हरिद्वार ब्लड तस्करी केस में बड़ा खुलासा, बिना डॉक्टर रक्त निकालने का आरोप

Haridwar

स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच

Blood trafficking in Haridwar:  उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में रक्तदान शिविरों की आड़ में कथित तौर पर खून के अवैध कारोबार का मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि गांव-गांव में रक्तदान शिविर लगाकर लोगों से रक्त एकत्र किया जाता था और बाद में उसे दूसरे जिलों में बेचने का आरोप है। इस मामले में गिरोह के कथित सरगना दुष्यंत के पिता और बिजनौर के सपा नेता एवं अधिवक्ता मदन लाल सैनी की भूमिका भी पुलिस जांच के घेरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने करीब चार महीने पहले एक ट्रस्ट बनाकर लक्सर में अमृत ब्लड बैंक का संचालन शुरू किया था। पुलिस ने उनकी भूमिका स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। ट्रस्ट से जुड़े अन्य सदस्यों से भी पूछताछ की जा सकती है।

रक्तदान की आड़ में खून बेचने का आरोप

पुलिस की पड़ताल के अनुसार लक्सर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में रक्तदान शिविर लगाए जाते थे। इन शिविरों में एकत्र किए गए रक्त को कथित तौर पर पड़ोसी राज्य के अलग-अलग जिलों में ले जाकर बेचने का आरोप है। ट्रस्ट की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद मरीजों की मदद को उद्देश्य बताया गया था। हालांकि, गोपनीय सूचना के आधार पर हुई जांच में कथित तौर पर रक्तदान शिविरों की आड़ में खून के अवैध कारोबार का मामला सामने आया। चूंकि ये शिविर अमृत ब्लड बैंक के नाम से लगाए जाते थे और रक्तदान करने वालों को भी इसी नाम से प्रमाण पत्र जारी किए जाते थे, इसलिए पुलिस ब्लड बैंक और ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस ने मदन लाल सैनी को भेजा नोटिस

पुलिस ने सपा नेता मदन लाल सैनी को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ब्लड बैंक और ट्रस्ट के संचालन में उनकी वास्तविक भूमिका क्या थी और रक्तदान शिविरों से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी उन्हें थी या नहीं। कोतवाली प्रभारी प्रवीण सिंह कोश्यारी के अनुसार, पूछताछ के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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बिना डॉक्टर के रक्त निकालने का आरोप

जांच में यह बात भी सामने आई है कि कथित रक्तदान शिविरों में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं रहता था। पुलिस के अनुसार कामेंद्र और दयाराम रक्त निकालने और उसे स्टोर करने की जिम्मेदारी संभालते थे। कामेंद्र ने मुरादाबाद और दयाराम ने अलीगढ़ में लैब टेक्नीशियन के रूप में काम करने का दावा किया है। दोनों ने DNLT यानी डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी करने की बात कही है। हालांकि, पुलिस को उनके शैक्षणिक दस्तावेजों पर संदेह है। जांच अधिकारी विपिन कुमार दोनों के डिप्लोमा की सत्यता की जांच के लिए दस्तावेज संबंधित स्तर पर भेजेंगे।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ब्लड सेंटर की जांच की

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है। CMO के निर्देश पर मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम लक्सर पहुंची और संबंधित ब्लड सेंटर का निरीक्षण किया। लक्सर CHC के चिकित्सा अधीक्षक डा. सैयद रफी अहमद के नेतृत्व में टीम ने ब्लड सेंटर से जुड़े दस्तावेज और व्यवस्थाओं की जांच की। ACMO डा. अनिल वर्मा ने बताया कि संबंधित रक्तदान केंद्र की जांच के आदेश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच के साथ बढ़ सकती हैं मुश्किलें

खून के कथित अवैध कारोबार का यह मामला सामने आने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों स्तर पर जांच जारी है। ट्रस्ट, ब्लड बैंक, रक्तदान शिविरों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि पूछताछ और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी और नियमों का कितना उल्लंघन हुआ। मामले में आगे और भी खुलासे होने की संभावना है।

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