UP में ब्राह्मण वोटरों के लिये सजते सियासी गुलदस्ते

Untitled 3 copy
अजय कुमार                             
अजय कुमार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज एक बार फिर केंद्र में आ गया है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए लगभग सभी प्रमुख दल इस समाज को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुट गये हैं। लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी का मजबूत आधार माने जाने वाले ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर अब विपक्षी दलों को यह उम्मीद दिखाई दे रही है कि उनमें कुछ नाराजगी पनप रही है। यही कारण है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों ही अपने-अपने तरीके से ब्राह्मण समाज को साधने में लगी हुई हैं। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी यह समझती है कि यदि ब्राह्मण मतदाता बड़ी संख्या में उससे दूर हुए तो उसका चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है। इसलिए सत्ता पक्ष भी लगातार संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव लगातार यह संदेश देने में लगे हैं कि वर्तमान सरकार में एक खास जाति का प्रभाव बढ़ गया है और ब्राह्मण समाज स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है। सपा यह धारणा बनाने का प्रयास कर रही है कि प्रशासनिक तंत्र में ठाकुर समाज के अधिकारियों का दबदबा है और उन्हें बेहतर पदों पर तैनाती मिल रही है। कानून व्यवस्था से जुड़े कुछ मामलों को भी इसी दृष्टि से प्रचारित किया जा रहा है ताकि ब्राह्मण मतदाताओं के भीतर असंतोष पैदा किया जा सके।

ये भी पढ़े

पेट्रोल-डीजल महंगा पड़ते ही फूटा गुस्सा, डिलीवरी बॉयज करेंगे स्ट्राइक

लेकिन समाजवादी पार्टी के सामने सबसे बड़ी समस्या उसका अपना पुराना इतिहास है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्मृतियां बहुत जल्दी धुंधली नहीं होतीं। बड़ी संख्या में ब्राह्मण मतदाता आज भी उस दौर को याद करते हैं जब सपा की सरकार पर गुंडाराज, जातीय पक्षपात और कानून व्यवस्था बिगड़ने के आरोप लगते थे। उस समय कई ऐसे घटनाक्रम हुए जिन्हें विपक्ष ने ब्राह्मण विरोधी वातावरण के रूप में प्रचारित किया। यही वजह है कि सपा चाहे जितनी कोशिश करें, उसके सामने भरोसे का संकट बना हुआ है। स्थिति तब और कठिन हो जाती है जब पार्टी के कुछ नेता विवादित बयान दे देते हैं। सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजकुमार भाटी का हालिया बयान इसी श्रेणी में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने ब्राह्मण समाज की तुलना अपमानजनक तरीके से की। ऐसे बयान सपा की उस कोशिश को कमजोर करते हैं, जिसमें वह स्वयं को ब्राह्मण हितैषी साबित करना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल सम्मेलनों और नारों से कोई समाज प्रभावित नहीं होता, बल्कि वह नेताओं की भाषा और व्यवहार को भी देखता है। यदि पार्टी के भीतर से ही विरोधाभासी संकेत मिलें तो मतदाताओं का भरोसा बन पाना कठिन हो जाता है।

ये भी पढ़े

सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, निवेशकों में मची हलचल

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती भी इस समय ब्राह्मण वोटरों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। एक समय ऐसा था जब बहुजन समाज पार्टी ने दलित और ब्राह्मण सामाजिक समीकरण के सहारे उत्तर प्रदेश की सत्ता प्राप्त की थी। उस दौर में “ब्राह्मण शंख बजायेगा, हाथी बढ़ता जायेगा” जैसे नारे खूब चर्चित हुए थे। पार्टी ने बड़ी संख्या में ब्राह्मण नेताओं को आगे बढ़ाया और उन्हें सम्मानजनक हिस्सेदारी भी दी। हालांकि बसपा के सामने भी विरोधाभास की समस्या है। राजनीतिक विरोधियों को आज भी उसका पुराना नारा “तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार” याद है। विरोधी दल यह सवाल उठाते हैं कि जो पार्टी कभी ब्राह्मण विरोधी नारे लगाती थी, वह आज अचानक ब्राह्मण हितैषी कैसे बन गयी। यही कारण है कि मायावती लगातार समाजवादी पार्टी को घेरते हुए स्वयं को अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही हैं। मायावती समझती हैं कि यदि ब्राह्मण मतदाता भाजपा से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं तो उन्हें आकर्षित करने का अवसर अभी भी मौजूद है। इसलिए वह सपा पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव से अपने नेताओं के बयानों पर माफी मांगने की मांग कर रही हैं। यह केवल राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। बसपा चाहती है कि ब्राह्मण समाज के भीतर यह संदेश जाए कि सपा केवल चुनावी लाभ के लिए उन्हें याद कर रही है, जबकि उसके नेताओं की मानसिकता अब भी वही है। उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहे हैं।

