नैन नक्श से खूबसूरत ‘IAS’ विप्रा ने लोगों से ठगे लाखों रुपये

IAS

IAS…महंगी गाड़ियां, शानदार लाइफस्टाइल, बड़े अफसरों जैसी बातचीत और खुद को IAS बताने का दावा।

सामने से देखने पर कोई भी यही समझता कि विप्रा शर्मा कोई रसूखदार अधिकारी है।

लेकिन अब उसी चमक-दमक के पीछे छिपी एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है।

आरोप है कि विप्रा शर्मा, उसकी बहनों और पिता ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये ठगे। रिश्तेदारों से लेकर ड्राइवर तक को नहीं छोड़ा गया।

बारादरी थाने में मंगलवार को चार नए मुकदमे दर्ज होने के बाद यह मामला और बड़ा हो गया। अब तक परिवार के खिलाफ 28 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

पुलिस को शक है कि पीड़ितों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।

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भरोसा जीतना, सपने दिखाना और फिर लाखों की डील

इस पूरे खेल का तरीका बेहद सुनियोजित बताया जा रहा है। पहले लोगों से नजदीकी बढ़ाई जाती थी। फिर सरकारी नौकरी का भरोसा दिया जाता।

बातचीत में बड़े अधिकारियों और मंत्रालयों का नाम लिया जाता ताकि सामने वाला आसानी से भरोसा कर ले।

जब भरोसा बन जाता, तब शुरू होती पैसों की डील। किसी से 10 लाख, किसी से 20 लाख और किसी से छोटी रकम लेकर नौकरी पक्की होने का दावा किया जाता। बाद में लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र भेज दिए जाते। कई लोग महीनों तक जॉइनिंग का इंतजार करते रहे।

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रिश्तेदार ने किया भरोसा, बेटों के भविष्य के लिए दे दिए 20 लाख

अलीगढ़ निवासी मुकेश कुमार शर्मा की कहानी इस पूरे मामले की सबसे चौंकाने वाली कड़ी बनकर सामने आई है।

मुकेश ने पुलिस को बताया कि उनके बेटे तरुण और यश कई साल से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे।

इसी दौरान उनके साले के समधी वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि उनकी बेटी विप्रा शर्मा IAS अधिकारी है और आसानी से नौकरी लगवा सकती है। परिवार का रिश्ता था, इसलिए शक की कोई वजह नहीं लगी।

मुकेश के मुताबिक, विप्रा ने दोनों बेटों की नौकरी के लिए 20 लाख रुपये मांगे। परिवार ने जैसे-तैसे रकम का इंतजाम किया।

कुछ दिनों बाद दोनों बेटों के पास नियुक्ति पत्र भी पहुंचे। घर में खुशी का माहौल बन गया। लेकिन जॉइनिंग की तारीख आती रही और टलती रही। बाद में जब दस्तावेजों की जांच हुई तो पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी हैं। इसके बाद परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।

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डिजिटल युग का बढ़ता ‘वर्क फोर्स’

संभल से पीलीभीत तक फैला नेटवर्क

संभल निवासी प्रवेश कुमार ने बताया कि उनकी मुलाकात शिखा पाठक नाम की महिला से हुई थी। शिखा ने दावा किया कि उसकी बहन विप्रा शर्मा IAS  है और उसके बेटे की सरकारी नौकरी लगवा सकती है।

प्रवेश कुमार ने बेटे के भविष्य की उम्मीद में 10 लाख रुपये दे दिए। कुछ समय बाद नियुक्ति पत्र भी मिला, लेकिन बाद में वह भी फर्जी निकला।

उधर पीलीभीत निवासी कनिष्क सिन्हा ने आरोप लगाया कि विप्रा शर्मा ने उनकी पत्नी प्रियंका सक्सेना की नौकरी के नाम पर 14 लाख रुपये लिए।

इसमें आठ लाख नकद और छह लाख ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। बाद में जो नियुक्ति पत्र आया, वह भी नकली निकला।

ड्राइवर को भी नहीं बख्शा

इस पूरे मामले में सबसे भावुक कहानी अमान खान की है। अमान पेशे से ड्राइवर हैं और कई बार विप्रा शर्मा के साथ बाहर जा चुके थे।

अमान के मुताबिक, विप्रा खुद को बड़े पद पर तैनात अधिकारी बताती थी। उसने अमान से कहा कि वह उसके काम से खुश है और उसकी सरकारी नौकरी लगवा देगी।

सरकारी नौकरी के सपने में अमान ने 60 हजार रुपये दे दिए। लेकिन न नौकरी मिली और न पैसे लौटे। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ भी वही खेल हुआ, जो बाकी लोगों के साथ हुआ था।

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आलीशान लाइफस्टाइल ने बढ़ाया भरोसा

पुलिस जांच में सामने आया है कि विप्रा शर्मा और उसका परिवार लोगों को प्रभावित करने के लिए खास तरीके अपनाता था।

महंगे कपड़े, लग्जरी गाड़ियों में घूमना, अधिकारियों जैसी बातचीत और सोशल सर्कल में रुतबा दिखाना इस खेल का हिस्सा था। कई पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि विप्रा का आत्मविश्वास देखकर उन्हें कभी शक ही नहीं हुआ।

वह सरकारी सिस्टम की ऐसी बातें करती थी कि लोग उसे सचमुच अफसर मान बैठते थे।

फर्जी नियुक्ति पत्र बना सबसे बड़ा हथियार

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह की सबसे बड़ी ताकत फर्जी नियुक्ति पत्र थे। दस्तावेज इतने असली जैसे दिखते थे कि लोग लंबे समय तक धोखे में रहे।

कुछ पीड़ितों ने तो रिश्तेदारों और परिचितों के बीच मिठाई तक बांट दी थी। लेकिन जब जॉइनिंग नहीं हुई और विभागों में जांच कराई गई, तब पूरी सच्चाई सामने आई।

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पुलिस के सामने अब बड़ा सवाल

बारादरी पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इस गिरोह ने कितने लोगों को शिकार बनाया। पुलिस को आशंका है कि कई पीड़ित अभी सामने ही नहीं आए हैं।

जांच एजेंसियां बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और मोबाइल रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

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