
Private hospital: प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च कम करने के लिए संसद की स्थायी समिति ने एक अहम सुझाव दिया है। कमेटी ने कहा है कि बड़े शहरों में प्राइवेट अस्पतालों के कमरों का किराया थ्री स्टार होटल के कमरों से कम होना चाहिए। समिति ने सरकार से इस नियम को निजी अस्पतालों के लिए जरूरी बनाने की सिफारिश की है। समिति ने अस्पतालों के बिलों का ब्योरा देखने के बाद यह सुझाव दिया है। उसका कहना है कि कई निजी अस्पतालों में सिर्फ कमरे में रहने के लिए मरीजों से काफी ज्यादा पैसे लिए जाते हैं।
इससे पहले से महंगे इलाज का खर्च और बढ़ जाता है। समिति के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती होने के बाद कमरे का किराया मरीज के कुल बिल का बड़ा हिस्सा बन जाता है। खासकर बड़े शहरों में निजी अस्पतालों के कमरों की कीमत काफी ज्यादा होती है। कई बार मरीज के परिवार को इलाज के साथ-साथ कमरे के लिए भी भारी रकम चुकानी पड़ती है। कमेटी का मानना है कि अस्पतालों में कमरों का किराया एक तय सीमा के अंदर होना चाहिए। इसके लिए थ्री-स्टार होटल के कमरे की कीमत को आधार बनाया जा सकता है।
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मरीज पर बढ़ता है आर्थिक दबाव
कमेटी ने यह भी माना है कि कमरे की कीमत बढ़ने से हॉस्पिटल का पूरा बिल बढ़ जाता है। कई अस्पतालों में कमरे की अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से दूसरे खर्च भी बदल जाते हैं। यानी मरीज अगर महंगा कमरा लेता है तो डॉक्टर की फीस, नर्सिंग और कुछ दूसरी सेवाओं के शुल्क भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में कमरे का किराया कम करने से मरीज के कुल इलाज का खर्च भी कम हो सकता है। समिति ने खास तौर पर बड़े महानगरों में इस व्यवस्था को लागू करने की बात कही है, जहां निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च आमतौर पर ज्यादा होता है।
अगर सरकार समिति की सिफारिश को मान लेती है तो प्राइवेट अस्पतालों में कमरे के किराए को लेकर नया नियम बनाया जा सकता है। इससे मरीजों और उनके परिवारों को इलाज शुरू कराने से पहले खर्च का अंदाजा लगाने में आसानी होगी। साथ ही अस्पतालों में मनमाने तरीके से ज्यादा पैसे लेने पर भी रोक लग सकती है। हालांकि, इस सिफारिश को लागू करने के लिए सरकार को यह तय करना होगा कि कमरे का किराया कैसे तय किया जाएगा और इसकी निगरानी कौन करेगा।
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One thought on “अब प्राइवेट अस्पतालों की नहीं चलेगी मनमानी”
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