PM हाउस पर राहुल का धरना विवाद, कोई नहीं आया साथ

Congress
अजय कुमार
अजय कुमार

Congress कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा 21-22 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के निकट किया गया धरना-प्रदर्शन राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गया है। नीट पेपर लीक और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ राहुल गांधी 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के पास धरने पर बैठ गए थे। पुलिस ने राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया, जब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए उनके आवास के बाहर धरना दे रहे थे। कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया, जिसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए वीडियो जारी कर अपने फैसले का बचाव किया। सबसे खास बात यह है कि राहुल गांधी के इस विवादित धरने का कांग्रेस को छोड़कर कोई भी विपक्षी पार्टी का नेता समर्थन नहीं दे रहा है।गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम एक बड़े और पहले से चल रहे आंदोलन के बीच हुआ। शिक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर छात्रों के नेतृत्व में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहले से जारी थे, और प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इसी मुद्दे पर लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे थे। वांगचुक की तीन सप्ताह लंबी भूख हड़ताल आंदोलन का प्रतीक बन चुकी थी, और सप्ताहांत में पुलिस द्वारा उन्हें जबरन अस्पताल ले जाए जाने के बाद आंदोलन ने और जोर पकड़ा। इसी दौरान सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कथित पुलिसिया सख्ती के वीडियो वायरल हुए, जिससे जनाक्रोश और बढ़ गया।

ये भी पढ़े

पेपर लीक पर छात्र आंदोलन से 2027 में राहुल-अखिलेश को कितना राजनीतिक लाभ मिलेगा?

दिलचस्प बात यह रही कि छात्रों के आंदोलन और सोनम वांगचुक के अनशन से एक निश्चित दूरी बनाए रखने के बाद कांग्रेस और राहुल गांधी ने अचानक प्रधानमंत्री आवास के बाहर अपना अलग धरना शुरू कर दिया, जबकि सीजेपी का प्रदर्शन उससे कुछ किलोमीटर दूर जंतर-मंतर पर चल रहा था। इसी बिंदु पर कई विश्लेषकों ने सवाल उठाया कि जब मकसद एक ही था, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, तो कांग्रेस और सीजेपी ने साझा मंच से प्रदर्शन क्यों नहीं किया और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास को ही निशाना क्यों बनाया।भाजपा ने इस पूरे प्रकरण को सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन के रूप में पेश किया। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने सवाल उठाया कि जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति पहले से थी, तो राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री आवास तक क्यों ले गए, और उन्होंने इसे प्रदर्शन भड़काने की कोशिश करार दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी राहुल गांधी के रवैये को अफसोसजनक बताते हुए कहा कि सरकार बातचीत और संसद में चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष के नेता अपनी बात से मुकर गए। इसके जवाब में भाजपा ने देशभर में कांग्रेस दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन कर सुरक्षा उल्लंघन के आरोप में विरोध जताया, जबकि कांग्रेस विधायकों ने कई राज्यों की विधानसभाओं के बाहर भी समर्थन में प्रदर्शन किए।

ये भी पढ़े

पुलिस नहीं सरकारी वकीलों की कमी से न्याय व्यवस्था लड़खड़ा रही

अब बड़ा और अहम सवाल यह है कि क्या आजादी के बाद देश में इससे पहले भी किसी नेता या राजनीतिक दल ने सीधे प्रधानमंत्री के आवास या कार्यालय के ठीक बाहर इस तरह का धरना-प्रदर्शन किया है। भारत में विरोध-प्रदर्शन की एक लंबी और समृद्ध परंपरा रही है, लेकिन इसका केंद्र लगभग हमेशा जंतर-मंतर, रामलीला मैदान, बोट क्लब (अब विजय चौक), इंडिया गेट या संसद भवन परिसर रहा है, न कि सीधे प्रधानमंत्री का निजी आवास। इसकी बड़ी वजह सुरक्षा है। प्रधानमंत्री आवास एक अत्यंत संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र माना जाता है, जहां आमतौर पर धारा 144 जैसी पाबंदियां लागू रहती हैं और सामूहिक जमावड़े की अनुमति सामान्यतः नहीं दी जाती।जय प्रकाश नारायण का संपूर्ण क्रांति आंदोलन हो, 2011 का अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार-विरोधी अनशन हो या 2020-21 का किसान आंदोलन, इन सभी बड़े जन-आंदोलनों ने भी दिल्ली की सीमाओं, रामलीला मैदान या जंतर-मंतर को ही अपना केंद्र बनाया, प्रधानमंत्री आवास को नहीं। यहां तक कि इमरजेंसी के बाद के दौर में विपक्ष के तीखे प्रदर्शन भी संसद परिसर या बोट क्लब तक ही सीमित रहे।

