
Kanimozhi Tea Party: संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही विपक्षी सांसदों के हंगामे और नारेबाजी के बीच कुछ ही मिनट चली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वंदे मातरम् के गायन के बाद सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। इसके बाद परंपरा के मुताबिक लोकसभा अध्यक्ष ने अपने चैंबर में सभी दलों के फ्लोर लीडर्स के लिए चाय पार्टी आयोजित की।
इस चाय पार्टी में सत्ता पक्ष की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत प्रमुख नेता पहुंचे। वहीं विपक्ष की ओर से इस आयोजन से दूरी बनाई गई। हालांकि, डीएमके सांसद एमके कनिमोझी की मौजूदगी ने सियासी चर्चाओं को जरूर हवा दे दी।
विपक्ष ने किया बहिष्कार, कनिमोझी की मौजूदगी ने बढ़ाई हलचल
लोकसभा अध्यक्ष की ओर से आयोजित चाय पार्टी में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई प्रमुख नेता शामिल नहीं हुए। विपक्षी दलों के सामूहिक रूप से दूरी बनाए रखने के बीच कनिमोझी का पहुंचना राजनीतिक रूप से खासा अहम माना जा रहा है।
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खास बात यह है कि पिछले साल भी मॉनसून सत्र की समाप्ति पर विपक्ष ने इस पारंपरिक आयोजन का बहिष्कार किया था और उस समय डीएमके की ओर से भी कोई नेता चाय पार्टी में नहीं पहुंचा था। इस बार कनिमोझी के शामिल होने से डीएमके के भविष्य के राजनीतिक रुख को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
क्या विपक्ष से अलग राह पर बढ़ रही DMK?
कनिमोझी के चाय पार्टी में शामिल होने को फिलहाल DMK और केंद्र सरकार के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक समझौते का संकेत नहीं माना जा सकता, लेकिन इससे राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा जरूर शुरू हो गई है। खासकर ऐसे समय में जब परिसीमन को लेकर केंद्र और DMK के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।
DMK के लोकसभा में 22 सांसद हैं। ऐसे में संविधान संशोधन से जुड़े किसी महत्वपूर्ण विधेयक पर पार्टी का रुख सरकार के लिए अहम हो सकता है। यही वजह है कि कनिमोझी की चाय पार्टी में मौजूदगी को विपक्षी एकजुटता और भविष्य के संसदीय समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
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कांग्रेस से भी बढ़ी डीएमके की दूरी
तमिलनाडु की राजनीति में भी डीएमके और कांग्रेस के बीच रिश्तों में खटास की चर्चा रही है। तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी TVK के साथ कांग्रेस की नजदीकी को लेकर डीएमके की नाराजगी सामने आई थी। इसके बाद DMK ने संसद में कांग्रेस से अलग बैठने की मांग भी की थी। ऐसे में संसद में DMK का कांग्रेस से अलग रुख और अब चाय पार्टी में कनिमोझी की मौजूदगी विपक्षी खेमे में नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे रही है।
परिसीमन विधेयक पर DMK क्यों अहम?
परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती संविधान संशोधन के लिए जरूरी व्यापक समर्थन जुटाने की है। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
पिछले विशेष सत्र में परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद देखने को मिले थे। ऐसे में सरकार के लिए गैर-एनडीए दलों का समर्थन भी महत्वपूर्ण हो सकता है। डीएमके के 22 सांसद इस गणित में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, केवल एक चाय पार्टी में किसी नेता की मौजूदगी को समर्थन या गठबंधन का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कनिमोझी का यह कदम निश्चित तौर पर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में डीएमके परिसीमन और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर क्या रुख अपनाती है, इस पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।
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