दो टूक : सात सांसदों की टूट तो केवल झांकी असल खेल पंजाब और बंगाल का बाकी

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राजेश श्रीवास्तव

बंगाल कल जब आम आदमी पार्टी के सात सांसद टूट कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये तो खूब हो-हल्ला हुआ। लेकिन इन सात सांसदों का खेल तो अभी केवल झांकी भर है। इसकी असली परिणति तो अभी पंजाब में और आगे आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की तृणमूल पार्टी में होना बाकी है, जिसकी सुगबुगाहट अब सियासी गलियारों में होने लगी है। हालांकि आम आदमी पार्टी के जिन सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इनमें से राघव चड्ढा समेत कुछ नाम ऐसे हैं, जिनके पार्टी छोड़ने पर कोई हैरानी नहीं है क्योंकि इसके आसार पहले से ही दिखाई दे रहे थे। सबसे अधिक चर्चा तो पाठक ओर मित्तल में है। हालांकि इन सांसदों का बीजेपी में शामिल होना कोई हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से ऐसा माहौल साफ दिखाई दे रहा था कि ये सभी सांसद कुछ ऐसा कदम उठा सकते हैं। पार्टी में शामिल कराने के लिए बीजेपी को सिर्फ समय तय करना था। शुक्रवार को जब राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, तो वहां पर बीजेपी नेताओं की मौजूदगी से तभी स्पष्ट हो गया था कि यह कदम सोच-समझकर लंबी रणनीति के तहत उठाया गया है।

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अगले साल 2027 की शुरूआत में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पंजाब भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे अहम राज्य है पार्टी इसको किसी भी तरह से जीतना चाहती है। इसीलिए चुनाव से पहले राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिह समेत आम आदमी पार्टी के इन राज्यसभा सांसदों को पार्टी में शामिल कराना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है। सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा और संदीप पाठक 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में आप की जीत के प्रमुख सूत्रधार थे और दोनों कई महीनों से बीजेपी के संपर्क में थे। BJP  पंजाब में विभिन्न मतदाता समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए काम कर रही है और उसी के अनुसार, नेताओं को पार्टी में शामिल कर रही है।
इसी तरह भारतीय जनता पार्टी बंगाल में भी प्रयास शुरू कर चुकी है। बंगाल चुनाव जीतने या हारने दोनों की स्थिति में पार्टी का अगला निशाना तृणमूल कांग्रेस पार्टी को तोड़ने का है। पार्टी का एक धड़ा जहां चुनाव में पूरी ताकत झोंके हुए है तो दूसरा धड़ा तृणमूल में भी सेंध लगा रहा है इसकी खबर ममता बनर्जी को भी है। पार्टी ने वहां के लिए भी राघव चड्ढा सरीखो नेताओं को तैनात कर रखा है।

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यहीं नहीं BJP पंजाब में पांथिक वोटों में भी सेंधमारी करने की कोशिश कर रही है, जिनपर कभी शिरोमणि अकाली दल का दबदबा हुआ करता था। अकाली दल के पतन के बाद बीजेपी नेताओं का मानना है कि यह वोट बैंक उनके हाथ में आ सकता है। क्योंकि यह कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों से निराश हैं। बीजेपी के इसी रणनीति के तहत अप्रैल की शुरूआत में सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील एचएस फूलका बीजेपी में शामिल हुए, जिससे पंथिक मतदाताओं के बीच BJP की पहुंच मजबूत हुई। हालांकि राज्य अनुसूचित जातियों के बीच कांग्रेस की मजबूत पकड़ है लेकिन बीजेपी ने इसमें भी सेंधमारी शुरू कर दी है।
राघव चड्ढा ने पंजाब में जो खेल किया वह यूं ही अचानक नहीं हो गया। यह पूरा किस्सा तब शुरू हुआ दो अप्रैल को जब आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखा और यह बताया कि राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटाकर डॉ. अशोक मित्तल को वह पार्टी का राज्यसभा में डिप्टी लीडर नियुक्त कर रही है। इस टूट में राघव के टूटने का कोई बहुत आश्चर्य नहीं है। लेकिन आश्चर्य तो अशोक मित्तल को लेकर है जिन पर आम आदमी पार्टी ने सबसे अधिक भरोसा किया। उनको न केवल उपनेता बनाया बल्कि केजरीवाल लंबे समय से उनके घर पर ही रह रहे थे।

