
Jammu: लद्दाख में वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए बड़ी सौगात सामने आई है। लेह में देश की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू कर दी गई है। इस सफारी के जरिए पर्यटक हिम तेंदुओं के साथ हिमालयी भूरे भालू, भेड़िए और अन्य वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर पा सकेंगे।
सफारी का पहला चरण रुमबक, शांग और उले क्षेत्रों में शुरू किया गया है। आने वाले समय में इसे लद्दाख के दूसरे वन्यजीव क्षेत्रों तक विस्तार देने की योजना है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने बुधवार को लेह में इस सफारी का शुभारंभ किया।

विनय कुमार सक्सेना
छह ओपन-बैक वाहनों से होगी सफारी
सफारी के लिए प्रशिक्षित स्थानीय चालक और वन्यजीव गाइड तैनात किए गए हैं। पर्यटकों को छह ओपन-बैक वाहनों के जरिए दूरदराज के इलाकों में ले जाया जाएगा, ताकि वे प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों का सुरक्षित तरीके से अवलोकन कर सकें।
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भेड़िए
लद्दाख में बड़ी संख्या में पर्यटक खासतौर पर स्नो लेपर्ड देखने पहुंचते हैं। ऐसे में इस सफारी को वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
लद्दाख में 477 स्नो लेपर्ड
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, लद्दाख में करीब 477 हिम तेंदुए पाए जाते हैं, जबकि देशभर में इनकी संख्या लगभग 718 है। प्रशासन का जोर अब स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर है।
उपराज्यपाल ने कहा कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय लोगों को भी इसमें सक्रिय भागीदार बनाया जाना जरूरी है। सफारी के जरिए स्थानीय गाइडों को रोजगार और महिलाओं को संरक्षण आधारित हस्तशिल्प से आय के अवसर देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
पहल के तहत 20 स्थानीय युवाओं को पक्षियों की पहचान, बर्डवॉचिंग और स्पॉटिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें दूरबीन उपलब्ध कराने के साथ प्रमुख पक्षी-दर्शन क्षेत्रों में बर्ड-वॉचिंग हाइड विकसित करने की भी योजना है।
इससे स्थानीय युवाओं के लिए वन्यजीव गाइड, बर्ड गाइड और नेचर इंटरप्रेटर के तौर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं, तुरतुक, फोटोक्सार, सांग्रह, चुशुल और शरगोल की 50 महिलाएं संरक्षण आधारित उद्यमों से जुड़ रही हैं।
कई क्षेत्रों तक विस्तार की तैयारी
लद्दाख में 340 से अधिक पक्षी प्रजातियां और करीब 1,800 संवहनी पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं। भविष्य में सफारी को हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग, काराकोरम वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी, नुब्रा, जांस्कर, शाम, कारगिल और द्रास जैसे क्षेत्रों तक ले जाने की योजना है।
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