
Crude Oil Price : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड करीब छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड में भी तेजी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तथा तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है।
ब्रेंट और WTI क्रूड में लगातार दूसरे दिन तेजी
गुरुवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। इससे पहले पिछले सत्र में भी इसमें तीन डॉलर से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई थी। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड में करीब 1.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 88 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। तेल बाजार में यह तेजी आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते देखी जा रही है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिकी कार्रवाई और ईरान से जुड़े ठिकानों पर बढ़ती गतिविधियों के बाद दोनों देशों के बीच टकराव गहराने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका की ओर से चेतावनी दी गई है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया गया तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी। इस बयान के बाद तेल कारोबारियों की चिंता और बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर दुनिया की नजर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। ईरान की ओर से इस क्षेत्र में नियंत्रण को लेकर दिए गए बयानों और टैंकरों से जुड़ी घटनाओं के बाद कई जहाजों ने अपने रास्ते बदलने शुरू कर दिए हैं। इससे बाजार में सप्लाई संकट की आशंका बढ़ गई है।
लाल सागर में हूती गतिविधियों से बढ़ा खतरा
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की गतिविधियों ने भी ऊर्जा बाजार की मुश्किलें बढ़ाई हैं। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। यदि इन समुद्री रास्तों पर तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है।
अमेरिकी तेल भंडार में हुई बढ़ोतरी
दूसरी ओर, अमेरिका से जारी तेल भंडार के आंकड़ों ने भी बाजार का ध्यान खींचा है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, पिछले सप्ताह अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार करीब 20 लाख बैरल बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुमान के विपरीत भंडार में बढ़ोतरी हुई है, जिसका कारण रिफाइनरी गतिविधियों में कमी और आयात में वृद्धि बताया जा रहा है।
तेल बाजार पर बनी रहेगी नजर
फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों की दिशा पूरी तरह मध्य पूर्व की स्थिति पर निर्भर है। अगर अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ता है या प्रमुख समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। महंगा कच्चा तेल भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि इसका असर ईंधन कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ता है।
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