
SIR के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम काटे गए
Lucknow: उ.प्र. कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा‘मोना’ ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान संविधान बदलने के लिए 400 पार का नारा दिया था, लेकिन संविधान रक्षक नागरिकों ने उत्तर प्रदेश में भाजपा को आधा कर दिया और भाजपा की सत्ता को बैसाखियों पर ला दिया। इसके बाद भाजपा ने संविधान पर प्रहार का दूसरा रास्ता निकाला और SIR के नाम पर देश के करोड़ों लोगों को उनके मताधिकार से वंचित करने का षड्यंत्र रचा गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सामाजिक न्याय के पुरोधा और संविधान रक्षक राहुल गांधी पिछले एक वर्ष से अधिक समय से इस असंवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। आज हम चार पुख्ता प्रमाण देश और प्रदेश के सामने रख रहे हैं, जो यह सवाल खड़ा करते हैं कि वोट चोरी की दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है आराधना मिश्रा ने कहा कि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग के दोनों आयुक्तों संधू और जोशी ने कहा कि कानून का उल्लंघन करके फॉर्म-6 में बदलाव किया गया और उन्हें अंधेरे में रखकर फैसले लिए जा रहे थे।
यदि चुनाव जैसी संवेदनशील संवैधानिक प्रक्रिया में ही आयोग के आयुक्तों को जानकारी से बाहर रखा गया, तो जनता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल क्यों न उठाए? सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने फॉर्म-6 में बदलाव की कोई अनुमति नहीं दी थी। सवाल यह है कि यदि सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति नहीं थी तो फॉर्म-6 में बदलाव किसके आदेश पर और किस अधिकार के तहत किया गया
सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश जस्टिस भुइयां ने अंग्रेजी हुकूमत के दौर का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि उस समय भारत में केवल प्रभावशाली लोगों को ही वोट देने का अधिकार था और आबादी के मात्र 14 प्रतिशत लोग मतदान कर पाते थे। यह टिप्पणी लोकतंत्र में सार्वभौमिक मताधिकार के महत्व और मतदाता सूची से लोगों को बाहर किए जाने की गंभीरता को रेखांकित करती है।
ये भी पढें
‘ग्लोबल साउथ’ को मिलेगी नई ताकत, भारत-घाना के बीच हुए कई MoU
सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने पश्चिम बंगाल में लगभग 90 लाख वोट काटे जाने के मामले का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बावजूद अदालत को SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने की आवश्यकता क्यों महसूस नहीं हुई। इन तमाम घटनाक्रमों के बीच संवैधानिक संस्था और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्तियों की टिप्पणियां चुनाव आयोग और उसके प्रमुख ज्ञानेश कुमार द्वारा मोदी सरकार के लिए किए जा रहे कथित अवैधानिक कामों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं और राहुल गांधी द्वारा उठाए जा रहे प्रामाणिक सवालों को मजबूती प्रदान करती हैं।
आराधना मिश्रा ने कहा कि जिस उत्तर प्रदेश ने भाजपा को सबक सिखाया, उसी उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को सबसे ज्यादा हटाया गया। आज हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और वाराणसी से सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहते हैं कि जब मतदाता सूची में सबसे ज्यादा नाम उत्तर प्रदेश से ही काटे गए तो आपने आपत्ति लेना तो दूर, मतदाताओं से छीने गए अधिकारों को ही सही ठहराने का काम क्यों किया।
आराधना ने अपने बयान में भाजपा और चुनाव आयोग से तीन सवाल पूछे। पहला सवाल -अतिरिक्त 16 लाख 18 हजार वोट किस प्रक्रिया से आए? उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध फॉर्म-6 एप्लीकेशन्स में लगभग 71 लाख 38 हजार आवेदन दिखाई देते हैं, लेकिन अंतिम मतदाता सूची में 84 लाख 28 हजार नाम जोड़े गए हैं, अर्थात दोनों आंकड़ों में लगभग 16 लाख 18 हजार का अंतर है।
सवाल सीधा है कि ये अतिरिक्त 16 लाख 18 हजार नाम किस प्रक्रिया के तहत जोड़े गए और इन मतदाताओं के फॉर्म-6 एप्लीकेशंस तथा संबंधित विवरण सार्वजनिक रूप से कहां उपलब्ध हैं? आराधना ने दूसरा सवाल उठाया कि 16 करोड़ 91 लाख मतदाताओं के आंकड़े और SIR की अंतिम सूची में इतना बड़ा अंतर क्यों? उत्तर प्रदेश की 2026 की त्रिस्तरीय पंचायत मतदाता सूची मंक 12 करोड़ 58 लाख मतदाता हैं। 2023 की नगरीय निकाय मतदाता सूची में चार करोड़ 33 लाख मतदाता थे।
इन दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर कुल संख्या लगभग 16 करोड़ 91 लाख होती है। लेकिन SIR के बाद विधानसभा की अंतिम मतदाता सूची में केवल 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 मतदाता रह गए। इन दोनों आंकड़ों के बीच लगभग तीन करोड़ 52 लाख मतदाताओं का अंतर है। चुनाव आयोग और भाजपा सरकार बताए कि इतने बड़े अंतर का कारण क्या है? तीसरा सवाल यह कि SIR से पहले के 15 करोड़ 44 लाख मतदाताओं में से लगभग दो करोड़ चार लाख नाम कहां गए?
ये भी पढें
ICICI Life Insurance का नया ब्रांड अवतार, ‘हर कल आसान’ के साथ नई शुरुआत
SIR से पहले उत्तर प्रदेश की विधानसभा मतदाता सूची में 15 करोड़ 44 लाख 30 हजार 92 मतदाता थे, अंतिम SIR सूची में 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 मतदाता रह गए। अर्थात लगभग दो करोड़ चार लाख मतदाता कम हो गए। चुनाव आयोग बताए कि इन लगभग दो करोड़ चार लाख मतदाताओं के नाम किन किन कारणों से हटाए गए? आऱाधना ने पूछा कि कितने नाम मृत्यु के कारण हटाए गए? कितने नाम स्थान परिवर्तन के कारण हटाए गए? कितने नाम डुप्लीकेट होने के कारण हटाए गए?
कितने मतदाता अनुपलब्ध पाए गए? कितने नाम दस्तावेजों के अभाव में हटाए गए?और कितने नाम अन्य कारणों से हटाए गए? चुनाव आयोग प्रत्येक श्रेणी का जिला वार और बूथ वार आंकड़ा सार्वजनिक करे तथा हटाए गए प्रत्येक मतदाता की सूची और हटाने का कारण सार्वजनिक करे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता केवल एक संख्या नहीं है, वह संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है।
किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाना केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि उसके लोकतांत्रिक अधिकार को प्रभावित करने वाला गंभीर कदम है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस स्पष्ट कहना चाहती है कि संविधान और मताधिकार पर किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा। संविधान बचेगा, लोकतंत्र बचेगा और जनता का वोट बचेगा।
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews
‘ग्लोबल साउथ’ को मिलेगी नई ताकत, भारत-घाना के बीच हुए कई MoU
पुलिस से भिड़ीं प्रियंका गांधी, सड़क पर लेटकर किया विरोध
छोटे से गमले में उगाएं खूबसूरत हरसिंगार, जानें परिजात का पौधा लगाने का तरीका
पश्चिम बंगाल का नाम बदलेगा? BJP अध्यक्ष ने बताया ‘पश्चिम बंग’ का प्लान
कोच्चि में हुआ EAS सम्मेलन, हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने पर जोर

