
Lucknow रक्षाबंधन पर दिखी इंसानियत की मिसाल
बाल्टी के सहारे मुस्लिम भाई को बांधी राखी
विजय श्रीवास्तव
राजधानी लखनऊ में रक्षाबंधन के मौके पर हिंदू-मुस्लिम एकता और भाई-बहन के रिश्ते की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने लोगों का दिल जीत लिया। पीजीआई रोड स्थित उतरठिया चौराहे के पास एक बुजुर्ग हिंदू महिला अपनी शारीरिक परेशानी की परवाह किए बिना बाल्टी के सहारे घिसटकर अपने मुस्लिम मुंहबोले भाई के घर पहुंचीं और उन्हें राखी बांधी। यह रिश्ता कोई नया नहीं है। दोनों परिवारों के बीच पिछले करीब 40 वर्षों से भाई-बहन का यह स्नेह कायम है। हर रक्षाबंधन पर राजरानी यादव अपने मुंहबोले भाइयों को राखी बांधने उनके घर पहुंचती हैं।
शारीरिक परेशानी भी नहीं रोक सकी कदम
राजरानी यादव को करीब तीन साल पहले लकवे का अटैक पड़ा था। डॉक्टरों ने उन्हें चलने से मना किया है। इसके बावजूद रक्षाबंधन पर भाई के प्रति उनका स्नेह उन्हें घर से निकलने के लिए प्रेरित करता है। शुक्रवार को रक्षाबंधन के दिन वह बाल्टी के सहारे घिसटते हुए अपने भाई के घर पहुंचीं। उनके साथ एक थाली थी, जिसमें रोली, राखी और मिठाई रखी थी। वहां पहुंचकर उन्होंने मुस्लिम भाई वफाती आलम की विधि-विधान से पूजा की, रोली लगाई और उनकी कलाई पर राखी बांधी। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। वफाती आलम ने भी बहन के प्रति अपना स्नेह जताते हुए उन्हें नेग के रूप में 501 रुपये भेंट किए।
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सगे भाई को भी बांधी राखी
राजरानी यादव ने वफाती आलम के सगे भाई मोहम्मद उमर को भी राखी बांधी। उन्होंने रोली लगाकर मिठाई खिलाई। उमर ने भी बहन को नेग के तौर पर 501 रुपये दिए। इस दौरान दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्ते की यादें भी ताजा हुईं। परिवार के सदस्य मेहताब आलम ने बताया कि राजरानी यादव उनके परिवार के लिए सगी बुआ से भी बढ़कर हैं।
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मुश्किल वक्त में बुआ ने दिया परिवार का साथ
मेहताब आलम ने बताया कि करीब चार दशक पहले दोनों परिवारों के बीच यह आत्मीय रिश्ता बना था। राजरानी यादव के पति हरिप्रसाद यादव सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने भावुक होकर बताया कि जब उनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था और घर में चूल्हा जलना मुश्किल था, तब राजरानी यादव और उनके परिवार ने खाने-पीने में मदद की थी। मेहताब के मुताबिक, उस मदद को उनका परिवार कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर बुआ उनके पांचों भाइयों और परिवार की बहुओं को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर आशीर्वाद देती हैं।
40 साल से कायम है भाईचारे की मिसाल
मेहताब आलम ने बताया कि पिछले 40 वर्षों में देश और प्रदेश में कई बार हिंदू-मुस्लिम विवाद की परिस्थितियां बनीं, लेकिन दोनों परिवारों के रिश्ते पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। दोनों परिवार आज भी एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं। उतरठिया व्यापार मंडल के अध्यक्ष ललित सक्सेना ने भी दोनों परिवारों के रिश्ते की सराहना की। उन्होंने बताया कि मेहताब आलम सामाजिक और प्रशासनिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं और पीस कमेटी की बैठकों के साथ-साथ विभिन्न त्योहारों व जुलूसों के दौरान भी सहयोग करते हैं। रक्षाबंधन पर सामने आई यह कहानी बताती है कि रिश्ते मजहब से नहीं, बल्कि प्यार, भरोसे और इंसानियत से मजबूत होते हैं।
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