
Bengaluru: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में ISIS से जुड़ी आतंकी साजिश के मामले में विशेष NIA अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी सैयद फसिउर रहमान को आतंकी साजिश में शामिल होने का दोषी मानते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर 48 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मुताबिक, यह मामला आतंकी गतिविधियों के लिए साजिश रचने और सांप्रदायिक तनाव भड़काने के उद्देश्य से लक्षित हत्याओं की योजना से जुड़ा था। जांच एजेंसी ने मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर महबूब पाशा का नाम सामने रखा है।
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बैठकों में शामिल होने का आरोप
NIA की जांच के अनुसार, महबूब पाशा ने बेंगलुरु के गुरप्पनपाल्या इलाके स्थित अपने आवास पर कथित तौर पर कई बैठकें आयोजित की थीं। एजेंसी का आरोप है कि इन बैठकों में प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़े एजेंडे को आगे बढ़ाने और हिंसक गतिविधियों की योजना पर चर्चा हुई। दोषी ठहराए गए सैयद फसिउर रहमान पर भी इन बैठकों में शामिल होने का आरोप था। जांच एजेंसी ने अदालत के सामने उसके खिलाफ विभिन्न साक्ष्य पेश किए, जिसके आधार पर उसे साजिश का हिस्सा माना गया।
प्रशिक्षण शिविर के लिए सामान खरीदने का दावा
NIA के अनुसार, रहमान ने अल-हिंद समूह से जुड़े सदस्यों के कथित जंगल प्रशिक्षण शिविर के लिए कुछ सामान खरीदा था। एजेंसी ने दावा किया कि उसने एक स्पोर्ट्स स्टोर से टेंट और चाकू खरीदे थे। जांच में इन गतिविधियों को आतंकी नेटवर्क की तैयारी से जोड़कर देखा गया। एजेंसी के मुताबिक, इस कथित साजिश का उद्देश्य ISIS/दाएश के लिए एक अलग ‘विलायाह’ यानी प्रशासनिक क्षेत्र स्थापित करने की दिशा में काम करना था। हालांकि, मामले में दोष और सजा का निर्धारण अदालत के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर हुआ है।
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2020 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला शुरुआत में कर्नाटक पुलिस ने 10 जनवरी 2020 को बेंगलुरु में दर्ज किया था। इसके बाद 23 जनवरी 2020 को NIA ने जांच अपने हाथ में लेते हुए केस को दोबारा दर्ज किया और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने के साथ एजेंसी ने मामले में कई आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की। NIA के अनुसार, अब तक 20 आरोपियों के खिलाफ तीन अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
पहले भी एक आरोपी को सुनाई जा चुकी है सजा
इस मामले में इससे पहले भी अदालत की ओर से कार्रवाई हो चुकी है। 14 जुलाई 2026 को हनीफ खान को दोषी ठहराया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, उसने अक्टूबर 2025 में शुरू हुई सुनवाई के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। सैयद फसिउर रहमान को मिली सात साल की सजा को मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। NIA की ओर से मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया जारी है।
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