आज मनाया जाएगा…गोवर्धन पूजा पर विशेष

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राजेन्द्र गुप्ता, ज्योतिषी और हस्तरेखाविद  

इस बार अमावस्या तिथि दो दिन रहने से गोवर्धन पूजा कब होगी इसे लेकर लोगों में भ्रम बना हुआ है। चूंकि अमावस्या तिथि 21 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 53 मिनट तक रहेगी और कार्तिक प्रतिपदा का आरंभ 21 अक्टूबर, शाम 5 बजकर 54 मिनट पर होगा इसलिए उदया तिथि पर ही पर्व मनाने की परंपरा के अनुसार गोवर्धन पूजा का पर्व 22 अक्टूबर बुधवार को मनाया जाएगा।

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजन किया जाता है। इस दिन घर-घर गोबर से गोवर्धन महाराज का चित्र बनाया जाता है और पूजन किया जाता है। गोवर्धन पूजन दिवाली उत्सव का चौथा सबसे बड़ा उत्सव है। यह पर्व श्रीकृष्ण द्वारा अपनी छोटी उंगली से गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने के रूप में मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा हमेशा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है। इस बार प्रतिपदा तिथि का आरंभ 21 अक्टूबर की शाम से हो रही है। हिंदू धर्म में कुछ पर्व और व्रत ऐसे हैं, जो उदया तिथि में ही मनाए जाते हैं। उदया प्रतिपदा तिथि 22 अक्टूबर को मान्य रहेगी। ऐसे में गोवर्धन पूजा का पर्व 22 अक्टूबर दिन बुधवार को मनाया जाएगा।

कार्तिक प्रतिपदा का आरंभ :  21 अक्टूबर, शाम 5 बजकर 54 मिनट से।

कार्तिक प्रतिपदा का समापन  :  22 अक्टूबर, रात 8 बजकर 16 मिनट तक।

गोवर्धन पूजा का मुहूर्त

गोवर्धन पूजा पर अपराह्न 3 बजकर 13 मिनट से शाम 5 बजकर 49 मिनट तक शुभ मुहूर्त बन रहा है। इस तिथि पर स्वाति नक्षत्र और प्रीति योग का शुभ संयोग रहेगा। सूर्य तुला राशि में गोचर करेंगे, जहां चंद्रमा का भी संचार होने वाला है। ऐसे में यह पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त है।

गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व

गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से है। उस दिन इंद्रदेव के अहंकार को तोड़ने के लिए कृष्ण ने अपने छोटे से अंगूठे पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था और पूरे गांव की रक्षा की थी। तब से इस पर्व पर लोग गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा करते हैं ताकि जीवन में संकट ना आए और सुख-समृद्धि बनी रहे। गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट महोत्सव भी मनाया जाता हैं। मंदिरों में सैकड़ों प्रकार के व्यंजन बनाकर श्रीकृष्ण को भोग लगाया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन जो व्यक्ति भगवान को अन्न का भोग लगाता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।

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