Bastar’s ancient Shiva temple : एक हजार से बाण सागर शिवालय में हो रही पूजा

Shiva temple

Bastar’s ancient Shiva temple: करीब 1000 साल पहले छिंदक नागवंशी राजाओं द्वारा ग्राम बस्तर में बनवाया गया पुरातन शिव मंदिर बस्तर संभाग के दूसरे सबसे बड़े तालाब बाणसागर के किनारे अवस्थित है। यह मंदिर अपनी स्थापत्य कला के लिए विख्यात है। 304 साल पहले तक बस्तर का राज परिवार यहां पूजा अर्चना करने पहुंचता रहा है। अब यह शिवालय केंद्रीय पुरातत्व संरक्षण के अधीन है।

नेशनल हाईवे क्रमांक 30 पर स्थित ग्राम बस्तर यहां के काकतीय राजाओं की राजधानी रही है। 304 साल पहले तक बस्तर यहां के राजाओं की राजधानी रही है। बाणसागर तालाब के किनारे ही 11 वीं शताब्दी में बनवाया गया था यह शिवालय। मंदिर की दीवारों पर कलात्मक मूर्तियां है।

304 साल पहले तक बस्तर राजपरिवार करता रहा पूजा

अब केंद्रीय पुरातत्व संरक्षण के अधीन है यह मंदिर

हेमंत कश्यप

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केंद्र सरकार कर रही सुरक्षा

मूर्ति तस्करों ने इस मंदिर की कई पुरातन मूर्तियों को उखाड़ कर बेच दिया है। अब केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को जब इस मंदिर की स्थापत्य कला की विस्तृत जानकारी मिली तो उन्होंने बारसूर के गणेश मंदिर और चंद्रादित्य मंदिर की तरह बस्तर के इस पुरातन शिवालय को भी संरक्षण दिया है।

बस्तर का पुरातन धरोहर

इस पुरातन धरोहर के चारों तरफ केंद्रीय पुरातत्व संरक्षण विभाग द्वारा बेहतर गार्डनिंग की गई है। बस्तर शिवालय के मुख्य द्वार के ठीक ऊपर पत्थर में मयूर की एक आकृति उकेरी गई है बताते चलें कि यह मयूर की आकृति ही अविभाजित मध्यप्रदेश में मप्र पाठ्य पुस्तक निगम का सिंबाल हुआ करती थी। बस्तर के शिव मंदिर के समकक्ष नारायणपाल, छिंदगांव, समलूर, भैरमगढ, गढ धनोरा और बारसूर में भी मंदिर हैं। इन मंदिरों का निर्माण भी छिंदक नागवंशीय राजाओं नहीं कराया है और इन मंदिरों में भी शिवलिंग स्थापित हैं। इन शिवालयों में भी शिव प्रतिवर्ष मेला आयोजित किए जाते हैं।

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