मिल कर्मियों की सुनो पुकार, ACS की मनमानी से मचा है हाहाकार

Mohiuddin Sugar Mill NayaLook
  • अधिकारी ले रहे 53 प्रतिशत मजा और कर्मचारियों की नहीं है किसी को चिंता
  • चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के उच्चाधिकारी ले रहे 53 प्रतिशत मंहगाई भत्ता
  • चीनी मिल संघ, मिलों और आसवनी अधिकारियों कर्मियों को दो साल से नहीं मिला भत्ता
  • मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गन्ना मंत्री से गुहार लगाने के बाद भी अभी तक नहीं हुआ भुगतान

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के उच्चाधिकारी अपर मुख्य सचिव (एसीएस), गन्ना आयुक्त, प्रबंध निदेशक, संयुक्त प्रबंध निदेशक एवं चीनी मिलों में नियुक्त पीसीएस प्रधान प्रबंधकों को 53 प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिल रहा है वहीं चीनी मिल संघ, चीनी मिलों और आसवनी में तैनात अधिकारियों और कर्मियों को दो साल से मंहगाई भत्ते का भुगतान नहीं किया जा रहा है। यह बात सुनने और पढ़ने में भले ही अटपटी लगे लेकिन चीनी मिल संघ, मिलों और आसवनी अधिकारियों और कर्मियों का शासन और विभाग को किया गया पत्राचार इस सच की पुष्टि करता नजर आ रहा है। विभाग के उच्चाधिकारियों का तर्क है कि मिलों के घाटे में होने की वजह से उन्हें मंहगाई भत्ते का भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसा तब किया जा रहा है जब विभाग के उच्चाधिकारियों को मंहगाई भत्ता दिया जा रहा है। इस दोहरे मापदंड से चीनी मिल संघ, मिलों और आसवनी कर्मियों में खासा आक्रोश व्याप्त है। इन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर कर्मियों को मंहगाई भत्ता दिलाए जाने की मांग की है।

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ, प्रदेश के करीब दो दर्जन चीनी मिल और आठ आसवनी में पूर्व में करीब 15 हजार अधिकारी और कर्मचार तैनात थे। लगातार सेवानिवृत होने के बाद वर्तमान समय में लगभग दो से ढाई हजार अधिकारी और कर्मचारी ही बचे हुए हैं। कर्मचारीहित के लिए संघर्षरत राष्ट्रीय चीनी मिल अधिकारी परिषद एवं मिल वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गन्ना राज्यमंत्री और एसीएस गन्ना को भेजे गए पत्र में बताया है कि विभाग चीनी मिल संघ, चीनी मिलों और आसवनी के अधिकारियों और कर्मचारियों को बीते दो वर्ष से मंहगाई भत्ते का भुगतान नहीं किया गया। जबकि विभाग के उच्चाधिकारी लगातार मंहगाई भत्ता ले रहे हैं। विभाग की मुखिया एसीएस का तर्क है कि चीनी मिले घाटे में होने की वजह से अधिकारियों और कर्मियों को मंहगाई भत्ता नहीं दिया जा रहा है। उधर अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि जब मिलें घाटे में है तो उच्चाधिकारियों को भी भत्ते का भुगतान नहीं किया जाए।

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मंहगाई भत्ते का भुगतान नहीं होने को लेकर अधिकारी चीनी मिल परिषद और वेलफेयर एसोशिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, विभाग के राज्यमंत्री, अपर मुख्य सचिव गन्ना को पत्र भेजकर संघ और चीनी मिल,आसवनी के अधिकारियों और कर्मियों को अविलंब मंहगाई भत्ता दिलाए जाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस पर जल्दी निर्णय नहीं लिया गया तो समस्त कर्मचारी और अधिकारी आंदोलन करने को विवश होंगे। उधर इस संबंध में जब अपर मुख्य सचिव चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास वीना कुमारी मीणा से बात करने का प्रयास किया गया तो उनके निजी सचिव ने बताया कि मैडम अभी व्यस्त है अभी बात नहीं हो सकती है।

सहकारी चीनी मिल संघ का होगा निजीकरण!

उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ बंदी के कगार पर पहुंच गया है। एक समय में प्रदेश की 24 चीनी मिलों और 8 आसवनी में करीब 15 हजार अधिकारी और कर्मचारी थे। सेवानिवृत होते होते अब सहकारी चीनी मिल संघ में सिर्फ दो से ढाई हजार अधिकारी और कर्मचारी बचे है। संघ में न तो अधिकारियों को प्रोन्नति मिल रही है और न ही नई भर्ती की जा रही है। आलम यह हो गया है कि अधिकारियों की संख्या का होने की वजह से एक एक अधिकारी के पास कई कई अनुभागों की जिम्मेदारियां सौंप रखी गई है। सूत्रों का कहना है कि यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब सहकारी चीनी मिल संघ बंदी के कगार पर पहुंच जाएगा। बंद करने की वजह से नियुक्ति और प्रोन्नति की प्रक्रिया को रोक दिया गया है। सरकार इसका निजीकरण करने की तैयारी में है।

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