
आगरा से कोलकाता तक ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई प्रस्तावों पर लगी मुहर
Ashwini Vaishnaw : केंद्र सरकार ने देश के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और औद्योगिक विकास को एक नई ऊंचाई देने के लिए अब तक के सबसे बड़े निवेश प्रस्तावों में से एक को हरी झंडी दे दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया, जिसकी घोषणा केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की। देश को वैश्विक विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) हब बनाने और कनेक्टिविटी को सुगम बनाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने कुल 2,19,353 करोड़ रुपये के कुल बजट वाले सात बड़े प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की है।
यह विशाल पैकेज देश की आर्थिक विकास दर को तेज करने और औद्योगिक परिदृश्य को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा। केंद्रीय कैबिनेट ने एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 6 लेन के ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी है। एनएच-19 उत्तर प्रदेश के आगरा से शुरू होकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता (डंकुनी) तक जाता है। यह लगभग 1323 किलोमीटर लंबा मार्ग है जो उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों से होकर गुजरता है। सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को इस बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने बुधवार को कुल 2,19,353 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
वाराणसी में गंगा तथा वरुणा तटों पर बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और शहर की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 25,445.96 करोड़ रुपये की लागत की दो एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों योजनाओं का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा। इसमें पहली परियोजना के राष्ट्रीय राजमार्ग-19 से वाराणसी रिंग रोड के बीच गंगा के तट पर छह लेन के ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा तथा दूसरी परियोजना के तहत वरुणा नदी के तट के साथ छह तथा चार लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा।
मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को मंजूरी
सरकार ने देश में मोबाइल फोन निर्माण को नयी गति देने, घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने, और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दे दी है जिस पर 62,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान है। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) को मंजूरी दे दी है। 62,500 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान वाली यह योजना देश में मोबाइल फोन निर्माण को नयी गति देने, घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की गयी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।
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