
Jamie Dimon: मुंबई में आयोजित जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान CNBC-TV18 से बातचीत में जेमी डिमॉन ने कहा कि अमेरिका को भारत के साथ सख्त कदम उठाने से पहले यह समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल का किस तरह इस्तेमाल करती हैं।
डिमॉन ने कहा कि उम्मीद है कि अमेरिका रूस के खिलाफ जरूरी कदम उठाते समय भारत और दुनिया के तेल बाजार को नुकसान पहुंचाने वाले किसी फैसले से बचेगा। उनके मुताबिक, भारत में आने वाले रूसी तेल का कुछ हिस्सा घरेलू इस्तेमाल के लिए रिफाइन किया जाता है, जबकि कुछ तेल भारतीय रिफाइनरियों की विशेष जरूरतों के मुताबिक खरीदा जाता है।
उन्होंने कहा कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है, तो उसे किसी दूसरे देश से कच्चा तेल खरीदना पड़ेगा। ऐसे में यह जरूरी नहीं कि वैकल्पिक स्रोत से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों की तकनीकी जरूरतों के लिए उतना उपयुक्त हो।
रूस से तेल खरीदने वालों पर 100% तक टैरिफ का प्रावधान
जेमी डिमॉन का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े अमेरिकी विधेयक के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान चर्चा में है। इससे भारत समेत रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव बढ़ सकता है।
डिमॉन ने कहा कि रूस पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका को कदम जरूर उठाने चाहिए, लेकिन इसके साथ यह भी देखना होगा कि इन फैसलों का वैश्विक तेल बाजार पर कितना व्यापक असर पड़ सकता है।
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उन्होंने यूक्रेन के समर्थन में अमेरिका द्वारा और कदम उठाए जाने की बात भी कही, लेकिन साथ ही चेताया कि प्रतिबंधों और टैरिफ जैसे उपायों के संभावित आर्थिक प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
भारत पर बढ़ रहा अमेरिका और यूरोप का दबाव
रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत पर अमेरिका और यूरोपीय संघ का दबाव लगातार बना हुआ है। हालांकि, भारत अपनी ऊर्जा खरीद नीति का बचाव करता रहा है और रूसी तेल खरीदने को लेकर होने वाली आलोचना को अनुचित बताता रहा है।
भारत का कहना है कि उसकी ऊर्जा खरीद का मकसद देश की ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखना है। रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े अमेरिकी कदमों को लेकर नई दिल्ली ने यह भी संकेत दिया है कि इससे दोनों देशों के व्यापारिक और आर्थिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। ऐसे में भारत की रूसी तेल खरीद में किसी बड़े बदलाव का असर केवल दोनों देशों के व्यापार पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।
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