मजबूत भारत का मंसूबा

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

राष्ट्रीय एकता में सरदार पटेल के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उनके योगदानों को समुचित सम्मान दिया जा रहा है। स्वतन्त्रता संग्राम से लेकर मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण तक में वल्लभ भाई का योगदान बहुत महत्वपूर्ण था। उनका जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व सदैव प्रेरणा के रूप में देश के सामने रहेगा। उन्होने युवावस्था में ही राष्ट्र और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया था। इस ध्येय पथ पर वह निःस्वार्थ भाव से लगे रहे। गीता में भगवान कृष्ण ने कर्म को योग रूप में समझाया है। अर्थात अपनी पूरी कुशलता और क्षमता के साथ दायित्व का निर्वाह करना चाहिए। सरदार पटेल ने आजीवन इसी आदर्श पर अमल किया। जब वह वकील के दायित्व का निर्वाह कर रहे थे, तब उसमें भी उन्होंने मिसाल कायम की। इस संदर्भ में एक घटना उल्लेखनीय होगी कि एक बार वह जज के सामने जिरह कर रहे थे, तब उन्हें एक टेलीग्राम मिला। उन्होने उसे देखा और चुपचाप जेब मे रख लिया। जिरह जारी रही। जिरह पूरी होने के बाद उन्होंने घर जाने का फैसला लिया। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उस तार में उनकी धर्मपत्नी के निधन की सूचना थी।

वस्तुतः यह उनके लौहपुरुष होने का भी उदाहरण है। ऐसा नहीं कि इसका परिचय आजादी के बाद उनके कार्यो से मिला, बल्कि यह दृढ़ता उनके व्यक्तित्व की बड़ी विशेषता थी। जिसका प्रभाव उनके प्रत्येक कार्य में दिखाई देता था। बचपन मे फोड़े को गर्म सलाख से ठीक करने का प्रसंग भी ऐसा ही था। तब बालक वल्लभ भाई अविचलित बने रहे थे। यह प्रसंग उनके जीवन को समझने में सहायक है। आगे चलकर इसी विशेषता ने उन्हें महान स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी और कुशल प्रशासक के रूप में प्रतिष्ठित किया। देश को आजाद करने में उन्होने महत्वपूर्ण योगदान दिया। महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के साथ ही कांग्रेस में एक बड़ा बदलाव आया था। इसकी गतिविधियों का विस्तार सुदूर गांव तक हुआ था। लेकिन इस विचार को व्यापकता के साथ आगे बढ़ाने का श्रेय सरदार पटेल को दिया जा सकता है। उन्हें भारतीय सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था की भी गहरी समझ थी। वह जानते थे कि गांवों को शामिल किए बिना स्वतन्त्रता संग्राम को पर्याप्त मजबूती नहीं दी जा सकती। वारदोली सत्याग्रह के माध्यम से उन्होने पूरे देश को इसी बात का सन्देश दिया था। इसके बाद भारत के गांवों में भी अंग्रेजो के खिलाफ आवाज बुलंद होने लगी थी। देश मे हुए इस जनजागरण में सरदार पटेल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। इस बात को महात्मा गांधी भी स्वीकार करते थे।

सरदार पटेल के विचारों का बहुत सम्मान किया जाता था। उनकी लोकप्रियता भी बहुत थी। स्वतन्त्रता के पहले ही उन्होने भारत को शक्तिशाली बनाने की कल्पना कर ली थी।सरदार पटेल भारत की मूल परिस्थिति को गहराई से समझते थे। वह जानते थे कि जब तक अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान महत्वपूर्ण बना रहेगा, तब तक सन्तुलित विकास होता रहेगा। इसके अलावा गांव से शहरों की ओर पलायन नही होगा। गांव में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। आजादी के बाद भारत को एकजुट रखना बड़ी चुनौती थी। अंग्रेज जाते-जाते अपनी कुटिल चाल चल गए थे। साढ़े पांच सौ से ज्यादा देशी रियासतों को वह अपने भविष्य के निर्णय का अधिकार दे गए थे। उनका यह कुटिल आदेश एक षड्यंत्र जैसा था। वह दिखाना चाहते थे कि भारत अपने को एक नहीं रख सकेगा, देश के सामने आजाद होने के तत्काल बाद इतनी रियासतों को एक रखने की चुनौती थी। सरदार पटेल ने बड़ी कुशलता से इस एकीकरण का कार्य सम्पन्न कराया। इसमें भी उनका लौह पुरुष वाला व्यक्तित्व दिखाई देता है।