ये भी पढ़े

पत्रकारिता और बेरोज़गारी का पोस्टमार्टम: सच, संघर्ष और सवाल

इस लिहाज से राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व द्वारा सीधे प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करना और वहां धरना देना निश्चित रूप से एक असामान्य और दुर्लभ कदम माना जा रहा है। यही वजह है कि यह घटनाक्रम इतना विवादित बन गया। भाजपा इसे सुरक्षा तंत्र को चुनौती देने वाला और गैर-जिम्मेदाराना कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे छात्रों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने वाला और सरकार को सीधे जवाबदेह ठहराने वाला प्रतीकात्मक विरोध बता रही है।साथ ही, यह भी उल्लेखनीय है कि छात्रों के नेतृत्व वाले सीजेपी आंदोलन और सोनम वांगचुक के अनशन ने पहले ही जंतर-मंतर को आंदोलन का स्वाभाविक केंद्र बना दिया था, जहां हजारों समर्थक पहले से जमा थे। ऐसे में कांग्रेस के इस अलग रास्ते ने कुछ हलकों में यह सवाल भी खड़ा किया कि क्या पार्टी छात्र आंदोलन का हिस्सा बनने के बजाय उससे अलग अपनी राजनीतिक पहचान और नेतृत्व स्थापित करना चाहती थी। भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश बता रहे हैं, तो कांग्रेस समर्थक इसे सत्ता से सीधे सवाल पूछने की मंशा करार दे रहे हैं।कुल मिलाकर, राहुल गांधी का यह प्रदर्शन सिर्फ नीट पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विपक्ष की रणनीति, सुरक्षा प्रोटोकॉल और छात्र आंदोलन के साथ कांग्रेस के जटिल रिश्ते, तीनों को लेकर एक नई बहस का कारण बन गया है। आने वाले दिनों में संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर और टकराव देखने को मिल सकता है, क्योंकि विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट प्रणाली में सुधार की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार इसे संसद के भीतर ही सुलझाने पर जोर दे रही है।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

ग्रह-नक्षत्रों की चाल से बदलेंगे इन राशियों के योग

खाना बनाने वाली निकली चोरनी, गिरफ्तार

SDM ने जूस पिलाकर सोनौली मे चल रहा एक दिवसीय धरना समाप्त कराया

दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों पर रहेंगी निगाहें, कई मुकाबलों में दांव पर होंगे मेडल

इजरायल में भारतीय नागरिक की हत्या, कमरे में खून से लथपथ हालत में मिला शव

Spread the love

One thought on “PM हाउस पर राहुल का धरना विवाद, कोई नहीं आया साथ”

Comments are closed.

JPSC members
homeslider National

JPSC के तीन सदस्यों ने दिया इस्तीफा, राज्यपाल ने किया मंजूर

Resignation of three JPSC members : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आयोग के तीन सदस्यों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यपाल संतोष गंगवार ने राज्य सरकार की सिफारिश पर […]

Spread the love
Read More
Crime News homeslider

निगोहां: जीएसटी से बचने के लिए तीन बार टोल प्लाजा पार करने वाला चालक गिरफ्तार

पुलिस मामले की छानबीन कर वाहन चालक व वाहन को राज्य कर विभाग को सौंपा ए अहमद सौदागर GST evasion in Nigoha : पुलिस कमिश्नर तरूण गाबा व संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध अपर्णा कुमार के निर्देशन में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस उपायुक्त दक्षिणी मोहम्मद मुस्ताक के कुशल […]

Spread the love
Read More
UP Assembly Elections 2027
Politics Uttar Pradesh

2027 में UP की सत्ता के लिए सपा की बड़ी तैयारी, PDA, युवा और महंगाई होंगे अहम मुद्दे

UP Assembly Elections 2027 :  उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को लगे झटके के बाद जहां सत्तारूढ़ दल अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है, वहीं समाजवादी पार्टी भी लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को विधानसभा […]

Spread the love
Read More