
Operation Sindoor Sukhoi-30MKI: मई 2025 में भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इस अभियान के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। ऑपरेशन के बाद राफेल लड़ाकू विमानों की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में रही, लेकिन इस पूरे अभियान में भारतीय वायुसेना के दूसरे लड़ाकू विमानों ने भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। इनमें सुखोई-30MKI का नाम प्रमुखता से सामने आया।
राफेल को उसकी आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता और लंबी दूरी की मिसाइलों के कारण खास तवज्जो मिली। हालांकि, सुखोई-30MKI भारतीय वायुसेना का लंबे समय से प्रमुख मल्टी-रोल फाइटर रहा है। इसकी बड़ी हथियार क्षमता, लंबी उड़ान क्षमता और अलग-अलग तरह के मिशन को अंजाम देने की क्षमता इसे बेहद उपयोगी प्लेटफॉर्म बनाती है।
सुखोई-30MKI की खास भूमिका
सुखोई-30MKI को भारत ने अपनी जरूरतों के मुताबिक बड़े स्तर पर अपग्रेड किया है। यह विमान एयर-टू-एयर मिशन के साथ-साथ जमीन पर मौजूद लक्ष्यों के खिलाफ स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक करने में भी सक्षम है।
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ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी सामने आई जानकारी और भारतीय वायुसेना द्वारा जारी फुटेज में सुखोई-30MKI से रैंपेज मिसाइल के इस्तेमाल का उल्लेख हुआ। रैंपेज एक स्टैंड-ऑफ हथियार है, जिसे विमान को लक्ष्य के बेहद करीब गए बिना हमला करने की क्षमता देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे लड़ाकू विमान को दुश्मन की एयर डिफेंस के सीधे खतरे से कुछ दूरी बनाए रखने में मदद मिलती है।
सिर्फ हमला नहीं, एयर डिफेंस भी अहम
सुखोई-30MKI की खासियत केवल भारी हथियार ले जाने तक सीमित नहीं है। यह विमान हवा में दुश्मन के लड़ाकू विमानों से मुकाबला करने के लिए भी तैयार रहता है। इसमें अस्त्र जैसी स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलों को शामिल किया गया है। अस्त्र का उद्देश्य लंबी दूरी से हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाना है। इसके अलावा आर-73 जैसी क्लोज-रेंज मिसाइलें नजदीकी हवाई मुकाबले में उपयोगी मानी जाती हैं। इस तरह के हथियार संयोजन से सुखोई एक मल्टी-रोल प्लेटफॉर्म के रूप में काम कर सकता है। जरूरत के मुताबिक इसका इस्तेमाल स्ट्राइक, एयर डिफेंस और एस्कॉर्ट मिशन में किया जा सकता है।
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राफेल की चर्चा क्यों हुई?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद राफेल की भूमिका इसलिए भी सुर्खियों में रही क्योंकि यह भारतीय वायुसेना के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल है। इसमें आधुनिक सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और विभिन्न प्रकार के सटीक हथियारों को इस्तेमाल करने की क्षमता है।
लेकिन किसी बड़े हवाई अभियान में केवल एक विमान की भूमिका नहीं होती। अलग-अलग प्लेटफॉर्म अपनी क्षमता के अनुसार अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हैं। राफेल, सुखोई-30MKI और मिराज-2000 जैसे विमानों का संयोजन भारतीय वायुसेना को अलग-अलग मिशन के लिए विकल्प देता है।
भारतीय वायुसेना की ‘बैकबोन’ में शामिल सुखोई
सुखोई-30MKI की सबसे बड़ी ताकत इसकी संख्या और लंबी अवधि की उपयोगिता भी है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में यह एक प्रमुख लड़ाकू विमान है और लगातार इसके अपग्रेड पर काम किया जा रहा है। नए एवियॉनिक्स, रडार और हथियारों के एकीकरण के साथ इसकी क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। स्वदेशी अस्त्र मिसाइल का एकीकरण भी भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
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