
एक्स पर लिखा- ‘उनका जो फर्ज है, वो अहल-ए-सियासत जानें, मेरा पैगाम मोहब्बत है, जहां तक पहुंचे।’
लखनऊ के राजनीतिक गलियारों की चर्चा का प्रमुख मुद्दा बना सपा मुखिया का यह कदम
बीजेपी से दयाशंकर सिंह पहले नेता रहे, जो पहुंचे अनुपमा जायसवाल के पास
दोनों डिप्टी सीएम के साथ संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह भी पहुंचे मेदांता, पूछा कुशलक्षेम
धर्मेंद्र सिंह
लखनऊ। सियासत अक्सर मतभेदों, आरोपों और कड़वाहट भरे अल्फाजों से भरी दिखाई देती है, लेकिन कभी-कभी ऐसे पल भी सामने आते हैं जो याद दिलाते हैं कि राजनीति के केंद्र में आखिरकार इंसान ही होता है। ऐसा ही एक दृश्य तब देखने को मिला जब अखिलेश यादव राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर मंगलवार को मेदांता अस्पताल पहुंचे। वहां बिस्तर पर थीं अनुपमा जायसवाल। बीजेपी की बहराइच विधायक, जो उनका ही पुतला जलाते समय हादसे का शिकार हो गई थीं। लेकिन सपा मुखिया ने बड़ा दिल दिखाया और अपने पिता मुलायम सिंह यादव की विरासत पर पहला कदम रख डाला। यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी। इसमें एक सच्ची मानवीय भावना झलक रही थी। जब अखिलेश ने उनका हाल जाना, तो राजनीतिक विरोध की दीवारें कुछ देर के लिए जैसे गायब हो गईं। अनुपमा की मुस्कान ने इस बात की गवाही दी कि दर्द और तकलीफ के समय इंसानियत ही सबसे बड़ा सहारा बनती है।
अखिलेश यादव ने कहा कि हम समाज में आग नहीं, सौहार्द की फुहार चाहते हैं। उनका यह कहना, केवल एक बयान नहीं, बल्कि उस क्षण की सच्चाई थी। यह वही ‘फुहार’ थी जिसने एक तीखी राजनीतिक घटना को मानवीय रिश्तों की गर्माहट में बदल दिया। शाम को जब अन्य नेता भी कुशलक्षेम पूछने पहुंचे, तो यह साफ दिखा कि प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है, लेकिन किसी के दर्द के सामने वह छोटी पड़ जाती है। वरिष्ठ पत्रकार हरीश मिश्र कहते हैं कि आज के दौर में, जब समाज और राजनीति दोनों ही ध्रुवीकरण से गुजर रहे हैं, यह घटना एक संदेश देती है। इंसानियत अगर जिंदा है, तो उम्मीद भी जिंदा है। और सच कहें तो, इससे बेहतर मिसाल राजनीति में शायद ही देखने को मिलती है। जिसका पुतला जलाया जा रहा हो, वही हालचाल पूछने पहुंच जाए… यह सिर्फ एक कदम नहीं, बल्कि सोच का स्तर है।
अखिलेश ने मुलाकात की फोटो अपने ‘एक्स’ हैंडल पर शेयर की। जिस पर एक शेर लिखा, ‘उनका जो फर्ज है, वो अहल-ए-सियासत जानें, मेरा पैगाम मोहब्बत है, जहां तक पहुंचे।’ तस्वीरें पोस्ट करते हुए अखिलेश ने लिखा, ‘राजनीति अपनी जगह है, लेकिन दुख और बीमारी के समय संवेदनाएं ही सबसे बड़ा सहारा होती हैं। उन्होंने साफ किया कि हम भाजपा विधायक अनुपमा जायसवाल से मिलने गए और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करके आए हैं। हालांकि सपा मुखिया के जाने के बाद कैबिनेट मंत्री और सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर, डिप्टी सीएम केशव मौर्य, ब्रजेश पाठक, महामंत्री धर्मपाल सिंह, विधायक नीरज बोरा ने भी मुलाकात की। बीजेपी के बलिया विधायक व कैबिनेट मंत्री दयाशंकर सिंह भारतीय जनता पार्टी के पहले वो नेता थे, जो अनुपमा जायसवाल को देखने पहुंचे। हालांकि उनके और अखिलेश के बीच महज 10 मिनट का अंतर था। मेदांता सूत्रों का कहना है कि सपा मुखिया के जाने के ठीक बाद ही परिवहन मंत्री भी अपने लाव-लश्कर के साथ पहुंचे। हालांकि तब तक सपा मुखिया और उनकी पार्टी की ओर से कोई पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल नहीं हुआ था।
बताते चलें कि अनुपमा जायसवाल का नाम यूपी की वरिष्ठ भाजपा नेताओं में शुमार हैं और पिछली योगी सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं। उनकी इस दुर्घटना से भाजपा कार्यकर्ताओं में भी काफी दुख व्यक्त किया जा रहा था। गौरतलब है कि बहराइच में 25 अप्रैल को दोपहर एक बजे भाजपा कार्यकर्ता नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। कार्यकर्ताओं ने जैसे ही पुतले में आग लगाई। लपटें भड़क उठीं और विधायक अनुपमा जायसवाल के चेहरे पर आ गईं। उनका चेहरा और सिर के बाल झुलस गए। मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों ने तुरंत कपड़े से आग बुझाई। विधायक को तत्काल इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल भेज दिया गया।
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