
Punjab Power Generation : मानसून के सक्रिय होने के साथ पंजाब के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश का सकारात्मक असर अब रणजीत सागर बांध (थीन डैम) पर दिखाई देने लगा है। पिछले 24 घंटों में बांध की झील का जलस्तर करीब 30 सेंटीमीटर बढ़ा है। इसके पीछे पहाड़ों से आने वाला बढ़ा हुआ जल प्रवाह और चमेरा जलविद्युत परियोजना से छोड़ा गया पानी प्रमुख कारण माना जा रहा है।
बांध प्रशासन के अनुसार जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, हालांकि यह अभी भी खतरे के निशान से लगभग 25 मीटर नीचे है। ऐसे में फिलहाल किसी प्रकार की बाढ़ या सुरक्षा संबंधी चिंता की स्थिति नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहता है तो बांध में पानी की आवक और तेज हो सकती है, जिससे जल भंडारण क्षमता में और सुधार होगा।
प्रतिदिन 65 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन
रणजीत सागर बांध में जलस्तर बढ़ने का सीधा फायदा बिजली उत्पादन पर भी दिखाई दे रहा है। फिलहाल बांध की सभी चार उत्पादन इकाइयां पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रही हैं, फिर भी प्रतिदिन लगभग 65 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। वर्तमान में करीब 540 मेगावाट बिजली तैयार की जा रही है। बिजली उत्पादन के बाद लगभग 21 हजार क्यूसेक पानी शाहपुर कंडी बैराज की ओर छोड़ा जा रहा है। इससे बैराज की झील का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। मौजूदा समय में शाहपुर कंडी बैराज का जलस्तर 401.60 मीटर तक पहुंच चुका है, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 404.50 मीटर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश जारी रही तो बैराज भी जल्द अपनी निर्धारित क्षमता के करीब पहुंच सकता है।
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बारिश से सिंचाई के लिए पानी की मांग घटी
मानसून की बारिश का असर मैदानी इलाकों में भी देखने को मिल रहा है। पंजाब के कई जिलों में रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण किसानों की सिंचाई के लिए नहरों के पानी पर निर्भरता कुछ कम हुई है। यही वजह है कि शाहपुर कंडी बैराज से माधोपुर हेडवर्क्स की ओर फिलहाल 11,600 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। माधोपुर हेडवर्क्स से विभिन्न नहरों में जरूरत के अनुसार पानी की आपूर्ति की जा रही है। अपर बारी दोआब नहर में 7,823 क्यूसेक, एमबी लिंक नहर में 3,100 क्यूसेक, कश्मीर नहर में 369 क्यूसेक और इस्लामपुर नहर में 300 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे पंजाब के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी सिंचाई व्यवस्था सुचारु बनी हुई है।
प्रशासन की जल प्रबंधन पर लगातार नजर
बांध प्रशासन और जल संसाधन विभाग स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मानसून अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले सप्ताहों में यदि पहाड़ी इलाकों में अच्छी बारिश जारी रहती है तो रणजीत सागर बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। फिलहाल सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है और जल प्रबंधन पूरी तरह नियंत्रण में है। इस मानसून से पंजाब को तीन बड़े फायदे मिलने की उम्मीद है—जल भंडारण में वृद्धि, बिजली उत्पादन में सुधार और सिंचाई व्यवस्था को मजबूती। यदि मौसम अनुकूल बना रहा तो आने वाले दिनों में राज्य के जल संसाधनों की स्थिति और बेहतर हो सकती है।
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