Varanasi: गंगा के बढ़े जलस्तर से परेशान वाराणसी के तटवर्ती इलाकों के लोगों को फिलहाल थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे गंगा का जलस्तर 69.33 मीटर पर स्थिर दर्ज किया गया। जलस्तर में फिलहाल बढ़ोतरी थमने के बावजूद घाटों और आसपास के इलाकों में बाढ़ का असर साफ नजर आ रहा है।
पिछले कुछ दिनों में गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। चेतावनी बिंदु के नीचे आने के बाद नदी का पानी दोबारा बढ़ने लगा था, जिससे तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई थी। अब जलस्तर स्थिर होने से लोगों ने कुछ राहत की उम्मीद जताई है। हालांकि, प्रशासन और स्थानीय लोगों की नजर लगातार नदी के जलस्तर पर बनी हुई है।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कई परिवार राहत शिविरों का सहारा लेने के बाद अब धीरे-धीरे अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। वरुणा नदी का पानी कम होने के बाद भी कई स्थानों पर गाद और कीचड़ जमा है। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी पूरी तरह उतरने और रास्तों के सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
वहीं, वाराणसी के प्रमुख घाटों पर बाढ़ का असर अभी भी दिखाई दे रहा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर सामान्य व्यवस्था प्रभावित होने के कारण छतों पर अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं। घाट की गलियों में पानी कम होने के बाद कीचड़ और गाद की समस्या बढ़ गई है। इसके चलते लोगों का घाटों तक पहुंचना भी मुश्किल बना हुआ है।
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गंगा के तेज प्रवाह को देखते हुए नावों का संचालन अभी भी बंद है। नाविकों और स्थानीय लोगों को नदी में उतरने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे घाटों के बीच आवागमन और स्थानीय गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं होती है और नदी का जलस्तर लगातार स्थिर या कम होता है, तो हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है।
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक वाराणसी में गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। वहीं अब तक गंगा का सर्वाधिक दर्ज जलस्तर 73.901 मीटर रहा है। शुक्रवार को दर्ज 69.33 मीटर का जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे है, लेकिन तटवर्ती इलाकों में बाढ़ के बाद की परेशानियां अभी बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों की निगाह मौसम के साथ-साथ गंगा के जलस्तर पर भी टिकी हुई है।
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