
New Delhi: पानी की बढ़ती कमी पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे समय में अमेरिका के एक सातवीं कक्षा के छात्र ने इस समस्या से निपटने की दिशा में एक दिलचस्प प्रयोग किया है। सैन जोस स्थित बेसिस इंडिपेंडेंट सिलिकॉन वैली के छात्र अंकित बुरकी ने ऐसी मशीन तैयार की है, जो हवा में मौजूद नमी को पानी में बदलती है। खास बात यह है कि अंकित ने पानी का उत्पादन बढ़ाने के लिए ध्वनि तरंगों का प्रयोग किया और उनके परीक्षण में पानी इकट्ठा करने की क्षमता 117 प्रतिशत तक बढ़ गई।
अंकित का यह इनोवेशन थर्मो फिशर साइंटिफिक जूनियर इनोवेटर्स चैलेंज 2026 के 30 राष्ट्रीय फाइनलिस्ट प्रोजेक्ट्स में जगह बना चुका है। यह अमेरिका में मिडिल स्कूल के छात्रों के लिए आयोजित होने वाली प्रमुख STEM प्रतियोगिताओं में शामिल है।
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पानी की समस्या से आया आइडिया
अंकित को अपने प्रोजेक्ट का विचार दुनिया में बढ़ती जल समस्या को देखकर आया। एटमॉस्फेरिक वॉटर जनरेटर यानी ऐसी मशीनें जो हवा में मौजूद नमी को पानी में बदलती हैं, पहले से मौजूद हैं। हालांकि, इन मशीनों की एक बड़ी चुनौती पर्याप्त मात्रा में पानी तैयार करना है। अंकित ने इसी समस्या पर प्रयोग करने का फैसला किया। उनका सवाल था कि क्या किसी सरल तकनीक के जरिए हवा से पानी बनाने वाली मशीन की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
खुद तैयार किया एटमॉस्फेरिक वॉटर जनरेटर
साउंड के साथ प्रयोग शुरू करने से पहले अंकित ने अपना एटमॉस्फेरिक वॉटर जनरेटर खुद तैयार किया। इसमें उन्होंने पेल्टियर इफेक्ट पर आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया में मशीन हवा को ठंडा करती है।
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लगातार परीक्षणों के बाद अंकित का प्रोटोटाइप आसपास की हवा का तापमान करीब 7.5 डिग्री सेल्सियस तक कम करने में सफल रहा। जब हवा का तापमान ड्यू पॉइंट से नीचे पहुंचता है, तो उसमें मौजूद जलवाष्प छोटी-छोटी बूंदों में बदलने लगती है। मशीन इन बूंदों को इकट्ठा करके पानी तैयार करती है।
चार-चार घंटे के किए कई परीक्षण
मशीन तैयार करने के बाद अंकित ने यह जानने की कोशिश की कि ध्वनि का पानी बनने की प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके लिए उन्होंने चार-चार घंटे के कई परीक्षण किए।
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पहले पांच परीक्षण बिना किसी ध्वनि के किए गए। इसके बाद स्पीकर की मदद से कम आवृत्ति वाली ध्वनि मशीन के पास इस्तेमाल की गई। अंकित ने दो तरह की ध्वनि तरंगों का परीक्षण किया—साइन वेव और ट्रायंगल वेव। उनकी परिकल्पना थी कि ध्वनि से पैदा होने वाले कंपन पानी की छोटी बूंदों को आपस में मिलने में मदद कर सकते हैं। जब छोटी बूंदें मिलकर बड़ी बूंदों में बदलती हैं, तो उन्हें इकट्ठा करना आसान हो सकता है।
साइन वेव का मिला सबसे बेहतर परिणाम
परीक्षणों में कम आवृत्ति वाली साइन वेव सबसे प्रभावी साबित हुई। इस प्रयोग के दौरान मशीन ने बिना ध्वनि वाले परीक्षणों की तुलना में 117 प्रतिशत अधिक पानी इकट्ठा किया।
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