पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 10 सितंबर को समाप्त सप्ताह में देश का संवेदनशील मूल्य सूचकांक (SPI) पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 8.62 प्रतिशत बढ़ा। इस बढ़ोतरी में खाद्य वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों का बड़ा योगदान रहा।
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प्याज के दाम में सबसे बड़ा उछाल
महंगाई की मार सबसे ज्यादा प्याज पर पड़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में प्याज की कीमत में 125.52 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई। यानी जिस सब्जी को आमतौर पर रोजमर्रा के खाने का जरूरी हिस्सा माना जाता है, वह अब लोगों के बजट को खासा प्रभावित कर रही है। प्याज के अलावा रसोई गैस यानी LPG की कीमत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। LPG के दाम सालाना आधार पर करीब 55.42 प्रतिशत बढ़े हैं। इससे घरेलू रसोई का खर्च और बढ़ने की आशंका है।
पेट्रोल-डीजल भी हुए महंगे
पाकिस्तान में ईंधन की बढ़ती कीमतें भी आम जनता की परेशानी बढ़ा रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक डीजल की कीमत में 45.26 प्रतिशत, जबकि पेट्रोल के दाम में 39.10 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। ईंधन महंगा होने का असर केवल वाहन चलाने वालों पर ही नहीं पड़ता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव माल ढुलाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। परिवहन लागत बढ़ने से बाजार में अन्य सामान के दाम भी प्रभावित होते हैं।
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आटा भी आम आदमी की पहुंच से दूर
पाकिस्तान में खाने-पीने की जरूरी चीजों की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। गेहूं के आटे की कीमत में 30.18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। आटा पाकिस्तान के लोगों के लिए प्रमुख खाद्य पदार्थों में शामिल है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ता है। इसके अलावा बिजली की पहली तिमाही की दरों में भी करीब 25.24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बिजली और ईंधन दोनों के महंगे होने से घरेलू खर्च पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
वैश्विक हालात का भी असर
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को भी एक वजह माना जा रहा है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और उससे जुड़े भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर तेल आयात पर निर्भर देशों पर तेजी से पड़ता है। पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक चुनौतियों, महंगाई और विदेशी मुद्रा से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहा है। ऐसे में ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी आम नागरिकों के लिए नई चिंता बन गई है।
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