।

आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। क्लिनिक में आने वाले कई मरीजों ने गैस, एसिडिटी, कब्ज, गठिया, साइटिका, कमर दर्द, त्वचा संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में उपचार से राहत मिलने की बात कही है। डॉ. दूवे के अनुसार, मरीज के स्वास्थ्य की स्थिति को समझने के लिए नाड़ी परीक्षण को उपचार प्रक्रिया में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। उनका कहना है कि परिवार से मिली नाड़ी परीक्षण की पारंपरिक समझ को उन्होंने अपनी आयुर्वेद की पढ़ाई और पंचकर्म के विशेष प्रशिक्षण के साथ आगे बढ़ाया है।

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डॉ. श्रीयश दूबे के अनुसार, मरीज की प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति को समझने में नाड़ी परीक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनका कहना है कि उपचार शुरू करने से पहले मरीज की समस्या, उसकी प्रकृति और शरीर की स्थिति को समझना जरूरी है। उन्होंने देहरादून मेडिकल कॉलेज से बीएएमएस तथा इसके बाद आयुर्वेद में एमडी किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने केरल के वैद्यरत्नम आयुर्वेदिक संस्थान, त्रिशूर से पंचकर्म का विशेष अध्ययन किया।

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मरीजों ने साझा किए अपने अनुभव

क्लिनिक में उपचार के लिए आए कुछ मरीजों ने अपने अनुभव साझा करते हुए पंचकर्म उपचार से लाभ मिलने की बात कही। मोहनलालगंज से आए उमेश कुमार ने बताया कि वे गैस और एसिडिटी की समस्या से लंबे समय से परेशान थे। उनके अनुसार, विभिन्न जगहों पर उपचार कराने के बाद उन्होंने पंचकर्म चिकित्सा कराई और उन्हें राहत महसूस हुई। गठिया और कमर दर्द से परेशान फैजाबाद के मनीष मद्धेशिया ने भी पंचकर्म उपचार के दौरान अपने स्वास्थ्य में सुधार महसूस होने की बात कही। वृंदावन सेक्टर-2, लखनऊ के वी. श्रीवास्तव ने पेट में गैस और कब्ज की समस्या के उपचार का अनुभव साझा करते हुए बताया कि पंचकर्म उपचार के बाद उन्हें राहत महसूस हुई और उन्होंने अपने स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव महसूस किया।

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पंचकर्म क्या है?

आयुर्वेद में पंचकर्म को शरीर की शुद्धि और संतुलन से जुड़ी पारंपरिक उपचार पद्धति माना जाता है। इसमें व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग-अलग प्रक्रियाओं का प्रयोग किया जाता है। डॉ. दूबे के अनुसार, उनके केंद्र पर मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद उपचार की प्रक्रिया निर्धारित की जाती है। उनका कहना है कि पंचकर्म के दौरान तेल मालिश और स्वेदन जैसी प्रक्रियाओं का भी उपयोग किया जाता है। हालांकि, उपचार की प्रक्रिया प्रत्येक मरीज की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। डॉ. श्रीयश ने बताया कि शरीर के वह तत्व जो शरीर में रहकर छुपकर शरीर के खिलाफ काम करने लगते हैं और समय आने पर तमाम प्रकार के नए-नए रोग पैदा करते हैं। उन विकृत तत्वों को ‘पंचकर्म विधि’ शरीर से बाहर निकालने का काम करता है जिससे शरीर निरोगी हो जाता है और स्वास्थ्य बना रहता है।

तीसरी पीढ़ी में आगे बढ़ रही आयुर्वेद की परंपरा

डॉ. दूबे बताते हैं कि उनके दादा स्व. गया प्रसाद अपने समय के जाने-माने आयुर्वेद चिकित्सक रहे। उनके पिता वैद्य श्रीधर दूबे ने संपूर्णानंद आयुर्वेद विश्वविद्यालय से आयुर्वेदाचार्य की शिक्षा प्राप्त की और गोरखपुर में आयुर्वेद चिकित्सा के माध्यम से सेवा करते रहे। मूल रूप से गोरखपुर के चौरीचौरा क्षेत्र के ब्रह्मपुर गांव से जुड़े इस परिवार में आयुर्वेद चिकित्सा की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।

महिला स्वास्थ्य के लिए भी विशेष सुविधा

क्लिनिक में महिला मरीजों के लिए भी पंचकर्म आधारित उपचार की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। महिला चिकित्सक डॉ. परिणिता दूबे के नेतृत्व में प्रशिक्षित सहयोगियों की टीम महिला स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के उपचार में कार्य करती है।

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