राजेन्द्र गुप्ता
वैशाख मास की कृष्ण अष्टमी यानी कालाष्टमी (काल भैरव अष्टमी) नौ मई 2026, रविवार को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान शिव के सबसे उग्र और रक्षक रूप काल भैरव को समर्पित है, जो समय के स्वामी, न्याय के रक्षक और सभी प्रकार के भय, शत्रु तथा नकारात्मक शक्तियों के नाशक हैं। यह कालाष्टमी रविवार को पड़ रही है, जो सूर्य और शिव की संयुक्त ऊर्जा को और मजबूत बनाती है। इस समय शनि मीन राशि में और राहु कुंभ में होने से कई लोगों की कुंडली में शनि दोष, राहु-केतु दोष या अंगारक योग सक्रिय हो सकता है।
कालाष्टमी पुजा 9 मई 2026 का मुहूर्त क्या है?
- अष्टमी तिथि प्रारंभ 8 मई 2026, रात 10:35 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त 9 मई 2026, रात 11:55 बजे
- मुख्य पूजा दिन 9 मई 2026 (रविवार)
- निशिता काल मुहूर्त रात 12:00 बजे से 12:50 बजे तक
- पूजा का सर्वोत्तम समय रात्रि 10:00 बजे से 12:00 बजे तक
कालाष्टमी का महत्व और विशेषता– काल भैरव क्यों हैं समय के कोतवाल?
काल भैरव भगवान शिव के सबसे उग्र रूप हैं। शिव पुराण के अनुसार जब ब्रह्मा जी ने शिव का अपमान किया, तो शिवजी के क्रोध से काल भैरव प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा का पांचवां सिर काट दिया। बाद में काशी में यह ब्रह्महत्या दोष दूर हुआ और भैरव काशी के कोतवाल बन गए। इस वर्ष शनि और राहु की स्थिति काफी प्रभावशाली है। कालाष्टमी पर भैरव आराधना इन दोषों को शांत करने में विशेष रूप से सहायक साबित होगी। यह दिन उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो अज्ञात भय, शत्रु बाधा, मुकदमा या तंत्र-मंत्र से परेशान हैं।
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कालाष्टमी पूजा विधि क्या है?
सुबह तैयारी: स्नान कर काले या नीले वस्त्र पहनें। संकल्प लें “भय, बाधा और पाप नाश के लिए कालाष्टमी व्रत रखता/रखती हूं”।
पूजा सामग्री: काल भैरव फोटो या मूर्ति, सरसों का तेल, काले तिल, उड़द दाल के पकौड़े, काले फूल, लौंग, अगरबत्ती, काला कपड़ा।
- मूर्ति को स्नान करवाकर काला कपड़ा चढ़ाएं।
- सरसों तेल का दीपक जलाएं (काले कुत्ते को रोटी खिलाएं)।
- उड़द दाल के पकौड़े या जलेबी का भोग लगाएं।
- मंत्र जाप: ॐ भ्रं भैरवाय नमः (108 बार) या भैरव चालीसा।
- रात्रि पूजा: निशिता काल में विशेष आरती और स्तोत्र पाठ करें।
- व्रत समापन: अगले दिन सुबह सात्विक भोजन से पारण करें।
- व्रत नियम: दिन भर उपवास, सात्विक भोजन, क्रोध से बचें। काले कुत्ते को भोजन देना अनिवार्य है।
कालाष्टमी के विशेष उपाय क्या है और क्यों किए जाते है?
कालाष्टमी की पूजा का मुख्य उद्देश्य है व्यक्ति के जीवन से भय मुक्ति और सुरक्षा। इस पूजा के निम्नलिखित उपाय है:
- सरसों तेल का दीपक भैरव मंदिर में जलाएं।
- काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं।
- काले तिल बहते पानी में प्रवाहित करें।
- लौंग की माला से 108 बार मंत्र जप करें।
- उड़द दाल का हलवा भोग लगाएं।
- काले कपड़े में नमक बांधकर घर के कोने में रखें।
- भैरव कवच स्तोत्र का पाठ करें।
- निशिता काल में पारद भैरव यंत्र पर सरसों तेल छिड़कें पूरे साल सुरक्षा और शांति मिलेगी।
कालाष्टमी व्रत के लाभ कौन-कौन से होते है?
- कालाष्टमी पूजा और व्रत के निम्नलिखित लाभ मिलते है,
- अज्ञात भय, चिंता और डर से स्थायी मुक्ति।
- शत्रु, मुकदमा या तंत्र बाधा का अंत।
- शनि-राहु दोष में तीव्र राहत।
- स्वास्थ्य सुधार (मानसिक और शारीरिक)।
- धन-समृद्धि और करियर में स्थिरता।
- पाप नाश और मोक्ष की ओर बढ़ना।
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