
New Delhi: चीनी की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं को अभी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। एक तरफ चीनी मिलों में थोक भाव घटकर करीब ₹47 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, वहीं दूसरी ओर खुदरा बाजार में ग्राहकों को इसके लिए लगभग ₹64 प्रति किलो तक चुकाना पड़ रहा है। थोक और खुदरा कीमतों के बीच करीब ₹17 का यह अंतर अब सवाल खड़े कर रहा है। अगस्त में चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। हालांकि अब मिल स्तर पर कीमतों में नरमी आई है, लेकिन इसका फायदा अभी सीधे ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है। इसकी सबसे बड़ी वजह बाजार में मौजूद पुराना स्टॉक बताई जा रही है।
महंगे पुराने स्टॉक की वजह से रिटेल कीमतें ऊंची
बाजार से जुड़े जानकारों के मुताबिक, कई खुदरा दुकानदारों और व्यापारियों ने चीनी का स्टॉक उस समय खरीदा था, जब कीमतें ज्यादा थीं। ऐसे में वे पुराने माल को कम कीमत पर बेचकर नुकसान उठाने से बचना चाहते हैं। यही कारण है कि मिलों से सस्ती चीनी मिलने के बावजूद खुदरा बाजार में कीमतों में तुरंत गिरावट नहीं आई है। दुकानदार पहले पुराने स्टॉक को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद जब कम कीमत पर खरीदा गया नया स्टॉक बाजार में आएगा, तब खुदरा कीमतों में भी कमी दिखाई देने की उम्मीद है।
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करीब 10 दिन में मिल सकती है राहत
इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि थोक कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में कुछ समय लगता है। आम तौर पर दुकानदारों के पास चीनी के कई बोरे स्टॉक में रहते हैं। नया माल कम कीमत पर आने और पुराने स्टॉक के खत्म होने के बाद ही बिक्री मूल्य में बदलाव होता है। अनुमान है कि थोक भाव में गिरावट के करीब 10 दिन बाद इसका असर खुदरा कीमतों पर नजर आ सकता है। हालांकि वास्तविक कीमत स्थानीय बाजार, स्टॉक और कारोबारी मार्जिन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
जमाखोरी पर सरकार ने कसा शिकंजा
चीनी की कीमतों पर नियंत्रण और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने स्टॉक बिक्री से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। नए नियम के तहत चीनी मिलों को रिलीज ऑर्डर मिलने के बाद निर्धारित स्टॉक को सात दिनों के भीतर बाजार में जारी करना होगा। पहले इसके लिए करीब एक महीने का समय दिया जाता था। सरकार का उद्देश्य चीनी की कृत्रिम कमी और जमाखोरी पर रोक लगाकर बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना है। इससे आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
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