
Work From Home : कोविड-19 महामारी ने दुनिया को कई नई चीजें सिखाईं। इन्हीं में से एक था “वर्क फ्रॉम होम” यानी घर से काम करने का कल्चर। महामारी के दौरान जब लोग घरों में कैद थे और कंपनियों के सामने कारोबार बचाने की चुनौती थी, तब Work From Home एक बड़े समाधान के रूप में सामने आया। इससे कर्मचारियों की नौकरी भी बची और कंपनियों का काम भी चलता रहा। महामारी खत्म होने के बाद भी यह व्यवस्था लाखों लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनी हुई है। ऑफिस आने-जाने का समय बचता है, ट्रैफिक का तनाव नहीं रहता और काम करने में लचीलापन मिलता है। यही वजह है कि आज भी बड़ी संख्या में कर्मचारी Work From Home को प्राथमिकता देते हैं। कई लोग तो इस सुविधा के बदले अपनी सैलरी में थोड़ी कटौती तक स्वीकार करने को तैयार हैं। लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस व्यवस्था के उस पहलू को उजागर किया है, जिसे अधिकांश लोग नजरअंदाज कर रहे हैं।
घर से काम के लिए लोग छोड़ रहे हैं सैलरी
न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक की अर्थशास्त्री नतालिया इमैनुएल और उनकी टीम द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आया कि कर्मचारी घर से काम करने की सुविधा पाने के लिए अपनी आय का 4% से 10% तक हिस्सा छोड़ने को भी तैयार रहते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि Work From Home की मांग कितनी अधिक है। हालांकि इसी रिसर्च में एक गंभीर चेतावनी भी दी गई है। अध्ययन के अनुसार, घर से काम करने वाले लोगों में अकेलापन, मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
घर से काम लोगों को कैसे बदल रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि घर से काम करने की सुविधा जितनी आकर्षक दिखती है, उसके कुछ छिपे हुए नुकसान भी हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में बिहेवियरल साइंस के प्रोफेसर निकोलस एप्ली के अनुसार, लोग ट्रैफिक और ऑफिस आने-जाने की परेशानी को तो आसानी से समझ लेते हैं, लेकिन वे यह नहीं देख पाते कि रोजाना सहकर्मियों से मिलने-जुलने और बातचीत करने का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इंसान एक सामाजिक प्राणी है। लोगों से बातचीत, हंसी-मजाक और सामाजिक संपर्क मानसिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रिमोट और नॉन-रिमोट नौकरियों की तुलना
रिसर्च में दो प्रकार की नौकरियों की तुलना की गई
रिमोटेबल जॉब्स : वे नौकरियां जिन्हें घर से किया जा सकता है। जैसे सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग , डिजिटल मार्केटिंग , आईटी सेक्टर , कंटेंट क्रिएशन , डेटा एनालिटिक्स
नॉन-रिमोटेबल जॉब्स : वे नौकरियां जिन्हें घर से करना संभव नहीं होता। जैसे सर्जरी , मैकेनिकल इंजीनियरिंग , निर्माण कार्य , फील्ड ऑपरेशन , मैन्युफैक्चरिंग अध्ययन में पाया गया कि घर से काम करने वाले कर्मचारियों की सामाजिक गतिविधियों में लगातार गिरावट आई है।
अकेले बिताया जाने वाला समय 58% तक बढ़ा
रिसर्च के सबसे चौंकाने वाले निष्कर्षों में से एक यह था कि Work From Home करने वाले कर्मचारियों के अकेले बिताए जाने वाले समय में 58 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई। इतना ही नहीं, पूरे दिन किसी भी व्यक्ति के संपर्क में न आने की संभावना 72 प्रतिशत तक बढ़ गई। इसका मतलब केवल ऑफिस में बातचीत का कम होना नहीं है। कई लोग पूरा दिन बिना किसी व्यक्ति से आमने-सामने बातचीत किए गुजार रहे हैं। न ऑफिस का माहौल, न चाय पर चर्चा और न ही सहकर्मियों के साथ छोटी-छोटी बातचीत।
काम खत्म होने के बाद भी नहीं बढ़ रहा मेलजोल
कई लोगों का मानना था कि घर से काम करने वाले लोग शाम के समय दोस्तों और परिवार के साथ ज्यादा समय बिताएंगे। लेकिन रिसर्च में इसका उल्टा सामने आया। अध्ययन के अनुसार, Work From Home करने वाले कर्मचारी काम के बाद भी सामाजिक गतिविधियों में ज्यादा हिस्सा नहीं लेते। यानी ऑफिस में कम हुए सामाजिक संपर्क की भरपाई वे अपने निजी जीवन में भी नहीं कर पा रहे हैं।
मानसिक तनाव और डिप्रेशन का बढ़ता खतरा
रिपोर्ट में पाया गया कि घर से काम करने वाले लोगों में चिंता, तनाव और डिप्रेशन के लक्षण अधिक दिखाई दिए। इसके अलावा मनोचिकित्सकों के पास जाने वाले लोगों की संख्या बढ़ी ,मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाइयों का उपयोग बढ़ा , भावनात्मक तनाव के मामले बढ़े , आत्मविश्वास में गिरावट देखी गई , विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक सामाजिक दूरी और अकेलापन मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
अकेले रहने वाले लोगों पर सबसे ज्यादा असर
जो कर्मचारी अकेले रहते हैं, उनके लिए Work From Home और भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। रिसर्च के अनुसार पूरे दिन किसी व्यक्ति से संपर्क न होने की संभावना 83% तक बढ़ गई , मानसिक तनाव लगभग दोगुना पाया गया , सामाजिक अलगाव अधिक महसूस किया गया , ऐसे लोगों में डिप्रेशन और चिंता के लक्षण ज्यादा देखने को मिले।
छोटी-छोटी बातचीत भी होती है जरूरी
ससेक्स यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक गिलियन सैंडस्ट्रॉम का कहना है कि लोगों के लिए सामाजिक जुड़ाव बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, पड़ोसियों से बातचीत, दोस्तों से मिलना, पार्क में टहलना, खेलकूद में हिस्सा लेना और छोटी-छोटी सामाजिक गतिविधियां भी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। यही कारण है कि वे खुद भी Work From Home करने के बावजूद नियमित रूप से घर से बाहर निकलती हैं और लोगों से संपर्क बनाए रखती हैं।
क्या अब सभी को ऑफिस लौट जाना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियां कर्मचारियों को पूरी तरह ऑफिस बुलाना शुरू कर दें। बल्कि कंपनियों को एक संतुलित मॉडल अपनाना चाहिए। हाइब्रिड वर्क मॉडल, जिसमें कर्मचारी कुछ दिन ऑफिस और कुछ दिन घर से काम करें, एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे कर्मचारियों को फ्लेक्सिबिलिटी भी मिलेगी और सामाजिक संपर्क भी बना रहेगा।
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