
Khalistani conspiracy : देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क और कथित साजिश का खुलासा किया है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले खालिस्तानी समर्थक तत्व एक बार फिर सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि कुछ कट्टरपंथी संगठन और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI मिलकर भारत के विभिन्न हिस्सों में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और संभावित खतरों पर लगातार नजर रख रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, हाल के महीनों में कई राज्यों को धमकी भरे ई-मेल भेजे गए हैं, जिनमें सरकारी संस्थानों, धार्मिक स्थलों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की बातें कही गई थीं। इन ई-मेल्स के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक स्तर पर जांच शुरू की और सभी संबंधित राज्यों को अलर्ट कर दिया गया।
युवाओं को बरगलाने की कोशिश
जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि 17 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को गलत विचारधारा की ओर आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें से अधिकांश युवाओं का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होता, जिससे उनकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कट्टरपंथी संगठन युवाओं को भावनात्मक और वैचारिक रूप से प्रभावित कर अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाने की कोशिश करते हैं। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया गतिविधियों और संदिग्ध ऑनलाइन नेटवर्क की निगरानी बढ़ा रही हैं।
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कई राज्यों को मिली धमकियां
जांच में सामने आया है कि पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई राज्यों के सरकारी कार्यालयों को धमकी भरे संदेश भेजे गए थे। इन संदेशों में धार्मिक स्थलों, सरकारी भवनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी गई थी। हालांकि विस्तृत जांच के बाद कई ई-मेल को फर्जी या भ्रामक पाया गया, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें हल्के में नहीं लिया। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की धमकियां सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा लेने और दहशत फैलाने के उद्देश्य से भी भेजी जा सकती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का संयुक्त अभियान
खुफिया इनपुट मिलने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), विभिन्न राज्यों की एंटी टेरर स्क्वॉड (ATS), स्पेशल सेल और अन्य सुरक्षा इकाइयों ने संयुक्त रणनीति तैयार की। देशभर में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष अभियान चलाए गए। सूत्रों के अनुसार, कई राज्यों में ऐसे युवाओं की पहचान की गई, जो संदिग्ध ऑनलाइन नेटवर्क के संपर्क में थे। सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें और उनके परिवारों को जागरूक करने के साथ-साथ भविष्य में किसी भी गैरकानूनी गतिविधि से दूर रहने की चेतावनी दी।
गैंगस्टर-टेरर नेटवर्क पर नजर
जांच एजेंसियां संभावित आतंकवादी गतिविधियों और संगठित अपराध के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि कुछ आपराधिक गिरोह और कट्टरपंथी तत्व मिलकर देश की सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां देशभर में संवेदनशील स्थानों, धार्मिक स्थलों, रेलवे स्टेशनों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सूचना की तुरंत पुलिस और प्रशासन को जानकारी दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
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One thought on “खालिस्तानी नेटवर्क की गतिविधियां बढ़ीं, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में”
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