
अमेरिका का ईरान पर बड़ा हवाई हमला
ट्रंप की खुली धमकी- अब जवाब दिया तो होगा और बड़ा वार; 10 बड़ी बातें
New Delhi : मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्र में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई और मिसाइल हमले किए हैं। बंदर अब्बास और क़ेश्म द्वीप के आसपास धमाकों की खबरों के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिकी कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा और तेल आपूर्ति को लेकर पहले से चिंता बनी हुई है। इस समुद्री मार्ग को वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
हमले से जुड़ी 10 बड़ी बातें
1. बंदर अब्बास और क़ेश्म के पास धमाके
दक्षिणी ईरान के होर्मोज़गन प्रांत में बंदर अब्बास और क़ेश्म द्वीप के आसपास कई धमाकों की आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
2. अमेरिकी सेना ने IRGC ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी बलों ने IRGC से जुड़े सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। अमेरिका ने इसे अपने सैनिकों और वाणिज्यिक जहाजों पर कथित ईरानी हमलों की प्रतिक्रिया बताया है।
3. ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी
हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देने की कोशिश की गई तो इससे कहीं ज्यादा बड़ा सैन्य हमला किया जा सकता है।
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4. ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि ईरान की नौसेना और वायुसेना कमजोर हो चुकी है और देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
5. होर्मुज पर केंद्रित अमेरिकी रणनीति
अमेरिकी कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान की उन रडार और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना बताया जा रहा है, जिनका इस्तेमाल समुद्री यातायात को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
6. लराक द्वीप पर पहले भी हुआ था हमला
इससे पहले 30 अगस्त को अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित लराक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया था।
7. ईरान ने भी किया था जवाबी हमला
अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने की जानकारी सामने आई थी। कुछ देशों ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम से इन हमलों को रोकने का दावा किया था।
8. बातचीत की कोशिशों के बीच बढ़ा तनाव
अमेरिका का आरोप है कि ईरानी नेतृत्व बातचीत की संभावना बनाए रखता है, लेकिन जरूरी फैसले समय पर नहीं लेता। इसी वजह से सैन्य विकल्प का इस्तेमाल करना पड़ा।
9. ईरानी राष्ट्रपति ने युद्धविराम का संकेत दिया
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका पहले तय समझौते की शर्तों का पालन करता है, तो उनका देश भी अपनी प्रतिबद्धताओं पर लौटने के लिए तैयार है।
10. तेल और वैश्विक व्यापार पर असर का खतरा
अमेरिका-ईरान टकराव का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से बड़ी मात्रा में तेल का अंतरराष्ट्रीय कारोबार होता है। यहां तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
कुल मिलाकर, अमेरिकी हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश करता दिख रहा है। यदि दोनों देशों के बीच सैन्य जवाबी कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित न रहकर वैश्विक ऊर्जा और व्यापार व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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