कविता : शोक नहीं, ये दुनिया ख़ुशी मनाये

कर्नल आदि शंकर मिश्र
कर्नल आदि शंकर मिश्र

दुष्कर्म इतने नही करने चाहिए कि
मौत आने पर लोगों को त्यौहार के
जैसा एहसास भी लगने लग जाये,
शोक नहीं, ये दुनिया ख़ुशी मनाये।

कोई दुर्दांत डाकू बन लूटता है,
माफिया बन जग को सताता है,
झूठा सन्त बन दुष्कर्म करता है,
पैसे से ग़रीब का खून चूसता है।

कविता : हम दुनिया में नम्बर एक बन गये हैं,

नेता बन जनता को धोखा देता है,
ताक़त की हवस में पीड़ा देता है,
माफिया बन कर कलह मचाता है,
आतंकवादी बन आतंक फैलाता है।

रावण, कंस से अतीक, अशरफ़,
सबका हश्र लोमहर्षक ही होता है,
पूरा कुनबा ही नष्ट हो जाता है,
पानी देने वाला कोई नहीं होता है।

आदित्य अति का भला न बोलना,
और वैसे ही अति की भली न चूप,
ना अच्छा होता, अति का बरसना,
और ना ही अति की भली है धूप ।

 

Litreture

प्रवासी भारतीय सुरेश चंद्र शुक्ल ‘ शरद आलोक’ नार्वे के ओस्लो शहर मे रहते है। भारत की हर राजनैतिक सामगजिक गतिविधियों पर इनकी नजर रहती है।

प्रवासी भारतीय सुरेश चंद्र शुक्ल ‘ शरद आलोक’ नार्वे के ओस्लो शहर मे रहते है। भारत की हर राजनैतिक सामगजिक गतिविधियों पर इनकी नजर रहती है। शिक्षक,पत्रकार,संपादक,कवि,कहानी कार है। इनके सद्य:प्रकाशित काव्य संग्रह ” जन मन के गांधी पर समीक्षा भारतीय समालोचक डॉ ऋषि कुमार मणि त्रिपाठी ने किया। जन मन के गांधी:कवि-सुरेशचंद्र शुक्ल’ शरद […]

Read More
Litreture National

बुझता दिया तेल की बूंदे पा गया !

के. विक्रम राव  आज (29 मई 2024, बुधवार) मेरे 85 बसंत पूरे हो गए। कई पतझड़ भी। कवि कबीर की पंक्ति सावधान करती है, जब वे माटी से घमंडी कुम्हार को कहलाते हैं : “एक दिन ऐसा आएगा, जब मैं रौंदूगी तोय।” चेतावनी है। मगर आस बंधाती है शायर साहिर की पंक्ति : “रात जितनी […]

Read More
Litreture

लघु-कथाकार नोबेल विजेताः एलिस का चला जाना !

के. विक्रम राव साहित्य के प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार की विजेता एलिस मुनरो का कल (15 मई 2024) कनाडाई नगर ओंतारियों में निधन हो गया। वे 92 वर्ष की थीं। मतिभ्रम से पीड़ित थीं। लघु-कथा लेखिका के रूप में मशहूर एलिस की समता भारतीय लघुकथाकार मुल्कराज आनंद और आरके नारायण से की जाती है। रूसी कथाकार […]

Read More