ये भी पढ़े

पति की लंबी उम्र के लिए सुहागिन महिलाएं रखेंगी, वट सावित्री व्रत

भाजपा की राजनीति लंबे समय से सामाजिक संतुलन पर आधारित रही है। पार्टी यह भलीभांति जानती है कि उत्तर प्रदेश में केवल एक जाति के सहारे सत्ता में बने रहना संभव नहीं है। ब्राह्मण समाज भाजपा का परंपरागत समर्थक माना जाता रहा है और यदि उसमें नाराजगी का संदेश फैलता है तो उसका असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। इसी कारण हाल के मंत्रिमंडल विस्तार में ब्राह्मण चेहरे मनोज पाण्डेय को मंत्री बनाकर भाजपा ने स्पष्ट संकेत देने की कोशिश की कि पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहती है। भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि सरकार में ब्राह्मण समाज की भागीदारी और सम्मान दोनों सुरक्षित हैं। इसके अलावा पार्टी संगठन में भी ब्राह्मण नेताओं की सक्रियता बढ़ायी जा रही है। भाजपा की चिंता यह है कि विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि वर्तमान सरकार में ठाकुर समाज का प्रभाव अधिक है। कई प्रशासनिक नियुक्तियों और पुलिस कार्यवाहियों को लेकर भी सवाल उठाये गये हैं। लेकिन भाजपा समर्थकों का कहना है कि योगी सरकार ने जाति के बजाय कानून व्यवस्था को प्राथमिकता दी है और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई बिना भेदभाव के की गयी है। भाजपा का तर्क यह भी है कि यदि केवल जातीय आधार पर शासन चल रहा होता तो उसे लगातार व्यापक जनसमर्थन नहीं मिलता।

ये भी पढ़े

गजब प्यार! इधर बेटी की उठी डोली उधर मां की उठ गई अर्थी

बहरहाल, उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज को लेकर तीनों प्रमुख दलों में रस्साकशी इसलिये हो रही है क्योंकि ब्राह्मणों की संख्या भले ही बहुत अधिक न हो, लेकिन उसका राजनीतिक प्रभाव काफी व्यापक माना जाता है। यह समाज केवल वोट देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक और वैचारिक स्तर पर भी प्रभाव डालता है। यही कारण है कि हर दल उसे अपने साथ जोड़ने की कोशिश करता है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति को देखें तो ब्राह्मण मतदाता पूरी तरह किसी एक दल के साथ बंधा हुआ नहीं दिख रहा। वह अपने सम्मान, भागीदारी और सुरक्षा को लेकर सजग है। लेकिन साथ ही वह पुराने अनुभवों को भी याद रखता है। समाजवादी पार्टी के सामने चुनौती यह है कि वह केवल आरोपों के सहारे नहीं, बल्कि व्यवहार और नेतृत्व की विश्वसनीयता के माध्यम से भरोसा पैदा करे। बहुजन समाज पार्टी को अपने पुराने नारों और छवि से बाहर निकलना होगा। वहीं भाजपा को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके खिलाफ फैलाई जा रही उपेक्षा की धारणा मजबूत न हो। कुल मिलाकर, 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव केवल विकास और कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं होगा, बल्कि सामाजिक संतुलन और राजनीतिक विश्वास की भी परीक्षा बनेगा। ब्राह्मण मतदाता इस बार किस ओर जायेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता उसके रुख से जरूर प्रभावित होगा। सभी दलों के नेताओं ने ब्राह्मण वोटों के लिये सियासी गुलदस्ते तैयार कर रखे हैं। देखना यह है कि 2027 में ब्राह्मण वोटर किसका गुलदस्ता स्वीकार करेगा।

ये भी पढ़े

पेट्रोल-डीजल के दाम में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी


नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

Spread the love

 BRICS security meeting India
homeslider International

साइबर सुरक्षा से लेकर आतंकवाद तक, नए खतरों के खिलाफ एकजुट ब्रिक्स

  शाश्वत तिवारी  BRICS security meeting India :   ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की 16वीं बैठक यहां नई दिल्ली में आयोजित हुई। इस दौरान ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों व प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने सदस्य देशों के बीच मजबूत सामूहिक सहयोग का आह्वान किया और साथ ही दुनिया के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों पर […]

Spread the love
Read More
UNSC India Pakistan
homeslider International

UNSC में भारत ने पाकिस्तान को लगाई फटकार, कश्मीर का मुद्दा उठाने पर दिया करारा जवाब

UNSC India Pakistan : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक अहम बैठक में भारत ने पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर कड़ी फटकार लगाई है। पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने दो टूक कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इस […]

Spread the love
Read More
Love Affair
Crime News homeslider

प्रेमी को बचाने के लिए बेटे का काल बनी मां, आशिक के साथ की हत्या

Love Affair उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सात वर्षीय बच्चे के अपहरण और हत्या के मामले में पुलिस जांच के दौरान ऐसा खुलासा हुआ है जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया। पुलिस के अनुसार, मासूम की हत्या किसी और ने नहीं बल्कि उसकी मां ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर कराई थी। आरोप है […]

Spread the love
Read More