उन्होने देशी रियासतों की कई श्रेणी बनाई। सभी से बात की। अधिकांश को सहजता से शामिल किया। कुछ के साथ कठोरता दिखानी पड़ी। सेना का सहारा लेने से भी वह पीछे नहीं हटे। मतलब देश की एकता को उन्होने सर्वोच्च माना और उसके लिए किसी भी हद तक जाने को तत्पर दिखे। आजादी के बाद उन्हें केवल तीन वर्ष देश की सेवा का अवसर मिला। इस अवधि में ही उन्होने बेमिशाल कार्य किये। ईमानदारी और सादगी ऐसी कि निधन के बाद निजी सम्प्पति के नाम पर उनके पास कुछ नहीं था। लेकिन उनके प्रति देश की श्रद्धा और सम्मान का खजाना उतना ही समृद्धशाली था। यह उनकी महानता का प्रमाण है। मोदी सरकार में उनके जन्म जयंती को एकता दिवस के रूप में मनाए जाने की शुरुआत हुई तथा उनकी 182 मीटर की विशाल प्रतिमा स्थापित की गयी जो दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा है। उनके जन्मदिन को बड़े स्तर पर मनाया जा रहा है। राष्ट्र के ऐसे नायकों का यह सम्मान होना ही चाहिए। सरदार पटेल का व्यक्तित्व और कर्तृत्व राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज भी हमारे दुश्मन जाति, भाषा और नस्ल के आधार पर देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अतीत की तरह ही भारत के उत्थान से परेशान होने वाली ताकतें आज भी मौजूद हैं। जातियों के नाम पर हमें लड़ाने के लिए तरह तरह के नरेटिव गढ़े जाते हैं। इतिहास को भी ऐसे पेश किया जाता हैं कि जिससे देश जुड़े नहीं और दूर हो जाएंं। कई बार ये ताकत गुलामी की मानसिकता के रूप में हमारे अंदर घर कर जाती है। कई बार ये तुष्टिकरण के रूप में, कभी परिवारवाद के रूप में, कभी लालच और भ्रष्टाचार के रूप में दरवाजे तक दस्तक दे देती है। जो देश को बांटती और कमजोर करती है. देश के करोड़ों लोगों ने दशकों तक अपनी मौलिक जरूरतों के लिए भी लंबा इंतजार किया है। बुनियादी सुविधाओं की खाई जितनी कम होगी उतनी एकता भी मजबूत होगी। इसलिए आज देश में सैचुरेशन के सिद्धांत पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि हर योजना का लाभ हर लाभार्थी तक पहुंचे। इसलिए आज हाउसिंग फॉर आल, डिजिटल कनेक्टिविटी फॉर ऑल, क्लीन कुकिंग फॉर आल, इलेक्ट्रिसिटी फॉर ऑल के सिद्धांत पर काम हो रहा है।

Purvanchal Raj Dharm UP

Big News : कुशीनगर में नहर की पटरी से सागौन के छह पेड़ काट ले गया ‘पुष्पा’

कुशीनगर में सक्रिय है ‘पुष्पा’ गैंग, विभाग को खबर ही नहीं, मामला दर्ज अजय पाठक कुशीनगर । कुशीनगर जनपद के नेबुआ-नौरंगिया थाना क्षेत्र के खैरटिया वन टोली के समीप गंडक नहर की पटरी से सोमवार रात को तस्कर सागौन के छह पेड़ काट ले गए। सुबह गांव के लोगों ने कटे पेड़ की जड़े़ देखा […]

Read More
Raj Dharm UP

बिजली कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार दूसरी दिन भी जारी

प्रदेश भर में हजारों बिजली कर्मियों ने कार्य छोड़कर दिनभर विरोध प्रदर्शन किया, लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर ऊर्जा निगमों में 29 नवम्बर से प्रारम्भ अनिश्चिकालीन कार्य बहिष्कार आज दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदेश भर में हजारों बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियन्ताओं ने काम बन्द कर दिन भर […]

Read More
Raj Dharm UP

बहराइच में रोडवेज बस को ट्रक ने मारी टक्कर, छह लोगों की मौत, 15 घायल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बहराइच में बड़ा सड़क हादसा हुआ है। रोडवेज बस और ट्रक की भीषण टक्कर में छह लोगों की मौत हो गई। वहीं 15 लोग घायल हुए हैं। घायलों में से कुछ को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस की […]

Read More