कोच्चि में हुआ EAS सम्मेलन, हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने पर जोर

Kochi

शाश्वत तिवारी

Kochi: सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए भारत की मेजबानी में केरल के कोच्चि में समुद्री सुरक्षा सहयोग पर 7वां EAS (पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन) सम्मेलन आयोजित किया गया। विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और नेविगेशन की स्वतंत्रता को मजबूत करना है।

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रणधीर जायसवाल

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की सह-अध्यक्षता ऑस्ट्रेलिया (विदेश मामलों और व्यापार विभाग) और फिलीपींस (विदेश मामलों के विभाग) द्वारा की गई। इसके साथ ही, सम्मेलन के सफल संचालन में अग्रणी थिंक-टैंक ‘रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज’ (आरआईएस) और राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन (NMF) ने नॉलेज पार्टनर्स (ज्ञान साझीदार) के रूप में अहम भूमिका निभाई।

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यह दो दिवसीय सम्मेलन प्रमुख रूप से ‘EAS कार्य योजना’ के कार्यान्वयन का एक हिस्सा था, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सतत विकास पर जोर दिया गया। बैठक के दौरान सदस्य देशों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने चार मुख्य स्तंभों पर गहन विचार-विमर्श किया। इन चार स्तंभों में क्षेत्रीय ब्लू इकोनॉमी मॉडल और महासागरीय शासन (ओशन गवर्नेंस) ढांचा और समुद्री सुरक्षा, संरक्षा एवं बहुपक्षीय सहयोग शामिल है। इसके अलावा इसमें मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) को मजबूत करने और क्षेत्रीय स्तर पर क्षमता निर्माण (कैपेसिटी-बिल्डिंग) और देशों की क्षमताओं का संवर्धन करना भी शामिल था।

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इसके अतिरिक्त, सत्रों में समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध रूप से मछली पकड़ने (IUUF) और संवेदनशील अंडरवाटर बुनियादी ढांचे (जैसे सबमरीन केबल) पर मंडराते साइबर खतरों से निपटने की रणनीतियों पर भी विमर्श हुआ।

इस सम्मेलन ने वैश्विक महासागरीय चुनौतियों का मुकाबला करने और समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर देशों के बीच आपसी विश्वास को गहरा करने में बड़ी सफलता हासिल की है। भारत की यह मेजबानी वैश्विक मंच पर सुरक्षा प्रदाता (नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर) के रूप में उसकी मजबूत होती भूमिका को रेखांकित करती है।

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