
54 साल पहले खोजा था गुमलवाड़ा और खम्हारगांव में दो शिवलिंग
हर महाशिवरात्रि इस घर से ही पहुँचती है श्रृंगार सामग्री और प्रसाद
हेमंत कश्यप/जगदलपुर
Natthe Khan Shivalaya Khoj : 54 साल पहले बिलोरी के एक शिक्षक नत्थे खान ने गुमलवाड़ा की पहाड़ी की गुफा में और खम्हारगांव में करीब 15 नीचे मिट्टी में दबे शिवलिंग की खोज की थी। तब से यह दोनों स्थल बस्तर के चर्चित शिवालयों में शामिल है। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर यह मुसलमान परिवार ही भोलेनाथ को प्रथम श्रृंगार सामग्री और प्रसाद भेंट करता आ रहा है। यह दोनों शिवालय बस्तर में सांप्रदायिक। सदभावना का केंद्र भी है।
नगरनार निवासी प्राथमिक शाला बिलोरी में प्रधानाध्यापक के पद पर आसीन नत्थे खान को वर्ष 1972 में बार बार स्वप्न आता था कि एक पहाड़ की गुफा है जिसमें शिवलिंग है। उन्होंने बिलोरा के ग्रामीणों की मदद से स्वप्न वाले शिवलिंग की खोज शुरू की।
मिले प्राकृतिक शिवलिंग
अंतत: 7 दिनों बाद गुमलवाड़ा में वह गुफा मिली। जहां प्राकृतिक शिवलिंग थे। तब से आज तक बिलोरी के ग्रामीण ही गुमलवाड़ा में यहां महाशिवरात्रि मेला आयोजित करते आ रहे हैं। इधर नत्थे खान परिवार ही इस दिन भोलेनाथ की श्रृंगार सामग्री और प्रसाद यहां पहुंचा रहा है। यह परिवार ही गुफा में प्रकाश हेतु जनरेटर की भी व्यवस्था करता है। यहां हर महा शिवरात्रि में हजारों भक्त पहुंचते हैं। अब यह स्थल माचकोट जंगल मध्य बेहतर पिकनिक स्पॉट बन चुका है।
15 फीट नीचे मिले भोले
नत्थे खान को ही दूसरी बार स्वप्न आया कि खम्हरगांव में वट वृक्ष के नीचे एक शिवलिंग दबा है। उन्होंने मजदूरों की मदद से खुदाई शुरू की। 10 फीट तक कुछ नहीं मिला। नत्थे खान के आग्रह पर मजदूरों ने 5 फीट की खुदाई और की, तब कलश की आकृति का शिवलिंग नजर आया। आड़ावाल निवासी सोमवंशी परिवार की श्रीमती सुशीला पति रामविलास और ग्रामीणों की मदद से खम्हारगांव में ही पक्का शिवालय बनाया गया है। इस शिवालय में भी पिछले 54 साल से हर महाशिवरात्रि पर नत्थे खान के परिजन ही सबसे पहले पूजन सामग्री पहुँचाते आ रहे हैं।
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