
- बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है यह पावन दिन
राजेन्द्र गुप्ता
वैशाख माह की पूर्णिमा, जिसे पीपल पूर्णिमा और बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, आज 1 मई 2026 (शुक्रवार) को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है। यह दिन भगवान विष्णु और भगवान गौतम बुद्ध को समर्पित माना जाता है और हिंदू धर्म में इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
वैशाख पूर्णिमा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 30 अप्रैल 2026, रात 09:12 बजे,
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 1 मई 2026, रात 10:52 बजे,
स्नान-दान मुहूर्त: सुबह 04:15 बजे से 04:58 बजे तक,
पीपल पूर्णिमा पर पूजा विधि
- इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
- पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें,
- कलावा (मौली) बांधें,
- दीपक जलाएं,
- 7 या 108 बार परिक्रमा करें,
- ऐसा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
धार्मिक महत्व : मान्यता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु का वास होता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर पापों का नाश होता है और घर में सुख-शांति आती है। यह पूर्णिमा हिंदू नववर्ष की दूसरी पूर्णिमा मानी जाती है और इसे अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन व्रत, दान और पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
स्नान-दान का महत्व
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान विशेष फलदायी होता है।
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा से धन-समृद्धि बढ़ती है।
सत्यनारायण पूजा का विशेष महत्व
पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान गौतम बुद्ध की जयंती भी मनाई जाती है। यह दिन उनके जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण तीनों का प्रतीक माना जाता है। इस कारण यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
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