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राघव ने पार्टी के इस फैसले के विरोध में एक वीडियो पोस्ट किया और नाराजगी जाहिर की। उनके इस वीडियो के बाद ही पार्टी के तमाम नेताओं जैसे- संजय सिह, आतिशी, सौरभ भारद्बाज आदि भी राघव पर हमलावर हुए और बोलना शुरू किया कि राघव ने ये कदम डरकर उठाया है। वो बीजेपी से डर गए इसलिए उन्होंने पार्टी द्बारा उठाए गए मुद्दों को अपनी आवाज न देकर सॉफ्ट पीआर करने में लगे हैं। राघव को डिप्टी लीडर के पद से हटाने के बाद पंजाब सरकार ने चड्ढा को दी गई सिक्योरिटी भी हटा ली। इसके बाद राघव को केंद्र सरकार ने सिक्योरिटी दी। वहीं इसी के साथ ही डॉ. अशोक मित्तल के जालंधर समेत तमाम ठिकानों पर ईडी की फ़ेमा के तहत छापामारी होने लगी। राघव और केजरीवाल के बीच की दूरियां साल 2024 से ही बढ़ने लगी थीं, जब केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई और राघव लंदन में थे। उस वक्त राघव ने केजरीवाल के लिए सोशल मीडिया के जरिए भी कोई पोस्ट नहीं किया और न ही पार्टी के साथ दिखाई दिए। पार्टी के दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 हारने के बाद से तो जैसे राघव ने पार्टी से एक अनकही दूरी बना ली। वह सदन में जाते आम लोगों के मुद्दे उठाते लेकिन पार्टी में हुई तमाम गिरफ्तारियों, केजरीवाल-सिसोदिया समेत 21 आरोपियों के शराब घोटाला केस में बरी होने के बाद भी उन्होंने एक पोस्ट तक नहीं किया। इन सबके बाद आम आदमी पार्टी ने बड़ा फैसला लेते हुए राघव को इसी दो अप्रैल को राघव को डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया। इसके बाद राघव ने अपने साथ छह अन्य सांसदों संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी को अपने साथ लिया और आज पार्टी छोड़ दी। दो-तिहाई सांसदों को साथ लेकर 24 अप्रैल को सुबह ही राघव चड्ढा ने राज्यसभा सचिवालय में पार्टी छोड़ने का पत्र और नया गुट बनाते हुए भाजपा में शामिल होने की सूचना दे दी थी। इसके साथ ही राघव व अन्य आप नेता आज शाम भाजपा में शामिल हो गए।

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भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी को तोड़कर अपने को राज्यसभा में भी खासा मजबूत कर लिया है। अब रास में उसको सात सांसदों का एक साथ मिल जाना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि BJP ने यह पहली बार नहीं किया है। कांग्रेस, बसपा ओर अन्य दलों के नेताओं को ईडी, CBI और अन्य जांच एजेंसियों से डरा-धमका कर पहले छापेमारी और फिर गिरफ्तारी का भय दिखाकर अपनी पार्टी में शामिल करना भारतीय जनता पार्टी का शगल रहा है। हालांकि कई बार उसके चंगुल में संजय सिंह सरीख्ो कई नेता नहीं भी फंसे। अब देखना यह है कि आम आदमी पार्टी की टूट का अगला एपीसोड पंजाब या बंगाल में कब देखने को मिलेगा हालांकि सूत्रों की मानें तो पंजाब में इसकी अगली किस्त बहुत जल्द देखने को मिलेगी इसके लिए राघव चड्ढा की टीम को लगा दिया गया है और उनको सारे अस्त्र-शस्त्र थमा भी दिये गये हैं।


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