
राजेश श्रीवास्तव
NTA अभी नीट पेपर लीक की चर्चा और तबाही मन-मस्तिष्क से मिटी भी नहीं थी कि शनिवार को पूरे देश भर में आयोजित सीयूईटी यूजी परीक्षा को लेकर देशभर में NTA की फजीहत शुरू हो गयी। बार-बार एजेंसी की नाकामियों से छात्रों का भरोसा टूट रहा है। अब NTA ने सीयूईटी यूजी री-एग्जाम को लेकर जरूरी सूचना दी है, जो 30 मई को पहली शिफ्ट में तकनीकी गड़बड़ी के बाद हुआ था। देश की दो सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाएं नीट यूजी और सीयूईटी यूजी आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एक बार फिर छात्रों और अभिभावकों को निराश किया है। नीट पेपर लीक में NTA की बड़ी नाकामी का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब सीयूईटी यूजी में फजीहत झेलनी पड़ रही है। 30 मई को सीयूईटी यूजी में हुई तकनीकी गड़बड़ी को लेकर NTA माफी मांग रही है। साथ ही छात्रों के लिए खास व्यवस्था के साथ री-एग्जाम कराने की बात कही है।
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दरअसल, अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट आयोजित किए जा रहे हैं। शनिवार, 30 मई 2026 को सीयूईटी यूजी एग्जाम देने उम्मीदवार एग्जाम देने पहुंचे, लेकिन कई एग्जाम सेंटर पर काफी देर इंतजार करने के बाद भी पहली शिफ्ट का एग्जाम शुरू नहीं हो पाया। कई स्टूडेंट्स का कहना है कि कई परीक्षा केंद्रों पर अचानक कंप्यूटर फ्रीज हो गए और सर्वर ठप पड़ गया। तकनीकी सेवा देने वाली कंपनी ‘टीसीएस आईओएन’ के सिस्टम में आई तकनीकी गड़बड़ी की वजह से परीक्षा समय पर शुरू नहीं हो सकी। उम्मीदवार काफी देर तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठे मानसिक तनाव और असमंजस से जूझते रहे। काफी देर तक तकनीकी गड़बड़ी से जूझ रहे तीन हजार से ज्यादा छात्र बिना एग्जाम दिए एग्जाम सेंटर छोड़कर चले गए। हालांकि बहुत देर तक चली अफरातफरी के बाद परीक्षा फिर से शुरू हुई। इसके बाद दूसरी शिफ्ट का पेपर 3 बजे के बजाय 4 बजे से शुरू हुआ।
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छात्रों की परेशानी को लेकर NTA ने कॉलेज में एडमिशन की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों से माफी मांगी है। NTA कहा, ‘आज पहले, कुछ सेंटर्स पर एक तकनीकी गड़बड़ी हुई, जिससे शिफ्ट 1 शुरू होने में देरी हुई। हम जानते हैं कि यह तनावपूर्ण था, और इससे हुई परेशानी के लिए हम माफी चाहते हैं।’ NTA ने साथ ही तकनीकी सेवा प्रदाता, टीसीएस, से कहा है कि वह इस गड़बड़ी के मूल कारण का विश्लेषण करे और अपनी रिपोर्ट तुरंत जमा करे। जो उम्मीदवार 30 मई की पहली शिफ्ट में पेपर दिए बिना घर चले गए थे, NTA उनके लिए स्पेशल री-एग्जाम आयोजित करेगा। NTA ने कहा कि, ज्यादातर उम्मीदवार (लगभग 95%) परीक्षा फिर से शुरू होने के बाद उसे पूरा कर पाए। हम समझते हैं कि 3,765 उम्मीदवार जो मौजूद थे और जिन्होंने बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन पूरा कर लिया था, उन्होंने परीक्षा फिर से शुरू होने से पहले ही सेंटर छोड़ दिया। इन उम्मीदवारों के लिए, NTA एक विशेष व्यवस्था के तहत परीक्षा दोबारा आयोजित करेगा। नई तारीख और अन्य जानकारी अलग से घोषित की जाएगी।
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सवाल यह है कि NTA ऐसी ही और कितनी गलतियां करेगी और कितनी बार माफी मांगेगा। एजेंसी ने माना कि गलती हुई है लेकिन गलती मानने से होगा क्या, जिन बच्चों ने एग्जाम हाल में बैठकर वापसी की राह पकड़ी उसकी भरपायी कौन करेगा। आखिर NTA में कौन है जिसको सरकार इतनी फजीहत होने और झेलने के बाद भी बचाने की कोशिश कर रही है। आखिर कितने और बच्चों को अपने बलिदान की इबारत लिखनी होगी। कितनी और परीक्षाएं लीक होते सरकार देखना चाहती है कितनी परीक्षाओं को निरस्त होते देखना चाहती