
गारंटीड सरकारी नौकरी’ के नाम पर 40 लाख तक वसूलता था आरोपी, CID ने किया गिरफ्तार
Abhay Tiwari Paper Leak Case: 13 साल में 12 सरकारी भर्ती परीक्षाएं पास करने का दावा करने वाला एक सरकारी अधिकारी अब करोड़ों रुपये के कथित भर्ती घोटाले और पेपर लीक सिंडिकेट का मास्टरमाइंड निकला है। झारखंड पुलिस की सीआईडी (CID) ने गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में तैनात ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) अभय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक वह झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में धांधली कराने वाले संगठित गिरोह का अहम सदस्य था।
CID का दावा है कि अभय तिवारी अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 25 लाख से 40 लाख रुपये तक वसूलता था और उन्हें “गारंटीड सिलेक्शन” का भरोसा देता था।
ऐसे बनाता था छात्रों को अपना शिकार
जांच में सामने आया कि अभय तिवारी पहले TRS Data Processing Private Limited (TDPL) नामक एजेंसी में मार्केटिंग मैनेजर रह चुका था। यह कंपनी उत्तर प्रदेश में पहले ही ब्लैकलिस्ट की जा चुकी है।
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अभय का तरीका बेहद सुनियोजित था। वह सबसे पहले अभ्यर्थियों के सामने अपनी कथित उपलब्धियों का बखान करता और बताता कि उसने 13 वर्षों में 12 सरकारी भर्ती परीक्षाएं पास की हैं। इससे छात्र उस पर आसानी से भरोसा कर लेते थे।
इसके बाद वह नौकरी दिलाने की गारंटी देता और एक-एक अभ्यर्थी से 25 लाख से 40 लाख रुपये तक की रकम वसूलता था।
13 साल में पास की थीं ये प्रमुख परीक्षाएं
सीआईडी की पूछताछ में अभय तिवारी द्वारा पास की गई परीक्षाओं की सूची भी सामने आई है। इनमें कई प्रतिष्ठित केंद्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाएं शामिल हैं।
- 2013 – इंडियन नेवी SSR भर्ती परीक्षा
- 2014 – भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) सहायक परीक्षा
- 2014 – नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) परीक्षा
- IRB कांस्टेबल भर्ती परीक्षा
- 2018 – पुलिस सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) परीक्षा
- 2018 – CRPF हेड कांस्टेबल (लिखित एवं टाइपिंग)
- JSSC PGT शिक्षक भर्ती परीक्षा
- JSSC CGL परीक्षा
- JPSC सहायक वन संरक्षक (ACF) परीक्षा
- JPSC वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) परीक्षा
- JPSC खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) परीक्षा
- JPSC 11वीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन्हीं सफलताओं का हवाला देकर वह अभ्यर्थियों को अपने झांसे में लेता था।
CID की जांच में कई बड़े खुलासों की उम्मीद
सीआईडी का मानना है कि अभय तिवारी अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि वह एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा था। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों, आयोगों या अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
अभय तिवारी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उससे लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
परीक्षा प्रणाली पर फिर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगाने वाले इस कथित सॉल्वर सिंडिकेट के खुलासे ने प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अब सभी की नजर सीआईडी की आगे की जांच पर है, जिससे इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।
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