
WHO Report: उम्र बढ़ने के साथ स्वस्थ रहना आज दुनिया के सामने बड़ी चुनौती बन गया है। एक समय माना जाता था कि लोग 80-90 साल तक आसानी से जीवन जीते थे, लेकिन अब बढ़ती बीमारियों और बदलती जीवनशैली का असर जीवन प्रत्याशा और स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 2023 के आंकड़ों में भारत समेत कई देशों की औसत जीवन प्रत्याशा और मौत के प्रमुख कारणों की तस्वीर सामने आई है।
भारत की औसत उम्र पाकिस्तान से ज्यादा
WHO के आंकड़ों के मुताबिक भारत में जन्म के समय औसत जीवन प्रत्याशा 71.0 साल है। वहीं पाकिस्तान में यह आंकड़ा 68.2 साल है। यानी औसत जीवन प्रत्याशा के मामले में भारत पाकिस्तान से आगे है। हालांकि, भारत अभी भी बांग्लादेश से पीछे है।
बांग्लादेश में जन्म के समय औसत जीवन प्रत्याशा 72.7 साल दर्ज की गई है। वहीं अमेरिका में यह 78.5 साल और कनाडा में 81.4 साल है।इन आंकड़ों से साफ है कि सिर्फ पड़ोसी देशों के बीच ही नहीं, बल्कि विकसित और विकासशील देशों के बीच जीवन प्रत्याशा में बड़ा अंतर मौजूद है।
लंबी उम्र से ज्यादा जरूरी स्वस्थ जीवन
सिर्फ ज्यादा साल तक जीना ही पर्याप्त नहीं है। अगर किसी व्यक्ति की जिंदगी के आखिरी वर्षों में गंभीर बीमारियां बनी रहें और वह सामान्य जीवन न जी पाए, तो जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
इसी को मापने के लिए हेल्दी लाइफ एक्सपेक्टेंसी (HALE) का इस्तेमाल किया जाता है। WHO के अनुसार, 2023 में दुनिया में स्वस्थ जीवन की औसत अवधि करीब 62.8 साल रही। इसका मतलब है कि कुल जीवन प्रत्याशा और स्वस्थ जीवन जीने के वर्षों के बीच अंतर मौजूद है।
दुनिया में मौतों की सबसे बड़ी वजह क्या?
WHO के आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में अब बड़ी संख्या में मौतें गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases) के कारण हो रही हैं। इनमें हृदय रोग, कैंसर और डायबिटीज जैसी लंबे समय तक रहने वाली बीमारियां शामिल हैं।
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2023 में दुनिया में हुई कुल मौतों में करीब 74 फीसदी मौतें गैर-संचारी बीमारियों से जुड़ी थीं। हृदय से संबंधित बीमारियां मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा स्ट्रोक, सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां और डायबिटीज भी बड़ी वजह बनी हुई हैं।
भारत-पाकिस्तान में हार्ट डिजीज बड़ा खतरा
भारत और पाकिस्तान में इस्केमिक हार्ट डिजीज मौत के प्रमुख कारणों में शामिल है। दक्षिण-पूर्व एशिया में हृदय संबंधी बीमारियों का बढ़ता बोझ स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा कोरोना महामारी के बाद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का असर भी सामने आया है। 2019 से 2023 के बीच डिप्रेशन से जुड़े हेल्दी लाइफ के गंवाए गए वर्षों में करीब 20 फीसदी और एंग्जायटी से जुड़े वर्षों में करीब 45 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
भारत और पाकिस्तान की जीवन प्रत्याशा में अंतर क्यों?
भारत और पाकिस्तान की औसत जीवन प्रत्याशा में अंतर के पीछे कई सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण हो सकते हैं। इनमें स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, इलाज तक पहुंच, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, साफ पानी और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण कारक शामिल हैं।
इसके अलावा हृदय रोग, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों का समय पर पता न चलना और उचित इलाज नहीं मिल पाना भी जीवन प्रत्याशा को प्रभावित कर सकता है।कुल मिलाकर, WHO के आंकड़े बताते हैं कि भारत जीवन प्रत्याशा के मामले में पाकिस्तान से आगे है, लेकिन विकसित देशों और कुछ पड़ोसी देशों की तुलना में अभी भी काफी पीछे है। चुनौती सिर्फ उम्र बढ़ाने की नहीं, बल्कि लोगों को ज्यादा वर्षों तक स्वस्थ और बेहतर जीवन उपलब्ध कराने की भी है।
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