है। अब आम लोग भी NTA को ‘नेवर टàस्टिंग एजेंसी’ की संज्ञा देने लगे हैं। नीट और सीबीएसई परीक्षाओं की अव्यवस्था इस पूरे हफ्ते चर्चा में रहीं। नीट के लीक पर विपक्ष शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहा है। वहीं, दूसरी तरफ ये लीक का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। कोर्ट ने छात्रों और परिवारों की पीड़ा पर चिता जताई। ये नाकामी है सरकार की। हालात ये पहुंच गए हैं कि जहां सिविलियन इंस्टीट्यूशन्स हैं, जिनकी जिम्मेदारी है एग्जामिनेशन कंडक्ट करना और वो आपने वो बनाए भी उस तरह के इंस्टीट्यूशंस हैं और लेकिन वहां पे आपको अब एयरफोर्स की मदद लेकर पेपर ड्रॉप करने की स्थिति आपकी पैदा हो गई है।
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अब देखिए लीकेज कहां से हुआ? जब पेपर पहुंचाया गया वहां पर कोई गड़बड़ी नहीं हुई। गड़बड़ी एट द सोर्स हुई है। तो जहां पर सोर्स है आप वहां ना देख के बीमारी जहां है उसका इलाज ना करके आप कुछ और इलाज कर रहे हैं। यह पूरी व्यवस्था मुझे लगता है कि कहीं एकदम सड़ चुकी है। बहुत सी घटना लगातार हो रही है। स्टूडेंट का भविष्य अधर पर लटका है। व्यवस्था का दोष है, लेकिन व्यवस्था कौन चला रहा है? सरकार चला रही है। तो जिम्मेदार कौन है? मुझे लगता है सभी को मिलके सोचना चाहिए। सरकार की ज्यादा जिम्मेदारी है क्योंकि व्यवस्था सरकार चला रही है। गलती आखिर किसकी है और जो कल कोर्ट ने भी कहा कि पहले जिम्मेदारी तय करो। जिम्मेदारी तय करने से दो बातें होती हैं, किसी ने अगर अच्छा काम किया तो उसकी जय जयकार होगी। अगर किसी ने गलत किया उसकी वजह से नहीं हुआ तो उसके लिए सजा या दंड जो भी कह लीजिए उसका प्रावधान है। अगर पहली बार कोई चीज होती है, तो आप एक बार को लिवरेज दे दो कि यार इतने सारे लूप होल्स से पता नहीं चल पाया। यह पहली बार नहीं हुआ है।
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तो क्या जो आदमी पेपर बनाने वाला टीचर था वो इसके लिए जिम्मेदार है जिसने लीक कर दिया? क्या वो ड्राइवर जो पेपर लेकर आया या वो आईएएस ऑफिसर जो कि वहां पर बैठ के NTA को चलाता है या मंत्री जी? यहां पर जब यह व्यवस्था चल नहीं रही है, बार-बार पेपर लीक हो जा रहा है तो जिम्मेदारी लीजिये ना इसके लिए। एयरफोर्स से पेपर उतारने की जगह स्वीकार करिए कि यह गलती हो गई। मैं मंत्री हूं, यह मेरी जवाबदेही थी कि बिल्कुल क्लीन एग्जाम होने चाहिए थे। आगे बढ़ के कहिए ना कि मुझसे नहीं हो पाया, मैं इस चीज का कप्तान था इस जहाज का। जहाज ठीक से नहीं मुझसे चल पाया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि थोड़ी जिम्मेदारी तो मेरी भी। अभी हम बात कर रहे थे कि हल कैसे हो? सामने यूपीएससी का उदाहरण है। यूपीएससी में पेपर लीक नहीं होता क्योंकि उन्होंने इतना फुल प्रूफ सिस्टम बना रखा है।
इसके पहले जब यह नीट की परीक्षाएं डिसेंट्रलाइ थीं, विकेंद्रित थी कभी लीक नहीं होता था। क्यों? क्योंकि लेवल की परीक्षा थी, फुल प्रूफ इंतजाम था। शिक्षा माफिया इतना ज्यादा ताकतवर हो गया है। इंजीनियरिग की परीक्षाएं लीक होती हैं, पुलिस भर्ती की परीक्षाएं लीक होती हैं। अब सीबीएसई देख लीजिए। 4 लाख बच्चे रिवैल्यूएशन के लिए अप्लाई कर रहे हैं। यानी 25% बच्चे। 93 पेपर लीक हो चुके हैं टोटल मिलाकर के अगर आंकड़े देखें। तो यह सरकार की विफलता है। आप इसमें सेना का इस्तेमाल कर रहे हैं यानी आपने मान लिया कि हमारे बस का कुछ है ही नहीं। कल को अस्पताल नहीं चल पाएंगे तो सेना को सौंप दो? मुझे लगता है कि जिम्मेदारी लेनी चाहिए धर्मेंद्र प्रधान जी को लेनी चाहिए। सरकार को लेना चाहिए । प्रधान का इस्तीफा देकर NTA को भंग कर देना चाहिए। वरना इसकी कीमत सिर्फ हमारे देश का भविष्य यानि कि बच्चे उठायेंगे।
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